30 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

महिलाओं के लिए साइबर सुरक्षा: ऑनलाइन स्टॉकिंग, फ्रॉड और डीपफेक से कैसे बचें?

ऑनलाइन ठगी, साइबर उत्पीड़न, डीपफेक और सोशल मीडिया के बढ़ते खतरों के बीच महिलाओं के लिए डिजिटल सुरक्षा बेहद जरूरी है। जानिए मजबूत पासवर्ड, 2FA, प्राइवेसी सेटिंग्स और सरकारी सहायता से जुड़े जरूरी सुरक्षा उपाय।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Ravi Gupta

Jul 30, 2026

Women Cyber Safety, Digital Security, Online Safety Tips,

प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

ऑनलाइन दुनिया में हमारी पहचान, निजी बातें और भावनाएँ सब कुछ डिजिटल रूप में मौजूद हैं। लेकिन इसी डिजिटल जुड़ाव ने हमें साइबर खतरों के सामने भी ला खड़ा किया है। खासकर महिलाओं के लिए ये खतरे और भी गंभीर हो सकते हैं - चाहे वह सोशल मीडिया पर हों, ऑनलाइन शॉपिंग में, या किसी मैसेजिंग ऐप पर। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि हम स्वयं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

साइबर सुरक्षा की सरकारी पहलें

सरकार ने महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। CERT‑In (भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने "महिला रक्षा" नाम से एक जागरूकता पुस्तिका जारी की है, जो महिलाओं को साइबर सुरक्षा के सरल और प्रभावी उपाय बताती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर "महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक" भी जारी की गई थी। इन दस्तावेजों में पासवर्ड सुरक्षा, सोशल मीडिया गोपनीयता, सुरक्षित ब्राउज़िंग जैसे विषय शामिल हैं।

साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे साइबर अपराधों जैसे स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, मालवेयर आदि से बचने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं।

इनमें शामिल हैं: वेबकैम को ढककर रखना, सॉफ़्टवेयर को अपडेट रखना, सोशल मीडिया की गोपनीयता सेटिंग्स को मजबूत रखना, सार्वजनिक वाई‑फाई पर संवेदनशील कार्य न करना आदि।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल भी महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा सुझाव देती है—जैसे सुरक्षित ऑनलाइन नाम चुनना, मजबूत पासवर्ड रखना, अनजान लिंक पर क्लिक न करना, और किसी भी आपत्तिजनक सामग्री का स्क्रीनशॉट लेकर रिपोर्ट करना।

ऑनलाइन धोखाधड़ी और सोशल इंजीनियरिंग से बचाव

ऑनलाइन डेटिंग, नौकरी के झांसे, या बहुत सस्ते शॉपिंग ऑफर—ये सभी महिलाओं को निशाना बनाने वाले आम जाल हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि महिलाओं को अक्सर रोमांस स्कैम, नकली नौकरी के ऑफर और फर्जी शॉपिंग वेबसाइटों के जरिए ठगा जाता है।

सलाह: व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, किसी ऑनलाइन रोमांटिक रुचि को पैसे न भेजें, और सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों व निजी जानकारियों को सुरक्षित रखें।

डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए कुछ और सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण उपाय हैं:

  • हर अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें, और जहाँ संभव हो दो-चरणीय प्रमाणीकरण (2FA) चालू करें।
  • ऐप्स केवल विश्वसनीय स्रोतों से डाउनलोड करें—जैसे Google Play या Apple App Store; फर्जी या अनजान ऐप्स से बचें।
  • सार्वजनिक वाई‑फाई पर बैंकिंग या संवेदनशील कार्य न करें, क्योंकि यह डेटा चोरी का आसान रास्ता हो सकता है।
  • QR कोड स्कैन करते समय सावधानी बरतें—कई बार धोखाधड़ी के लिए QR कोड का उपयोग किया जाता है।

फोन खो जाने या सिम स्वैप फ्रॉड जैसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें - अपने सिम को ब्लॉक कराएं, बैंकिंग ऐप्स की सुरक्षा सुनिश्चित करें और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें। साथ ही, बैंक स्टेटमेंट्स को नियमित रूप से देखें ताकि किसी भी अनधिकृत लेन-देन का पता तुरंत चल सके।

ऑनलाइन उत्पीड़न या धमकी की स्थिति में क्या करें

यदि आपको ऑनलाइन धमकी, छेड़छाड़ या किसी प्रकार का उत्पीड़न हो रहा है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें। संभव हो तो संबंधित मैसेज, स्क्रीनशॉट, यूज़र आईडी आदि का डिजिटल प्रमाण सुरक्षित रखें।

सरकार ने 'वन स्टॉप सेंटर' की व्यवस्था की है, जहाँ महिलाएँ साइबर उत्पीड़न की स्थिति में कानूनी सहायता, काउंसलिंग और रिपोर्टिंग सुविधा प्राप्त कर सकती हैं।

डिजिटल पहचान और मानसिक सुरक्षा

महिलाओं को अक्सर ऑनलाइन पहचान की चोरी, डीपफेक्स, और पहचान छेड़छाड़ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साइबरपीस फाउंडेशन और अन्य संस्थाएँ इस दिशा में कार्य कर रही हैं, लेकिन व्यक्तिगत सतर्कता सबसे बड़ी सुरक्षा है।

साथ ही, मानसिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है—ऑनलाइन हमले केवल तकनीकी नहीं होते, बल्कि भावनात्मक और मानसिक प्रभाव भी छोड़ते हैं।

आगे क्या करें

अपने डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले अपनी सोशल मीडिया और ऐप्स की गोपनीयता सेटिंग्स जांचें। पासवर्ड बदलें और 2FA चालू करें। यदि आपके पास बच्चे हैं, तो उनके लिए पैरेंटल कंट्रोल सेट करें।

किसी भी संदिग्ध घटना या उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें और वन स्टॉप सेंटर से सहायता लें।
और सबसे जरूरी अपने आसपास की महिलाओं को भी यह जानकारी साझा करें। डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि आत्म-सुरक्षा का एक रूप है।

इस प्रकार, थोड़ी‑सी सतर्कता और सही जानकारी से आप और आपके परिवार की डिजिटल दुनिया सुरक्षित रह सकती है।