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देश का घरेलू एयर ट्रैफिक 1.4 फीसदी बढ़ा; 6 महीने में 8 करोड़ लोगों ने किया हवाई सफर, इंडिगो को हुआ बड़ा फायदा

Domestic Air Traffic Report: डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में जनवरी से जून में देश के घरेलू एयर ट्रैफिक में उछाल आया है। इस अवधि में इंडिगो एयरलाइन (Indigo Airline) का दबदबा कायम रहा।
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Jul 27, 2026
domestic air traffic increased
देश में घरेलू एयर ट्रैफिक 1.4% बढ़ा (इमेज सोर्स- AI)

Domestic Air Traffic Report : डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने देश में घरेलू एयर ट्रैफिक की जानकारी दी है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में जनवरी से जून में देश के घरेलू एयर ट्रैफिक में उछाल आया है। हालांकि, जून के महीने में मासिक आधार पर यात्रियों की संख्या में मामूली गिरावट देखी गई है। इस दौरान इंडिगो एयरलाइंस ने अपनी बढ़त और मजबूत करते हुए जून में रिकॉर्ड मार्केट शेयर हासिल किया, जबकि एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी घट गई।

जनवरी से जून में 8.64 करोड़ यात्रियों ने किया सफर

DGCA के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच घरेलू एयरलाइंस में कुल 8 करोड़ 64 लाख यात्रियों सफर किया। साल 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा 8 करोड़ 51 लाख था। इस तरह घरेलू उड़ानों में पहली छमाही में सालाना आधार पर करीब 1.44% की ग्रोथ दर्ज हुई। इस अवधि में इंडिगो ने उड़ान भरने में अपना दबदबा बनाए रखा। पहली छमाही में इंडिगो एयरलाइंस से 555.83 लाख यात्रियों ने सफर किया और उसकी बाजार हिस्सेदारी 64.3% रही।

दूसरे नंबर पर रहे एयर इंडिया ग्रुप (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) ने 221.67 लाख यात्रियों के साथ 25.7% हिस्सेदारी हासिल की। अकासा एयरलाइंस ने इस अवधि में 47.42 लाख यात्रियों को सफर कराया और उसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 5.5% रही। बाकी हिस्सेदारी स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91, अलायंस एयर और इंडिया वन एयर जैसी छोटी एयरलाइनों के बीच बंटी रही।

जून में यात्रियों की संख्या घटी

पहली छमाही की मजबूत ग्रोथ के उलट जून के मासिक आंकड़ों में हल्की गिरावट दर्ज हुई। DGCA के मुताबिक, मई 2026 में घरेलू एयरलाइनों ने कुल 136.04 लाख यात्रियों को सफर कराया, जो जून में घटकर 134.64 लाख रह गया। यानी मई की तुलना में जून में यात्रियों की संख्या में करीब 1.3% की मासिक गिरावट आई। DGCA ने इसे मौसमी रुझान और यात्रा के कमजोर सीजन से जोड़कर बताया है।

शेयर मार्केट में इंडिगो का दबदबा

जून के मासिक आंकड़ों के हिसाब से इंडिगो का घरेलू बाजार में दबदबा और मजबूत हुआ। मई में इंडिगो का मार्केट शेयर 64.9% था, जो जून में बढ़कर 66.3% पर पहुंच गया। यह आंकड़ा इंडिगो के लिए अब तक का सबसे ऊंचा मासिक शेयर है। यानी जून में हर 3 में से करीब 2 घरेलू यात्रियों ने इंडिगो से सफर किया। इसके उलट एयर इंडिया ग्रुप का शेयर मई के 25.6% से घटकर जून में 23.9% पर आ गया, जिसकी वजह बेड़े से जुड़ी दिक्कतों के चलते की गई क्षमता में कटौती बताई जा रही है। अकासा एयर को भी बढ़त मिली और उसका शेयर मई के 5.8% से बढ़कर जून में 6.4% हो गया। वहीं स्पाइसजेट का मार्केट शेयर मई के 2.5% से घटकर जून में 1.9% रह गया।

लोड फैक्टर में अकासा एयर सबसे आगे

सीटों की भरपाई यानी पैसेंजर लोड फैक्टर के मामले में जून में अकासा एयर 92.2% के साथ सबसे आगे रही। इसके बाद स्पाइसजेट (87.8%), एयर इंडिया ग्रुप (85.5%), इंडिगो (85.1%), स्टार एयर (75%), फ्लाई91 (73.2%) और अलायंस एयर (61.7%) का स्थान रहा।

टाइम टेबल में इंडिगो अव्वल

ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) के मामले में जून में इंडिगो 89.4% के साथ सबसे आगे रही। इसके बाद एयर इंडिया ग्रुप (85.9%), अकासा एयर (82.7%) और अलायंस एयर (74.7%) का नंबर रहा, जबकि स्पाइसजेट महज 33.5% OTP के साथ सबसे पीछे रही। वहीं, बड़े एयरपोर्ट में चेन्नई 95.2% समय-पालन के साथ पहले नंबर पर रहा। चेन्नई एयरपोर्ट के बाद हैदराबाद (90.3%), बेंगलुरु (89.6%) और कोलकाता (89.0%) का स्थान रहा, जबकि अहमदाबाद 76.7% के साथ सबसे पीछे रहा। DGCA के मुताबिक, जून में करीब 1.18% शेड्यूल्ड घरेलू उड़ानें दो घंटे से ज्यादा देरी से रवाना हुईं।

जून में रद्द हुईं अधिक फ्लाइट्स

जून में मई के मुकाबले ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक, जून में कुल कैंसलेशन रेट 0.63% रहा, जो मई में 0.55% था। इंडिया वन एयर की सबसे ज्यादा 16.43% उड़ानें रद्द रहीं, इसके बाद स्पाइसजेट (6.23%) और अलायंस एयर (6%) का नंबर रहा। इंडिगो और अकासा एयर की सबसे कम, महज 0.20% उड़ानें रद्द हुईं।

कैंसिलेशन की सबसे बड़ी वजह तकनीकी खराबी रही, जिसके चलते करीब 39.6% उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इसके बाद 36.3% उड़ानें स्टाफ की कमी और आंतरिक प्रबंधन जैसी ऑपरेशनल वजहों से, 20.3% मौसम की वजह से और बाकी करीब 3.9% अन्य कारणों से रद्द हुईं। इसके अलावा उड़ानों में देरी की सबसे बड़ी वजह रिएक्शनरी फैक्टर्स यानी एक विमान की देरी का असर दूसरी उड़ान पर पड़ना रही, जिसका हिस्सा करीब 69% रहा।

यात्रियों की शिकायतें और एयरलाइनों का मुआवजा

जून में एयरलाइनों को कुल 2,568 यात्री शिकायतें मिलीं, यानी हर 10 हजार यात्रियों पर करीब 1.91 शिकायतें। इनमें सबसे ज्यादा 68.6 शिकायतें प्रति 10 हजार यात्री अलायंस एयर को लेकर आईं, इसके बाद स्पाइसजेट (3.4), एयर इंडिया ग्रुप व फ्लाई91 (दोनों 3.2), अकासा एयर (2.0), स्टार एयर (1.1) और इंडिगो (1.0) का नंबर रहा।

सामान से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा (27.8%) रहीं, इसके बाद उड़ान में देरी या खराबी (24.3%), रिफंड (19.7%) और कस्टमर सर्विस (5.4%) से जुड़ी शिकायतें आईं। DGCA के मुताबिक जून में मिलीं सभी शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है। DGCA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जून में फ्लाइट रद्द होने से प्रभावित 43,968 यात्रियों को एयरलाइनों ने करीब 61.98 लाख रुपए मुआवजे और सुविधाओं पर खर्च किए। उड़ानों में देरी से प्रभावित 1,10,273 यात्रियों की सुविधाओं पर करीब 2.85 करोड़ रुपए खर्च हुए, जबकि बोर्डिंग से इनकार किए गए 1,847 यात्रियों को करीब 64.84 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया।

DGCA की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत का घरेलू विमानन बाजार सालाना आधार पर बढ़त बनाए हुए है, लेकिन जून के कमजोर सीजन में यात्रियों की संख्या में हल्की गिरावट और एयरलाइनों के बीच बाजार हिस्सेदारी में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जिसमें इंडिगो की बढ़त और मजबूत हुई जबकि एयर इंडिया ग्रुप व स्पाइसजेट को नुकसान उठाना पड़ा।

Updated on:
27 Jul 2026 10:09 pm
Published on:
27 Jul 2026 10:06 pm