
कपड़ों से होने वाला प्रदूषण हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। समझिए कपड़ा प्रदूषण क्या है, यह कैसे फैलता है, और हम रोकने के लिए क्या कर सकते हैं।
सिंथेटिक कपड़ों से निकलने वाले सूक्ष्म प्लास्टिक कण माइक्रोफाइबर्स - हर बार धोने या पहनने पर पानी और हवा में मिल जाते हैं। ये समुद्रों में पहुंचने वाले प्राइमरी माइक्रोप्लास्टिक का 16 से 35 प्रतिशत तक हिस्सा होते हैं। एक ही वॉश में 7 लाख से 1.2 करोड़ तक माइक्रोफाइबर्स निकल सकते हैं। ये कण पानी, मछलियों और अंततः हमारे भोजन व शरीर में पहुंच सकते हैं।
फास्ट फैशन और सिंथेटिक फाइबर जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन, एक्रिलिक, फ्लीस आदि का व्यापक उपयोग इस समस्या को बढ़ाता है। कपड़ा निर्माण की प्रक्रिया जैसे डाइंग, फिनिशिंग, वेट प्रोसेसिंग भी भारी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक छोड़ती है। भारत में औसतन एक व्यक्ति साल में लगभग 5 वस्त्र खरीदता है, जबकि अमेरिका में यह संख्या 53 है - यह दर्शाता है कि खपत का स्तर भी मायने रखता है।
नीचे दिए गए उपायों से हम व्यक्तिगत और औद्योगिक स्तर पर कपड़ा प्रदूषण को कम कर सकते हैं:
कपास, लिनन, हेम्प जैसे प्राकृतिक फाइबर सिंथेटिक की तुलना में कम माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं। हालांकि, प्राकृतिक कपड़ों पर रासायनिक फिनिशिंग भी पर्यावरणीय प्रभाव बढ़ा सकती है, इसलिए बिना भारी रासायनिक उपचार वाले विकल्प चुनना बेहतर है।
भारत सरकार की PM MITRA (Mega Integrated Textile Region and Apparel) योजना को अक्सर "सर्कुलर फैशन पहल" के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन असल में इसका मुख्य उद्देश्य अलग है। यह योजना 2021-22 के बजट में घोषित की गई थी और इसके तहत देश के सात राज्यों में बड़े इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क बनाए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य है निवेश आकर्षित करना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना, रोजगार बढ़ाना, और भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना (यानी "Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign" का 5F विज़न)। हर पार्क में सामान्य एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम जैसी टिकाऊ सुविधाएं ज़रूर शामिल हैं, लेकिन यह मूलतः औद्योगिक अवसंरचना और निवेश योजना है, न कि सीधे तौर पर रीसाइक्लिंग या सर्कुलर इकॉनमी को केंद्र में रखने वाली योजना। सही मायनों में सर्कुलर टेक्सटाइल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में योगदान ऊपर बताई गई "Mapping of Textile Waste Value Chain" रिपोर्ट और इससे जुड़ी नीतिगत सिफारिशों से अधिक जुड़ा है।
घरेलू स्तर पर अपनाए जाने वाले उपायों को आजमाएं :
| उपाय | लाभ |
|---|---|
| ठंडे पानी में धोना और कोमल चक्र | कपड़ों पर तनाव कम, माइक्रोफाइबर रिलीज घटता है |
| कम धोना और तरल डिटर्जेंट | कपड़ों की उम्र बढ़ती है, पर्यावरण पर असर कम होता है |
| Guppy बैग या फिल्टर | माइक्रोफाइबर पानी में नहीं जाते |
| प्राकृतिक कपड़े चुनना | सिंथेटिक की तुलना में कम प्रदूषण |
| टिकाऊ कपड़े और रीसाइक्लिंग | वेस्ट कम होता है, सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है |
कपड़ा प्रदूषण विशेषकर माइक्रोप्लास्टिक हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा है। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सही कपड़े चुनना, धोने की आदतें बदलना, और सामूहिक स्तर पर सर्कुलर फैशन व नीति सुधारों को अपनाना इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। अब समय है कि हम सब मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं - अपने घर से शुरुआत करें और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए आगे बढ़ें।