Patrika+

कृषि क्षेत्र में नई क्रांति: ड्रोन तकनीक से संवरती खेती, किसानों की घटी लागत और बढ़ी आय

8 मिनट में 1 एकड़ खेत पर छिड़काव! जानें कैसे ड्रोन तकनीक किसानों की आय बढ़ा रही है और आप इस योजना का लाभ कैसे उठा सकते हैं।
4 min read
Aug 07, 2026
Farmer
खेती की नई क्रांति (AI)

भारतीय कृषि प्रणाली पारंपरिक तरीकों से निकलकर आधुनिक तकनीक की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा रही है। सदियों से खेत की जुताई, बुआई, सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव हाथ से या पारंपरिक संसाधनों से होता आया है, जिसमें भारी श्रम, समय और लागत लगती थी। लेकिन आज ड्रोन तकनीक केवल रक्षा या मनोरंजन तक सीमित न रहकर भारत के खेतों में एक नई कृषि क्रांति की नींव रख चुकी है।ड्रोन तकनीक ने खेती-बाड़ी को अधिक सटीक, त्वरित और किफायती बना दिया है। यह न केवल समय और पैसे की बचत कर रही है, बल्कि फसलों की सेहत सुधारने और किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने में चमत्कारिक परिणाम दे रही है।

सरकार की दूरदर्शी पहल और योजनाएं


केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने कृषि में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है:

  • SMAM योजना (Sub-Mission on Agricultural Mechanization): इसके तहत कृषि संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को ड्रोन की खरीद पर 75% से 100% तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी दी जा रही है। व्यक्तिगत किसानों को भी 40% से 50% तक का अनुदान दिया जा रहा है।
  • नमो ड्रोन दीदी (Namo Drone Didi) योजना: ग्रामीण महिलाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सशक्त बनाने के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित हो रही है। इसके तहत महिलाओं को 15 दिनों का विशेष ड्रोन पायलट प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
  • संस्थागत प्रदर्शन और प्रशिक्षण: ICAR, कृषि विश्वविद्यालयों और 21 प्रमुख केंद्रों द्वारा हजारों हेक्टेयर में ड्रोन प्रदर्शन किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 'PMKVY 4.0' और 'SwaYaan' जैसे कार्यक्रमों के तहत ‘Drone Pilot (Junior)’ ट्रेड में युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ

  • समय की भारी बचत: जहां एक एकड़ खेत में मजदूरों द्वारा कीटनाशक का छिड़काव करने में 7 से 8 घंटे का समय लगता था, वहीं ड्रोन यह कार्य मात्र 8 से 9 मिनट में पूरा कर देता है।
  • संसाधनों की बचत: ड्रोन की सटीक तकनीक से पानी और रसायनों की खपत में 60% से 80% तक की कमी आती है, जिससे पर्यावरण और मिट्टी दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है।
  • लागत में कमी और आय में वृद्धि: रसायनों की कम खपत और मजदूरों के समय की बचत से किसानों को प्रति एकड़ औसतन ₹3,600 तक की बचत हो रही है। साथ ही समय पर रोग पहचान से पैदावार में 30% से 40% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
  • स्वास्थ्य सुरक्षा: हाथ से छिड़काव करते समय जहरीले रसायनों के संपर्क में आने से किसानों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिम होता है। ड्रोन से छिड़काव सुरक्षित और दूरी बनाए रखकर किया जाता है।

स्टार्टअप्स और एग्री-टेक कंपनियों का योगदान

BharatRohan, TRITHI Robotics, Agrotech Risk और AGRIDRONE जैसे भारतीय एग्री-टेक स्टार्टअप्स खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन डेटा का संयोजन कर रहे हैं।

  • कस्टम हायरिंग मॉडल: छोटे और सीमांत किसान जो स्वयं ड्रोन नहीं खरीद सकते, वे AGRIDRONE जैसी सेवाओं के माध्यम से मात्र ₹400 प्रति एकड़ की दर से ड्रोन किराए पर ले रहे हैं।
  • स्मार्ट डेटा और बीमा: ड्रोन द्वारा ली गई हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें फसल के नुकसान का सटीक आकलन करती हैं, जिससे फसल बीमा दावों का निपटारा तेजी से होता है।

प्रमुख चुनौतियां और समाधान

तकनीक के विस्तार के साथ-साथ कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं:

  • प्रारंभिक उच्च लागत: एक अच्छा कृषि ड्रोन महंगा होता है।

समाधान: सरकार द्वारा दी जा रही 50% से 100% सब्सिडी और FPO/SHG आधारित 'कस्टम हायरिंग सेंटर' (Custom Hiring Centres) मॉडल इसे हर किसान के लिए सुलभ बना रहे हैं।

  • तकनीकी ज्ञान का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन संचालन और डेटा पढ़ने का प्रशिक्षण अभी सीमित है।

समाधान: KVK और आईटीआई (ITI) स्तर पर ड्रोन पायलट कोर्स का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

  • नियामक नियम (DGCA Norms): ड्रोन उड़ाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के नियम, SOP और रिमोट पायलट लाइसेंस अनिवार्य हैं।

समाधान: नियमों को सरल बनाया जा रहा है और अधिकृत प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

किसान और ग्रामीण समुदाय क्या करें?

यदि आप इस तकनीक का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:

  • महिला स्वयं सहायता समूह (SHG): 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत आवेदन कर निःशुल्क पायलट प्रशिक्षण और ड्रोन प्राप्त करें।
  • FPO और किसान समूह: SMAM योजना का लाभ उठाकर रियायती दर पर ड्रोन खरीदें और गांव में 'ड्रोन सर्विस सेंटर' शुरू करें।
  • छोटे व सीमांत किसान: नजदीकी KVK या कस्टम हायरिंग सेंटर से संपर्क कर किफायती दरों पर अपने खेत के लिए ड्रोन किराए पर लें।
  • कानूनी जानकारी: व्यावसायिक रूप से ड्रोन उड़ाने से पहले DGCA के नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का ध्यान रखें।

एक उज्ज्वल और स्मार्ट कृषि भविष्य

ड्रोन खेती अब कोई दूर का सपना या केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं है, यह भारतीय किसानों की वास्तविक समस्याओं का व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधान बन चुकी है। यह तकनीक समय और पैसा बचाने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को नए रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। जैसे-जैसे प्रशिक्षण और सरकारी प्रोत्साहन का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे यह तकनीक भारत के हर खेत तक पहुंचेगी। यदि किसान और ग्रामीण उद्यमी सही समय पर इस बदलाव को अपनाते हैं, तो भारतीय कृषि न केवल आत्मनिर्भर बनेगी बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई मिसाल कायम करेगी।

Updated on:
07 Aug 2026 01:09 pm
Published on:
07 Aug 2026 01:09 pm