
दिल की सेहत का ध्यान रखें। फोटो: , ANI, डिजाइन: AI)
दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना एक्टिव रहना जरूरी है। आमतौर पर वयस्कों को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम से तेज व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। इसमें तेज चलना, दौड़ना और साइकिल चलाना जैसी गतिविधियां शामिल हैं। नई रिसर्च में चौंकाने वाली बात सामने आई है। अगर दिल की बीमारी का खतरा काफी कम करना है, तो 150 मिनट से कहीं ज्यादा एक्सरसाइज करनी पड़ सकती है।
British Journal of Sports Medicine में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, हफ्ते में करीब 560 से 610 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करने वालों में दिल की बीमारी में 30% से ज्यादा कमी पाई गई। यह मौजूदा 150 मिनट के टारगेट से करीब तीन से चार गुना ज्यादा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को तुरंत 9-10 घंटे की एक्सरसाइज शुरू कर देनी चाहिए। शोधकर्ताओं के मुताबिक, व्यायाम की जरूरत व्यक्ति की फिटनेस और स्वास्थ्य पर निर्भर कर सकती है।
हफ्ते में 150 मिनट की मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि का मौजूदा लक्ष्य भी फायदेमंद है।
अध्ययन में इस स्तर की गतिविधि करने वाले लोगों में हृदय संबंधी बीमारी का जोखिम करीब 8 से 9% कम पाया गया।
यानी 150 मिनट का लक्ष्य बेकार नहीं है। यह दिल की सेहत के लिए एक अच्छा शुरुआती स्तर है। लेकिन ज्यादा सुरक्षा के लिए इससे अधिक शारीरिक गतिविधि की जरूरत पड़ सकती है।
रिसर्च में करीब 560 से 610 मिनट प्रति सप्ताह मध्यम से तेज गतिविधि का संबंध हृदय संबंधी जोखिम में 30% से ज्यादा कमी से पाया गया।
इसे रोज के हिसाब से देखें तो यह करीब 80 से 87 मिनट की गतिविधि बनती है।
तेज चाल से चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या ऐसी गतिविधियां, जिनसे सांस और दिल की धड़कन तेज हो, इसमें शामिल हो सकती हैं। यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी लक्ष्य नहीं है। शोध का संकेत है कि एक्सरसाइज की सही मात्रा व्यक्ति की फिटनेस के स्तर के हिसाब से अलग हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने सिर्फ एक्सरसाइज का समय नहीं देखा, बल्कि यह भी जांचा कि व्यक्ति की फिटनेस कैसी है।
इसके लिए VO₂max का अनुमान लगाया गया। आसान भाषा में समझें तो यह बताता है कि मेहनत के दौरान शरीर कितनी अच्छी तरह ऑक्सीजन का इस्तेमाल कर पाता है। इससे हृदय, फेफड़ों और मांसपेशियों की फिटनेस का अंदाजा मिलता है।
रिसर्च में कम फिट लोगों को समान लाभ पाने के लिए कुछ ज्यादा व्यायाम करना पड़ा।
उदाहरण के लिए, करीब 20% जोखिम कमी के लिए कम फिटनेस वाले लोगों में लगभग 370 मिनट प्रति सप्ताह की गतिविधि का स्तर देखा गया। वहीं ज्यादा फिट लोगों में यह करीब 340 मिनट प्रति सप्ताह था।
यह अध्ययन चीन की मकाओ पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी समेत अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने किया।
रिसर्च में UK Biobank के 17,088 लोगों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 57.4 साल थी और इनमें 56% महिलाएं थीं।
सभी प्रतिभागियों ने लगातार सात दिनों तक कलाई पर एक डिवाइस पहना। इससे उनकी रोजाना की शारीरिक गतिविधि रिकॉर्ड की गई।
इसके अलावा साइकिल टेस्ट के जरिए उनकी कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस का अनुमान लगाया गया।
प्रतिभागियों की औसतन 7.85 साल तक निगरानी की गई।
इस दौरान कुल 1,233 हृदय संबंधी घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें:
874 एट्रियल फिब्रिलेशन
156 हार्ट अटैक
111 हार्ट फेल्योर
92 स्ट्रोक
के मामले शामिल थे।
रिसर्च का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने मिनट व्यायाम करता है।
उसकी पहले से मौजूद फिटनेस भी महत्वपूर्ण है।
शोधकर्ताओं को एक्सरसाइज, फिटनेस और हृदय संबंधी जोखिम के बीच सीधा नहीं, बल्कि गैर-रेखीय संबंध मिला। आसान भाषा में कहें तो व्यायाम बढ़ाने पर फायदा हर स्तर पर एक जैसी गति से नहीं बढ़ता।
अध्ययन में केवल करीब 12% प्रतिभागी ही 560 से 610 मिनट प्रति सप्ताह वाले गतिविधि स्तर तक पहुंचे।
इससे पता चलता है कि रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी में इतनी देर तक मध्यम से तेज एक्सरसाइज करना ज्यादातर लोगों के लिए आसान नहीं है।
इसी वजह से शोधकर्ताओं ने भविष्य में व्यक्ति की फिटनेस के हिसाब से अलग-अलग एक्सरसाइज लक्ष्य तय करने की जरूरत बताई है।
क्या अब हर किसी को 9-10 घंटे एक्सरसाइज करनी होगी?
नहीं।
रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को हर हफ्ते 560 से 610 मिनट एक्सरसाइज करना ही होगी।
यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है। इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि ज्यादा एक्सरसाइज करने से सीधे तौर पर हृदय रोग का खतरा कम हुआ।
शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि अध्ययन में शामिल लोग आम आबादी की तुलना में ज्यादा स्वस्थ हो सकते हैं। साथ ही VO₂max को सीधे मापने के बजाय उसका अनुमान लगाया गया था।
इस रिसर्च के आधार पर मौजूदा 150 मिनट प्रति सप्ताह वाली सलाह को छोड़ने की जरूरत नहीं है।
बल्कि इसे एक न्यूनतम लक्ष्य की तरह देखा जा सकता है। जो लोग ज्यादा एक्टिव हैं और जिनकी फिटनेस अच्छी है, उन्हें अतिरिक्त शारीरिक गतिविधि से और फायदा मिल सकता है।
इस पूरी रिसर्च का सीधा संदेश है-थोड़ी एक्सरसाइज, बिल्कुल एक्सरसाइज न करने से बेहतर है।
150 मिनट की साप्ताहिक गतिविधि हृदय संबंधी जोखिम में करीब 8-9% कमी से जुड़ी थी। वहीं करीब 560-610 मिनट की गतिविधि का संबंध 30% से ज्यादा जोखिम कमी से पाया गया।
बहरहाल, हर व्यक्ति के लिए एक ही एक्सरसाइज टारगेट सही नहीं हो सकता। उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर भविष्य में अलग-अलग लोगों के लिए अलग गतिविधि लक्ष्य तय किए जा सकते हैं। यानि दिल की सेहत के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आप कितनी देर एक्सरसाइज करते हैं, बल्कि यह भी है कि आपकी फिटनेस कितनी है और आपका शरीर उस गतिविधि को किस तरह संभालता है।
Updated on:
08 Aug 2026 08:22 pm
Published on:
08 Aug 2026 08:22 pm
