
भारत सरकार और राज्य सरकारों के पास देश की सबसे बड़ी भूमि संपत्तियों में से एक है। रेलवे, रक्षा मंत्रालय, वन विभाग, सार्वजनिक उपक्रम और राज्य सरकारों के पास करोड़ों एकड़ जमीन है। लेकिन, इस विशाल भूमि का एक हिस्सा वर्षों से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। कहीं झुग्गियां बस गईं, कहीं अवैध कॉलोनियां बन गईं, तो कहीं जमीन माफिया ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया।
सरकारी जमीन का कोई एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस नहीं है, लेकिन प्रमुख विभागों के पास बड़ी मात्रा में भूमि है:
इसी वजह से अतिक्रमण का मुद्दा प्रशासन और न्यायालयों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
लोकसभा में 9 अगस्त 2024 को दिए गए सबसे ताजा जवाब के अनुसार, देशभर में रक्षा मंत्रालय की लगभग 10,354 एकड़ जमीन अतिक्रमण की चपेट में है। कुल रक्षा भूमि लगभग 18 लाख एकड़ है। यानी अतिक्रमण कुल भूमि के करीब 0.6% हिस्से पर है।
| 🏆 रैंक | राज्य | अतिक्रमित रक्षा भूमि (एकड़) |
|---|---|---|
| 🥇 1 | उत्तर प्रदेश | 1,778.92 |
| 🥈 2 | मध्य प्रदेश | 1,757.98 |
| 🥉 3 | महाराष्ट्र | 1,031.02 |
| 4️⃣ | पश्चिम बंगाल | 816.05 |
| 5️⃣ | हरियाणा | 780.01 |
| 6️⃣ | बिहार | 529.55 |
| 7️⃣ | राजस्थान | 478.13 |
इस सूची से साफ है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश लगभग बराबरी पर हैं। UP थोड़ा आगे है (1,778.92 एकड़), लेकिन फासला बहुत मामूली है, MP उससे सिर्फ करीब 21 एकड़ पीछे है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा भी टॉप-5 में शामिल हैं।
रेलवे के पास लगभग 4.99 लाख हेक्टेयर भूमि है। रेल मंत्री ने 27 मार्च 2026 को राज्यसभा में बताया कि इसमें से करीब 1,068 हेक्टेयर रेलवे भूमि (0.21%) अतिक्रमण के दायरे में है।
| 🚆 वर्ष | अतिक्रमित भूमि (हेक्टेयर) |
|---|---|
| 2020-21 | 810.31 |
| 2023-24 | 1,078.55 |
| 2024-25 | 1,068.54 |
यानी पांच साल में अतिक्रमण करीब 32% बढ़ा है, जबकि इसी अवधि में सिर्फ 98.02 हेक्टेयर भूमि ही वापस ली जा सकी। यानी अतिक्रमण होने की रफ्तार, जमीन वापस लेने की रफ्तार से कहीं ज़्यादा है।
रेलवे राज्यवार आंकड़े जारी नहीं करता, लेकिन ज़ोनवार डेटा रखता है। सबसे ज़्यादा अतिक्रमण मेट्रो और बड़े शहरों में स्टेशनों के आसपास, झुग्गियों के रूप में पाया जाता है, और उत्तरी रेलवे ज़ोन (हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली) में सबसे ज़्यादा दर्ज हुआ है।
वन भूमि पर अतिक्रमण सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक 13,056 वर्ग किलोमीटर (13,05,668.1 हेक्टेयर) वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में पाई गई।
| 🏆 रैंक | राज्य | अतिक्रमित वन भूमि (वर्ग किमी) |
|---|---|---|
| 🥇 1 | मध्य प्रदेश | 5,460.9 |
| 🥈 2 | असम | 3,620.9 |
| 🥉 3 | कर्नाटक | 863.08 |
| 4️⃣ | महाराष्ट्र | 575.54 |
| 5️⃣ | अरुणाचल प्रदेश | 534.9 |
यानी वन भूमि पर कब्जे के मामले में मध्य प्रदेश देश में सबसे ऊपर है, और असम दूसरे नंबर पर है।
ज़रूरी बात: यह आंकड़ा सिर्फ 25 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का है, जिन्होंने अपना डेटा मंत्रालय को भेजा है। 10 राज्य — बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, नगालैंड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — ने अभी तक अपना डेटा जमा ही नहीं किया है। यानी देश भर का असली आंकड़ा 13,056 वर्ग किमी से कहीं ज़्यादा हो सकता है।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का सीधा असर सरकारी परियोजनाओं, सड़क, रेलवे, रक्षा ढांचे और पर्यावरण संरक्षण पर पड़ता है।
हालांकि पूरे देश का एक संयुक्त आर्थिक नुकसान का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अलग-अलग शहरों में एक-एक कार्रवाई में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन वापस लेने के मामले सामने आते रहते हैं। जैसे दिल्ली कैंटोनमेंट में हाल की एक कार्रवाई में करीब 165 करोड़ रुपये मूल्य की रक्षा भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गई।