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फंक्शनल फूड क्या है और यह आपकी सेहत को कैसे पहुंचाता है फायदा? जानिए सबकुछ

आपका खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता है। यह आपकी सेहत को भी बेहतर बनाने में अहम योगदान देता है। फंक्शनल फूड्स के जरिए आप अपने हर एक निवाले में सेहत का जादू पा सकते हैं, आइए जानते हैं कैसे।
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Aug 08, 2026
Functional Foods Benefits
फंक्शनल फूड के फायदे। (फोटोः एआई)

स्मार्ट फूड ट्रेंड की दुनिया में ‘फंक्शनल फूड’ एक ऐसा नाम है जो स्वाद के साथ सेहत का भी वादा करता है। यह वह खाना है जो पेट भरने तक सीमित नहीं रहता और आपके शरीर को पोषण से आगे कुछ खास लाभ भी देता है। आइए, इस लेख में समझते हैं, क्या है फंक्शनल फूड और यह आपके शरीर के लिए कैसे काम करता है।

क्या है फंक्शनल फूड?

फंक्शनल फूड वह भोजन है जो ऊर्जा या पोषण देने के साथ शरीर में कुछ खाश फायदे भी भी पहुंचाता है, जैसे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना या दिल की सेहत सुधारना। जापान में 1980 के दशक में इस विचार की शुरुआत हुई, जब सरकार ने ऐसे खाद्य पदार्थों को मंजूरी देनी शुरू की, जो सामान्य पोषण से आगे जाकर स्वास्थ्य में सुधार करते थे। यूरोपीय आयोग ने इसे परिभाषित करते हुए कहा कि यह रोजमर्रा का भोजन होता है, लेकिन उसमें कुछ ऐसे घटक होते हैं जो सामान्य पोषण से आगे जाकर स्वास्थ्य लाभ देते हैं।

भारत में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने भी फंक्शनल फूड को परिभाषित किया है। FSSAI के अनुसार, फंक्शनल फूड ऐसे उत्पाद हैं जो पारंपरिक खाद्य पदार्थों की तरह दिखते हैं, लेकिन उनमें खास स्वास्थ्य लाभ होते हैं। यह लाभ पोषण तक सीमित नहीं होते हैं, यह कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद कर सकते हैं।

कैसे काम करते हैं फंक्शनल फूड?

फंक्शनल फूड दो तरह के होते हैं, प्राकृतिक और संशोधित। प्राकृतिक फूड्स जैसे ओट्स में β‑ग्लूकन नामक फाइबर होता है, जो सूजन कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और दिल की सेहत सुधारने में मदद करता है। वहीं संशोधित फूड्स में कुछ घटक जैसे विटामिन, मिनरल, प्रोबायोटिक्स आदि जोड़े जाते हैं, जैसे कैल्शियम युक्त संतरे का रस।

यह लाभ तब तक मिलता है जब आप इन्हें नियमित रूप से और पर्याप्त मात्रा में खाते हैं। Health Canada के अनुसार, फंक्शनल फूड में जैव सक्रिय घटक शामिल होते हैं, जो रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल हो सकते हैं और रोग का जोखिम कम कर सकते हैं।

भारत में FSSAI की नियमावली में फंक्शनल फूड को आठ श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे हेल्थ सप्लीमेंट्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, स्पेशल डायटरी फूड, प्रोबायोटिक/प्रिबायोटिक युक्त फूड, और नोवेल फूड्स। यानी, भारत में यह कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त श्रेणी है।

क्या ध्यान रखें?

जब आप फंक्शनल फूड चुनते हैं, तो आपको यह देखना चाहिए कि वह सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा तो नहीं। FSSAI के नियमों के अनुसार, ऐसे उत्पादों में दावा करने से पहले वैज्ञानिक आधार होना चाहिए। इसलिए लेबल पर लिखे स्वास्थ्य लाभ को ध्यान से पढ़ें और सोचें कि क्या यह सिर्फ सामान्य पोषण का दावा है या कोई विशेष लाभ?

उदाहरण के तौर पर, ओट्स में β‑ग्लूकन होता है, जो दिल की सेहत में मदद कर सकता है। यह एक प्रमाणित लाभ है। इसी तरह, प्रोबायोटिक युक्त दही पाचन को बेहतर कर सकता है, लेकिन यह तभी सच होगा जब उसमें पर्याप्त मात्रा में जीवित बैक्टीरिया हों और वैज्ञानिक आधार हो।

(Image: AI)

क्या सावधानियां हैं?

सबसे पहले, फंक्शनल फूड को इलाज की तरह न समझें। Health Canada की परिभाषा साफ करती है कि यह बीमारी का इलाज नहीं करता, केवल जोखिम कम करने में मदद करता है। दूसरे, मार्केटिंग वाले दावे हमेशा सच नहीं होते। अमरीका जैसे देशों में “structure-function” क्लेम होते हैं, जो कम नियंत्रित होते हैं। भारत में FSSAI ने ऐसे दावों पर नियम बनाए हैं, लेकिन फिर भी सावधानी जरूरी है।

कैसे करें इस्तेमाल?

आप अपनी रोजमर्रा की थाली में कुछ सरल बदलाव कर सकते हैं:

  • ओट्स, दाल, हरी सब्जियां, फल, अखरोट, बीज, ये सभी प्राकृतिक फंक्शनल फूड्स हैं।
  • अगर आप fortified उत्पाद लेते हैं, जैसे कैल्शियम युक्त जूस या विटामिन युक्त अनाज, तो लेबल पर देखें कि उसमें कितना पोषक तत्व है और क्या यह आपके दैनिक जरूरत के हिसाब से पर्याप्त है।
  • प्रोबायोटिक दही या किमची जैसे fermented फूड्स को शामिल कर सकते हैं।

यह बदलाव धीरे-धीरे करें, ताकि स्वाद भी बना रहे और सेहत भी सुधरे।

Updated on:
08 Aug 2026 09:57 pm
Published on:
08 Aug 2026 09:57 pm