
पर्यावरण संकट की एक आम, लेकिन अनदेखी समस्या है। हमारे शहरों में रोजाना कितना कचरा पैदा होता है और उसका क्या होता है? यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन, सफाई व्यवस्था और शहर की सेहत से जुड़ा सवाल है। आइए समझते हैं कि आपके शहर में हर दिन होने वाले कचरे की क्या स्थिति है और इसका स्वास्थ्य पर क्या असर हो रहा है?
देशभर के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन लगभग 1,70,000 टन ठोस कचरा (Municipal Solid Waste) होता है। इस कचरे में से करीब 90,000 टन ही उपचारित या प्रबंधित होता है। यानी लगभग 80,000 टन कचरा रोजाना बिना उचित प्रबंधन के रह जाता है। राजधानी दिल्ली की बात करें, तो दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार शहर में प्रतिदिन लगभग 11,862 टन कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन केवल 7,641 टन ही संसाधित होता है। लगभग 64% कचरा ही प्रबंधित होता है, बाकी लगभग 4,221 टन कचरा रह जाता है।
दिल्ली नगर निगम (MCD) की रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2026 तक दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 12,847 टन कचरा पैदा हो रहा है, जो 2025 के लगभग 11,300 टन से बढ़ा है। हालिया CAG रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के शहरी क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 9,800 टन कचरा उत्पन्न होता है। हालांकि, BMC मात्र 6,500 टन कचरा होने का दावा करता है। यानी आंकड़ों में 40% से अधिक का अंतर है। केवल 6,200 टन कचरा ही कलेक्ट किया जाता है।
CPCB-NEERI की एक अध्ययन रिपोर्ट बताती है कि 59 शहरों में प्रति व्यक्ति कचरा उत्पन्न होने की दर 0.12 से 0.60 किलो प्रति दिन के बीच है। वहीं, NITI आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 28 शहरों में यह औसत 0.39 किलो प्रति व्यक्ति प्रति दिन है और कुछ शहरों में यह 0.99 किलो तक जाता है। विशेष रूप से दिल्ली में प्रति व्यक्ति कचरा उत्पन्न होने की दर लगभग 0.60 किलो प्रति दिन है, जबकि मुंबई में यह लगभग 0.52 किलो और चेन्नई में 0.45 किलो है।
स्वच्छ भारत मिशन (Urban 2.0) के डैशबोर्ड के अनुसार, भारत में कुल 1,61,000 टन कचरा प्रतिदिन उत्पन्न होता है, जिसमें से 1,32,000 टन यानी लगभग 82% कचरा संसाधित होता है। लेकिन राज्यों में अंतर बहुत बड़ा है। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में केवल 10% कचरा संसाधित होता है, जबकि दिल्ली में यह दर 79% है।
प्लास्टिक कचरे की बात करें तो दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1,150 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन केवल 81% ही संसाधित होता है, यानी लगभग 220 टन प्लास्टिक कचरा रोजाना अनसुलझा रह जाता है।
आपका शहर प्रतिदिन हजारों टन कचरा उत्पन्न करता है, लेकिन उसका एक बड़ा हिस्सा संसाधित नहीं होता है। इसका असर आपके आसपास की सफाई, गंदगी, बदबू, जल और हवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। अनसुलझा कचरा खुले में जमा होने से मच्छर, कीड़े, बीमारी फैलने का खतरा बढ़ता है। प्लास्टिक कचरा जल स्रोतों में पहुंचकर पानी को दूषित करता है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है और बीमारियां फैलने की संभावना बनी रहती है। इसलिए अपने शहर में कचरा प्रबंधन की स्थिति जानने के लिए नगर निगम या स्थानीय स्वच्छता विभाग की वेबसाइट देखें। शिकायत नंबर या मोबाइल ऐप से कचरा न उठने, खुले डंपिंग या गंदगी की समस्या की सूचना दें।