5 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जीवनशैली को प्रभावित कर रहा मोटापा और डायबिटीज? आसान उपाय से करें बचाव

क्या आप जानते हैं कि आपका वजन सिर्फ आपकी सेहत को ही नहीं, बल्कि आपके भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है? मोटापे और डायबिटीज के बीच गहरा संबंध है, जो आपकी जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Vinay Shakya

Aug 05, 2026

Obesity and Diabetes

सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)

मधुमेह (डायबिटीज) और मोटापा एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। इनके बचाव का सही तरीका समझना आज हर उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है। संतुलित जीवनशैली, समय पर पहचान और वैज्ञानिक मार्गदर्शन ही इस जटिल समस्या का प्रभावी समाधान हो सकते हैं।

प्राथमिक बचाव: मोटापा रोकना ही पहला कदम

भारतीय काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की गाइडलाइंस के अनुसार, मधुमेह से बचाव का सबसे पहला कदम मोटापे को रोकना है। इसे ‘प्राइमोर्डियल प्रिवेंशन’ कहा जाता है। इसका अर्थ है कि पहले से ही जोखिम कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, जैसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण।

प्रिडायबिटीज में हस्तक्षेप: जीवनशैली और दवा दोनों

ICMR के अनुसार, प्रिडायबिटीज (वे लोग जो मधुमेह की ओर बढ़ रहे हैं) में जीवनशैली सुधार से लगभग एक-तिहाई लोगों में मधुमेह होने की संभावना रोकी जा सकती है। यदि जोखिम अधिक हो, जैसे इंसुलिन प्रतिरोध या ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ रहा हो तो जीवनशैली सुधार के साथ मेटफॉर्मिन दवा का उपयोग भी जरूरी होता है।

डायबिटीज में जीवनशैली का महत्व

.एक बार मधुमेह हो जाने पर भी, ICMR के अनुसार, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, जीवनशैली में बदलाव और आवश्यक दवाओं के साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और लिपिड्स (खून में वसा) का नियंत्रण संभव है। इसे ‘सेकेंडरी प्रिवेंशन’ कहा जाता है।

वैश्विक शोध: जीवनशैली से बचाव संभव

फिनलैंड के डायबिटीज प्रिवेंशन स्टडी ने दिखाया कि यदि प्रिडायबिटीज वाले लोग पांच साधारण जीवनशैली लक्ष्यों को पूरा करते हैं, तो उनमें मधुमेह विकसित नहीं हुआ। चीन के डा किंग अध्ययन में भी जीवनशैली सुधार का असर 20 वर्षों तक बना रहा।

अमेरिकी डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) की 2026 की गाइडलाइंस बताती हैं कि मधुमेह और मोटापे वाले लोगों में 5–7% वजन घटाने से ब्लड शुगर और अन्य जोखिम घटक बेहतर होते हैं। 10% से अधिक वजन घटाने से मधुमेह में सुधार और संभवतः रिमिशन (लक्षणों का गायब होना) भी हो सकता है।

भारत में डायबिटीज की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में लगभग 77 मिलियन वयस्क टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्त हैं और लगभग 25 मिलियन लोग प्रिडायबिटीज की स्थिति में हैं। आधे से अधिक लोग अपनी स्थिति से अनजान हैं, जिससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

मोटापा और मधुमेह का संबंध

WHO के अनुसार मोटापा, विशेषकर पेट के आसपास जमा चर्बी, इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाता है और मधुमेह का जोखिम बढ़ाता है। मोटापा रोकने और नियंत्रित करने से मधुमेह का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्कूलों में बचाव: बच्चों में शुरुआती हस्तक्षेप

WHO फाउंडेशन और नोवो नॉर्डिस्क ने मार्च 2026 में भारत में स्कूल-आधारित कार्यक्रम शुरू किया है, जो बच्चों में मोटापे और मधुमेह के जोखिम को कम करने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा, स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रदान करता है।

बचाव के मुख्य उपाय

  • मोटापा रोकना (प्राइमोर्डियल)
  • संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण
  • प्रिडायबिटीज में हस्तक्षेप, जीवनशैली सुधार, आवश्यकता पर मेटफॉर्मिन
  • मधुमेह में नियंत्रण (सेकेंडरी), आहार, व्यायाम, दवाएं, ब्लड प्रेशर और लिपिड नियंत्रण
  • बच्चों में शुरुआती रोकथाम, स्कूल-आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रम

बीमारी से बचने के व्यावहारिक सुझाव

  • प्रतिदिन कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर का व्यायाम करें, जैसे- तेज चलना, साइकिल चलाना या योग करना।
  • आहार में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल करें। तली-भुनी, मीठी और वसायुक्त चीजें खाने से बचें।
  • वजन पर ध्यान रखें, 5 से 7% वजन घटाना भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
  • यदि ब्लड शुगर या HbA1c बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जीवनशैली में सुधार और आवश्यकता होने पर दवा शुरू करें।
  • बच्चों में मोटापा और मधुमेह का खतरा कम करने के लिए स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा और गतिविधियां बढ़ाएं।

कब डॉक्टर से मिलें?

यदि आपका वजन बढ़ रहा है, ब्लड शुगर या HbA1c सामान्य से अधिक है, या परिवार में मधुमेह का इतिहास है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। समय पर पहचान और हस्तक्षेप से बचाव संभव है। मधुमेह और मोटापा दोनों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण मधुमेह से बचने के प्रमुख उपाय हैं। प्रिडायबिटीज में समय पर हस्तक्षेप और मधुमेह में नियंत्रण से स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है। बच्चों में शुरुआती रोकथाम भी भविष्य की पीढ़ियों को स्वस्थ रख सकती है।