
सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)
भारत सरकार ने जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, ओला-उबर, जैसी कंपनियों के साथ काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए नियम-कानून तय किए हैं। केंद्र सरकार ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित करके नए सुधार पूरी तरह से लागू कर दिए हैं। इन कानूनों में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, उबर-ओला जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स को औपचारिक पहचान देने का प्रावधान किया गया है।
गिग वर्कर्स, वे लोग हैं जो किसी एक कंपनी के स्थायी कर्मचारी न होकर, ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए अस्थायी या प्रोजेक्ट-आधारित काम करते हैं। इनमें फूड डिलीवरी एजेंट, कैब ड्राइवर, ऑनलाइन ट्यूटर, ग्राफिक डिजाइनर और अन्य फ्रीलांस पेशेवर शामिल हैं। ये लोग आमतौर पर किसी एक नियोक्ता के साथ दीर्घकालिक अनुबंध में नहीं होते। एक अनुमान के मुताबिक, साल 2030 तक करीब 4.1% लोग गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के रूप में काम करेंगे। भारत में जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, ओला और उबर जैसी कंपनियां इसी मॉडल पर लाखों लोगों को काम देती हैं।
केंद्र सरकार ने राजपत्र अधिसूचनाओं के जरिए 4 श्रम संहिताओं- पारिश्रमिक संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता 2020 के तहत नियमों को अधिसूचित किया है। इसके तहत 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित करने वाला सुधार पूरी तरह लागू हो गया है। नए कानून में स्विगी, जोमैटो, उबर और ओला जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स को औपचारिक पहचान देने का प्रावधान किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के जरिए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पहली बार श्रम कानून के दायरे में औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त कर सके हैं।
कानून के तहत प्रत्येक वर्कर को e-Shram पोर्टल के माध्यम से आधार-लिंक्ड यूनिक ID दी जाएगी, ताकि लाभ अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी पोर्टेबल बने रहें। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सभी डिजिटल एग्री गेटर कंपनियों को अपने वर्कर्स का पंजीकरण e-Shram पोर्टल पर पूरा करने का आदेश दिया है। मंत्रालय के अनुसार- ब्लिंकिट, स्विगी, जोमैटो, उबर, रैपिडो और ओला जैसी बड़ी कंपनियां पहले ही इस सिस्टम से जुड़ चुकी हैं।
नए नियमों के तहत एग्रीगेटर कंपनियों के लिए अपने वार्षिक टर्नओवर का 1% से 2% हिस्सा सरकार-संचालित सामाजिक सुरक्षा कोष में देना अनिवार्य किया गया है। हालांकि इस अंशदान पर वर्कर्स को किए गए कुल भुगतान के 5% की अधिकतम सीमा भी लागू रहेगी। इस फंड का इस्तेमाल जीवन बीमा, विकलांगता बीमा, स्वास्थ्य, मातृत्व और पेंशन जैसे लाभ देने के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्लेटफॉर्म कंपनियां वर्कर्स का पंजीकरण कराने में विफल रहती हैं, तो अधिकारी उन्हें पारंपरिक कर्मचारी के रूप में पुनर्वर्गीकृत कर सकते हैं। जिससे कंपनियों पर PF और ESIC की भारी देनदारी आ सकती हैं। इसलिए नियमों का पालन करना ही व्यावहारिक रूप से सस्ता विकल्प माना जा रहा है।
केंद्रीय कानून के साथ-साथ कई राज्यों ने अपने स्तर पर भी कल्याण बोर्ड मॉडल अपनाया है। राजस्थान पहला राज्य था जिसने प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स के लिए पंजीकरण और कल्याण अधिनियम लाया, और उसके बाद कर्नाटक दूसरा राज्य बना। हाल ही में तेलंगाना विधानसभा ने भी एक नया विधेयक पारित किया है, जिसके तहत गिग वर्कर्स के लिए 20-सदस्यीय कल्याण बोर्ड बनाया जाएगा। इस बोर्ड के पास एकत्रित शुल्क का इस्तेमाल बीमा, पेंशन और मातृत्व लाभ देने के लिए होगा, और इसमें महिलाओं व दिव्यांगजनों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है। हालांकि, केंद्र और राज्य कानूनों के बीच टकराव भी सामने आया है।
कर्नाटक हाईकोर्ट में जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों ने तर्क दिया कि राज्य का कल्याण कानून केंद्रीय कानून के अधिकार-क्षेत्र का अतिक्रमण करता है। इसिलए उन्हें दोहरा पंजीकरण व दोहरा शुल्क देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कंपनियों के इस तर्क पर कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने अदालत में तर्क दिया कि दोनों कानूनों में कोई टकराव नहीं है। राजस्थान, तेलंगाना व बिहार जैसे राज्यों ने भी 2023-24 के दौरान इसी तरह के कानून बनाए हैं। कोर्ट ने कल्याण कानून पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कंपनियों को तीन हफ्तों में शुल्क जमा करने का निर्देश दिया।
सुरक्षा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने भी एक अहम आदेश दिया है। 1 फरवरी 2026 से प्रभावी इस आदेश के तहत ओला, उबर, स्विगी और जोमैटो के सभी गिग वर्कर्स को महानिदेशक (साइबर) और राज्य परिवहन विभाग दोनों के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही ड्राइवरों में महिलाओं की 15% भागीदारी सुनिश्चित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसे अगले 2-3 वर्षों में बढ़ाकर 25% तक करने की उम्मीद जताई गई है। कोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को इन दिशा-निर्देशों की निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है।
आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने e-Shram पोर्टल पर गिग वर्कर्स के पंजीकरण की घोषणा की थी, जिससे इन श्रमिकों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। साथ ही, नए लेबर कोड में 8 घंटे की कार्य अवधि, 48 घंटे से ज्यादा काम पर ओवरटाइम और सेवा की एक निश्चित अवधि पर ग्रेच्युटी जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, जो असंगठित और गिग, दोनों तरह के श्रमिकों पर लागू होंगे। गिग वर्कर्स के लिए यह बदलाव एक बड़ा कदम माना जा रहा है
Updated on:
08 Aug 2026 09:52 pm
Published on:
08 Aug 2026 09:52 pm
