
सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)
छत्तीसगढ़ में एक छोटे से गांव ने जल संकट से जूझते हुए एक प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की है। ग्रामीणों की पहल ने अब पूरे क्षेत्र में उम्मीद की किरण जगाई है। यह कहानी बताती है कि जब पंचायत, प्रशासन और ग्रामीण मिलकर काम करते हैं तो पानी की कमी जैसी बड़ी समस्या भी हल हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में जल संकट से निपटने के लिए 'मोर गांव, मोर पानी 2.0' अभियान के तहत 551 ग्राम पंचायतों और 1,140 से अधिक गांवों में ग्रामीणों ने मिलकर 3.41 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं, जैसे- सोख गड्ढे, खंती, चेक डैम और तालाब बनाए हैं। गांव वालों की इस मेहनत का असर मानसून की पहली बारिश में दिखा है। ग्रामीणों की पहल से पहली बारिश में लगभग 31 करोड़ लीटर पानी जमा हुआ, जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ और पानी की उपलब्धता बढ़ी।
जल संकट से निपटने के लिए ग्रामीणों ने एक मिसाल पेश की है। यह कार्य केवल प्रशासन का नहीं था। ग्रामीणों ने श्रमदान किया, पंचायतों ने योजना बनाई और विभागों ने सहयोग दिया। महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लांगेह ने बताया कि कृषि, वन, जिला पंचायत और जनपद पंचायत जैसे विभागों ने मिलकर काम किया, जिससे यह अभियान सफल हुआ।
गांवो में पानी की कमी केवल पीने के पानी की समस्या नहीं है। खेतों की सिंचाई, पशुओं की देखभाल और रोजमर्रा की जरूरतें भी इससे जुड़ी होती हैं। जब बारिश का पानी जमीन में समा जाता है, तो भूजल स्तर बढ़ता है। भूजल में सुधार होने पर यह अगले सूखे के समय काम आता है। ग्राम पंचायतों में सोख गड्ढे, खंती, चेक डैम और तालाब लंबे समय तक पानी की उपलब्धता बनाए रखते हैं।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में 5% मॉडल ने भी ध्यान आकर्षित किया है। इसमें किसान अपनी खेती की जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा सोख गड्ढों के लिए छोड़ते हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे जमीन में समा सके। इस मॉडल की प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में भी सराहना की थी। गुजरात के दक्षिणी हिस्से में 'रिज-टू-वैली' मॉडल के तहत 170 चेक डैम और 215 वन तालाब बनाए गए। जिससे लगभग 580 करोड़ लीटर भूजल रिचार्ज हुआ। इससे खेती और ग्रामीण रोजगार दोनों को मदद मिली।
यह कहानी हमें बताती है कि जल संकट का समाधान केवल बड़े बांध या सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे, सामूहिक प्रयासों से भी संभव है। जब पंचायत, किसान, विभाग और जनता मिलकर काम करें, तो परिणाम टिकाऊ और प्रभावी होते हैं।
छत्तीसगढ़ के गांव के लोगों की पहल केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं है। यह एक संदेश है। जब गांव की जनता, पंचायत और प्रशासन मिलकर काम करें, तो जल संकट जैसी बड़ी समस्या भी हल हो सकती है। अगर आपके गांव में भी पानी की समस्या है तो मिलकर उसका समाधान निकाला जा सकता है।
Updated on:
04 Aug 2026 08:58 pm
Published on:
04 Aug 2026 08:58 pm
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