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क्या आप 40+ हैं? सीखें डिजिटल स्किल्स, बढ़ेगी आत्मनिर्भरता और करियर के अवसर

क्या आप जानते हैं कि 40 साल से ऊपर के लोगों के लिए डिजिटल कौशल सीखना बहुत फायदेमंद हो सकता है। चलिए, जानते हैं कैसे यह नई सोच उन्हें आत्मनिर्भर बना सकती है। इस लेख में भारत में डिजिटल साक्षरता की स्थिति, प्रमुख चुनौतियां, नए कौशल सीखने के फायदे, करियर के अवसर और आसान तरीकों से डिजिटल दुनिया से जुड़ने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।
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Aug 04, 2026
Digital Skills for Seniors
डिजिटल स्कील्स सीखकर बनें आत्मनिर्मर। (फोटोः एआई)

जब दुनिया तेजी से डिजिटल होती जा रही है, तब 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए डिजिटल कौशल सीखना जरूरी हो गया है। भारत में बुजुर्गों की डिजिटल तैयारी अभी भी काफी कम है, लेकिन सही दृष्टिकोण और सपोर्ट से यह स्थिति बदली जा सकती है।

HelpAge India की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, केवल 41% बुजुर्गों के पास कोई डिजिटल डिवाइस है, जबकि 59% के पास कोई भी डिजिटल डिवाइस नहीं है। स्मार्टफोन का उपयोग करने वाले केवल 39% हैं, और 80 वर्ष से अधिक उम्र के केवल 26% के पास कोई डिजिटल डिवाइस है। केवल 20% बुजुर्ग डिजिटल डिवाइस का आराम से उपयोग कर पाते हैं, बाकी या तो बिल्कुल नहीं कर पाते या लगातार मदद की जरूरत होती है।

लिंग के आधार पर भी अंतर स्पष्ट है: पुरुषों में 48% के पास डिजिटल डिवाइस है, जबकि महिलाओं में यह संख्या केवल 33% है।

डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण बुजुर्ग कई सेवाओं से वंचित रह जाते हैं, जैसे इंटरनेट बैंकिंग, टेली-हेल्थ, और ऑनलाइन बिल भुगतान।

डिजिटल साक्षरताः आत्मनिर्भरता का रास्ता

OECD की 2025 की पॉलिसी ब्रीफ बताती है कि पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल बुजुर्गों के लिए अक्सर काम नहीं करते, क्योंकि वे धीमी सीखने की गति, तकनीकी अपरिचितता और उम्र संबंधी चुनौतियों को ध्यान में नहीं रखते। वहीं अगर प्रशिक्षण बुजुर्गों की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाए, जैसे सरल भाषा, चरणबद्ध निर्देश और सहायक माहौल, तो यह उन्हें आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ बना सकता है।

भारत में डिजिटल साक्षरता की चुनौतियां

शैक्षणिक जर्नल ‘Educational Gerontology’ में प्रकाशित 2024 की समीक्षा बताती है कि भारत में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों की ICT (सूचना और संचार तकनीक) अपनाने की दर कम है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। डिजिटल विभाजन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में साफ है।

एक और शोध (2026) बताता है कि सिर्फ कौशल देना पर्याप्त नहीं है। बुजुर्गों के डिजिटल उपयोग का निर्णय उनके "Perceived Ease of Use" (उपयोग में आसानी), "Perceived Usefulness" (उपयोगिता की धारणा) और उनके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। यानी, तकनीकी प्रशिक्षण के साथ यह भी जरूरी है कि वे तकनीक को उपयोगी और आसान समझें।

भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचे और डिजाइन की चुनौतियां

2026 में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे सरकारी डिजिटल सेवाएं) बुजुर्गों के लिए पूरी तरह समावेशी नहीं है। डिजाइन बाधाएं, क्षमता की कमी और डिजिटल आत्मविश्वास की कमी उन्हें पीछे छोड़ती है।

कैरियर और रोजगार के संदर्भ में डिजिटल कौशल की बढ़ती जरूरत

NIIT की 2026 की स्किल्स गैप रिपोर्ट बताती है कि डिजिटल, डेटा और साइबर सुरक्षा कौशल भारत में भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताएं बन रही हैं। मध्य-कैरियर वाले पेशेवरों में इन कौशलों की मांग अधिक है, लेकिन उपलब्धता कम है।

40+ उम्र के लोग अक्सर करियर में बदलाव या री-स्किलिंग की ओर बढ़ते हैं। डिजिटल कौशल उन्हें नई नौकरियों, फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन काम और बेहतर आत्मनिर्भरता की ओर ले जा सकते हैं।

डिजिटल साक्षरता से आत्मनिर्भरता तक

यह समझना जरूरी है कि डिजिटल साक्षरता आत्मनिर्भरता, सामाजिक जुड़ाव और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने का माध्यम है। OECD की रिपोर्ट में जापान के e‑Namokun प्रोग्राम का उदाहरण है, जो रिमोट तकनीकी सहायता (Visual Assistance) और वॉयस गाइडेंस के जरिए बुजुर्गों को तकनीकी समस्याओं से निपटने में मदद करता है।

भारत में भी इस तरह के मॉडल अपनाए जा सकते हैं, जैसे इंटरजेनरेशनल ट्रेनिंग (युवा और बुजुर्ग साथ सीखें), स्थानीय भाषा में सरल वीडियो, और परिवार या समुदाय आधारित समर्थन।

क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

एक प्रभावी डिजिटल साक्षरता योजना में शामिल हो सकते हैं:

  • बुजुर्गों के लिए आसान, चरणबद्ध प्रशिक्षण सामग्री
  • परिवार और समुदाय की भागीदारी, जैसे युवा सदस्य बुजुर्गों को सिखाएं
  • रिमोट सहायता तकनीक, जैसे जापान का मॉडल
  • डिजाइन में सुधार, बड़े फॉन्ट, सरल इंटरफेस, स्थानीय भाषा
  • उपयोगिता और आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान, सिर्फ कौशल नहीं, बल्कि उपयोग की समझ
Updated on:
04 Aug 2026 08:22 pm
Published on:
04 Aug 2026 08:22 pm