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क्या आप भी खास फ्लेवर का दावा देख खरीदते हैं बोतल? अगर हां तो बदल सकती है आपकी धारणा, अल्कोहल पर FSSAI सख्त

FSSAI Alcohol Label Rules: यह मामला केवल व्हिस्की, रम या अन्य अल्कोहलिक पेय का नहीं है। यानी यह शराब नहीं, बल्कि बोतल पर लिखे 'दावों की सच्चाई' की लड़ाई है, असल में सवाल तो यह है कि क्या कंपनियां पैकेजिंग पर ऐसा दावा कर सकती हैं, जिससे ग्राहक किसी उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में गलत धारणा बना ले? क्या आप भी रखते हैं किसी ब्रांड के खास फ्लेवर का शौक?
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 05, 2026

FSSAI Alcohol Label Rules

FSSAI Alcohol Label Rules : क्या आप जानते हैं बोतल पर लिखे Agent या Premium शब्द का मतलब? FSSAI ने क्यों शुरू की सख्ती? (AI Creative)

FSSAI Alcohol Label Rules: अगर आप किसी शराब की बोतल पर 'Aged', 'Premium', 'Reserve', 'Finest Blend' या फिर किसी खास फ्लेवर का दावा देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाते आए हैं, तो आपकी यह धारणा बदल सकती है। दरअसल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल में कई शराब निर्माताओं को ऐसे दावों और फ्लेवर के इस्तेमाल पर नोटिस जारी किए हैं, जिन्हें वह नियमों के अनुरूप नहीं मानता या जिनसे उपभोक्ता भ्रमित हो सकता है।

यह कार्रवाई केवल कुछ ब्रांडों तक सीमित नहीं है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह भारत में 'Truthful Labelling' (सच्ची लेबलिंग) की दिशा में बड़ा कदम है, जहां किसी भी उत्पाद पर किया गया दावा वैज्ञानिक, कानूनी और तथ्यात्मक आधार पर पूरी तरह के खरा उतरना जरूरी होगा।

जानिए आखिर विवाद क्या है?

FSSAI ने कुछ शराब निर्माताओं के उत्पादों की समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ मामलों में ऐसे फ्लेवर या विवरण इस्तेमाल किए गए हैं, जिनसे उपभोक्ता को यह आभास हो सकता है कि उत्पाद लंबे समय तक परिपक्व (Aged) किया गया है या उसकी गुणवत्ता वास्तव में उससे बेहतर है। नियामक यह भी देख रहा है कि क्या लेबल पर लिखे गए दावे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों और संबंधित उत्पाद मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। गौर फरमाने वाली बात यह है कि FSSAI ने अभी सभी ब्रांडों को दोषी घोषित नहीं किया है। उसका नोटिस जारी करने का उद्देश्य कंपनियों से स्पष्टीकरण लेना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

पिछले कुछ वर्षों में FSSAI ने कई श्रेणियों में ऐसे दावों पर लिया है एक्शन

  • '100% Pure' जैसे दावे
  • स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक दावे
  • गलत न्यूट्रिशन क्लेम
  • अब शराब पर Age और Flavour संबंधी दावे
  • यानी अब नियामक केवल उत्पाद नहीं, बल्कि उसकी मार्केटिंग भाषा की भी जांच कर रहा है।

'Aged' शब्द इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

दरअसल शराब उद्योग में 'Aged' शब्द केवल सजावटी विशेषण नहीं माना जाता। कई प्रकार की व्हिस्की, रम और अन्य स्पिरिट्स में उम्र (Age Statement) गुणवत्ता, स्वाद और कीमत को प्रभावित करती है। यदि किसी उत्पाद में ऐसा शब्द इस्तेमाल किया जाए जिससे उपभोक्ता को लगे कि पेय लंबे समय तक बैरल में परिपक्व किया गया है, जबकि यह दावा हकीकत से बिल्कुल अलग हो, तो इसे भ्रामक माना जा सकता है। यही कारण है कि FSSAI इस तरह के दावों की जांच कर रहा है।

फ्लेवर पर भी सवाल क्यों?

कुछ मामलों में नियामक ने ऐसे फ्लेवर के उपयोग पर भी आपत्ति जताई है जो, उपभोक्ता को प्राकृतिक परिपक्वता जैसा अनुभव देने का आभास करा सकते हैं। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि-

1- कौन-से फ्लेवर की अनुमति है?
2- उसका खुलासा लेबल पर किया गया या नहीं?
3- कहीं फ्लेवर के जरिए उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता को बढ़ा-चढ़ाकर तो प्रस्तुत नहीं किया गया?
4- उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा?

यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया गया तो-

  • बोतलों पर अधिक स्पष्ट जानकारी लिखनी होगी।
  • Age Statement अधिक पारदर्शी हो सकते हैं।
  • भ्रामक मार्केटिंग कम होगी।
  • ग्राहक तुलना अधिक सही तरीके से कर सकेंगे।
  • गुणवत्ता के दावों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

क्या आप जानते हैं शराब की बोतल पर लिखे इन शब्दों का मतलब?

  • Aged : उत्पाद को निश्चित अवधि तक परिपक्व किया गया है (यदि नियमों के अनुरूप हो)।
  • Premium : यह कोई निश्चित कानूनी गुणवत्ता मानक नहीं है, अक्सर मार्केटिंग शब्द के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  • Reserve : कई देशों में इसका उपयोग अलग-अलग तरीके से किया जाता है। इसका अर्थ हमेशा अधिक उम्र या बेहतर गुणवत्ता नहीं होता।
  • Finest Blend : यह भी मुख्य तौर पर ब्रांडिंग शब्द है।

उपभोक्ता को किस पर ध्यान देने की जरूरत?

1- सबसे पहले ये जानिए

  • निर्माता का नाम
  • अल्कोहल का पर्सेंटेज (Alcohol Percentage)
  • बैच नंबर (Batch Number)
  • मैन्युफैक्चरिंग डिटेल (Manufacturing Details)
  • इन्ग्रिडिएंट (Ingredient) या फ्लेवर (Flavour) संबंधी जानकारी (जहां भी लागू हो)
  • राज्य के आबकारी नियमों के अनुसार आवश्यक घोषणाएं

2- भारत में शराब की लेबलिंग कौन नियंत्रित करता है?

  • FSSAI : खाद्य सुरक्षा और कुछ लेबलिंग/मानक संबंधी पहलू
  • राज्य आबकारी विभाग : बिक्री एवं लाइसेंस, कानूनी माप विज्ञान (Legal Metrology) से जुड़े नियम तथा अन्य लागू नियामकीय प्रावधान, यानी शराब उद्योग एक से अधिक नियामकीय व्यवस्थाओं के तहत काम करता है।

3- दुनिया में क्या हो रहा है?

यूरोप, अमेरिका और कई अन्य देशों में भी शराब की लेबलिंग, स्वास्थ्य चेतावनी, सामग्री के खुलासे और मार्केटिंग दावों को लेकर नियम लगातार सख्त किए जा रहे हैं। भारत भी पारदर्शिता की इसी वैश्विक प्रवृत्ति की ओर बढ़ता दिख रहा है।

क्या सभी कंपनियां दोषी हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा नहीं है कि सभी कंपनियां दोषी हैं। उनका कहना है कि FSSAI द्वारा नोटिस जारी करने का अर्थ दोष सिद्ध होना बिल्कुल नहीं है। नोटिस के बाद कंपनियों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। अंतिम निर्णय नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आता है।

एक्सपर्ट्स का बड़ा संदेश

FSSI की इस कार्रवाई को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह एक्शन बताता है कि भविष्य में कंपनियों के लिए केवल आकर्षक पैकेजिंग पर्याप्त नहीं होगी। किसी भी दावे के पीछे प्रमाण, नियमों का पालन और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी होगी।

गौरतलब है कि इस मामले में FSSAI ने कुछ कंपनियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। यह कार्रवाई नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे अंतिम दोष सिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे में कहना होगा कि FSSAI की यह पहल शराब उद्योग के लिए एक चेतावनी भर नहीं है, बल्कि पूरे उपभोक्ता बाजार के लिए एक बड़ा मैसेज है कि मार्केटिंग और वास्तविकता के बीच का अंतर अब नियामकों की नजर से नहीं बचेगा। यदि यह सख्ती लगातार जारी रहती है तो, आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में लेबलिंग अधिक पारदर्शी, तथ्यपरक और उपभोक्ता-केंद्रित हो सकती है।