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लिफ्ट में फंस जाएं तो क्या करें? जानें बचाव के तरीके और सुरक्षा से जुड़े कानून

अचानक लिफ्ट बंद हो जाए तो घबराएं नहीं, बल्कि धैर्य से काम लें। ऐसी स्थिति में कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें, जिससे बाहर निकलने में मदद मिलेगी और आपकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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Aug 04, 2026
elevator safety
सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)

अगर आप लिफ्ट में फंस जाएं तो धैर्य से काम लें। यह आम स्थिति है, लेकिन आप शांत रहकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। जब लिफ्ट बीच में रुक जाती है तो अक्सर लोग घबरा जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लिफ्ट पूरी तरह एयरटाइट नहीं होती, उसमें पर्याप्त वेंटिलेशन होता है। इसलिए गहरी सांस लें और शांत रहें। घबराहट से स्थिति और बिगड़ सकती है। लिफ्ट में फंसने पर क्या करें और क्या न करें? आइए इस खबर में जानते हैं कि लिफ्ट संचालन के लिए क्या नियम कानून हैं?

इमरजेंसी अलार्म और इंटरकॉम का उपयोग करें

अधिकांश आधुनिक लिफ्टों में इमरजेंसी अलार्म और इंटरकॉम बटन होते हैं। लिफ्ट रुकते ही अलार्म दबाएं और इंटरकॉम से सीधे ऑपरेटर या सुरक्षा कर्मी से संपर्क करें। अपनी स्थिति (जैसे- फ्लोर नंबर या लिफ्ट नंबर) स्पष्ट रूप से बताएं।

कॉल बटन दबाएं और मोबाइल का उपयोग करें

यदि कॉल बटन या इंटरकॉम काम न करे तो हल्के से दरवाजे या दीवार पर थपथपाएं, ताकि बाहर मौजूद लोग आपकी स्थिति समझ सकें। यदि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध हो तो एसओएस कॉल करें या किसी परिचित को सूचना दें।

जबरदस्ती दरवाजा न खोलें

लिफ्ट में फंसने पर दरवाजा जबरदस्ती खोलने की कोशिश खतरनाक हो सकती है। ऐसा करने से लिफ्ट का संतुलन बिगड़ सकता है और गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

सांस लेने में दिक्कत हो, तो नीचे बैठ जाएं

यदि बंद लिफ्ट में सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएं और शांत रहें। घबराहट से आपकी हालत और बिगड़ सकती है।

ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस (ARD) पर भरोसा रखें

कई लिफ्टों में ARD यानी ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस होता है। बिजली जाने पर यह सिस्टम स्वयं सक्रिय हो जाता है और लिफ्ट के अंदर रोशनी व हवा बनी रहती है। लिफ्ट में लगा ARD सिस्टम की घंटों तक काम करता है।

लिफ्ट कितनी सुरक्षित है?

लिफ्ट में कई सुरक्षा तंत्र होते हैं, जैसे- गवर्नर, सेफ्टी गियर, शॉक एब्जॉर्बर, इंटरलॉक, ब्रेकिंग सिस्टम आदि। ये सभी मिलकर लिफ्ट को अचानक गिरने, फंसने या ओवरस्पीड जैसी स्थितियों से बचाते हैं। हालांकि,स समय-समय पर किसी सक्षम व्यक्ति द्वारा संपूर्ण जांच कराना आवश्यक है।

भारत में लिफ्ट संचालन के नियम और कानून

  • फैक्ट्री अधिनियम, 1948 के तहत : हर लिफ्ट की 6 महीने में एक बार सक्षम व्यक्ति द्वारा जांच कराना अनिवार्य है।
  • लिफ्ट की संरचना मजबूत होनी चाहिए। गेट इंटरलॉक हो और अधिकतम भार स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।

राज्य स्तर पर कानून

  • उत्तर प्रदेश में लिफ्ट और एस्केलेटर अधिनियम 2024 लागू है, जिसमें पंजीकरण, रखरखाव, सुरक्षा, बीमा और दुर्घटना रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
  • कर्नाटक में लिफ्ट, एस्केलेटर और पैसेंजर कन्वेयर अधिनियम 2012 लागू है, जिसमें निर्माण, रखरखाव और सुरक्षित संचालन के नियम हैं।

लिफ्ट संचालन के राष्ट्रीय मानक

नया मानक IS 17900 दिसंबर 2025 से सभी नए लिफ्ट इंस्टॉलेशन के लिए अनिवार्य हो गया है। यह यूरोपीय मानकों EN 81-20/50 पर आधारित है। इसके अलावा IS 17515 (ऊर्जा प्रदर्शन), NBC 2016 भाग 8 सेक्शन 5 (भवन कोड), RPwD एक्ट 2016 (पहुंच योग्यता) और राज्य स्तर के नियम सभी मिलकर लिफ्ट के डिजाइन, सुरक्षा, ऊर्जा, पहुंच और लाइसेंसिंग को नियंत्रित करते हैं।

लिफ्ट में फंसना डरावना हो सकता है, लेकिन घबराहट से बचकर, इमरजेंसी सिस्टम का सही उपयोग करके और सुरक्षा नियमों का पालन करके आप अपनी जान बचा सकते हैं। भारत में फैक्ट्री अधिनियम, राज्य कानून और नया IS 17900 मानक मिलकर लिफ्ट सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं। अगली बार जब आप लिफ्ट में जाएं, तो इन सावधानियों को याद रखें और सुरक्षित रहें।

Updated on:
04 Aug 2026 06:00 pm
Published on:
04 Aug 2026 06:00 pm