
Kidney Stone Prevention: गुर्दे में पथरी का अब नया इलाज, वैज्ञानिक शोधों ने बदली सोच (AI Graphic:)
Kidney Stone Prevention: वर्षों से किडनी स्टोन से बचाव का सबसे आम मंत्र यही रहा है, 'ज्यादा पानी पिएं और ऑक्सालेट वाली चीजें कम खाएं।' लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सलाह अकेले काफी नहीं है। नई रिसर्च बता रही है कि किडनी स्टोन केवल पानी की कमी या ऑक्सालेट से नहीं बनता, बल्कि आंत के माइक्रोबायोम (Gut Microbiome), नमक, पोटैशियम, साइट्रेट, मूत्र की रासायनिक संरचना और व्यक्ति के मेटाबॉलिज्म का भी इसमें बड़ा योगदान है। यानी किडनी स्टोन की रोकथाम अब एक ही फॉर्मूला नहीं, बल्कि पर्सनलाइज्ड प्रिवेंशन की ओर बढ़ रही है।
हाल में प्रकाशित वैज्ञानिक समीक्षाओं और क्लिनिकल अध्ययनों के मुताबिक ज्यादातर मरीजों में केवल पानी बढ़ाने से समस्या पूरी तरह नहीं रुकती। एक बड़े क्लिनिकल ट्रायल में हाइड्रेशन बढ़ाने की कोशिश के बावजूद दोबारा स्टोन बनने की दर में अपेक्षित कमी नहीं दिखी। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पानी नहीं, बल्कि कुल यूरिन आउटपुट, भोजन की गुणवत्ता और व्यक्तिगत जोखिम अधिक महत्वपूर्ण हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि, आंत में रहने वाले कुछ अच्छे बैक्टीरिया ऑक्सालेट को तोड़ने में मदद करते हैं। यदि ये बैक्टीरिया कम हो जाएं तो शरीर ज्यादा ऑक्सालेट अवशोषित करता है और स्टोन का खतरा बढ़ सकता है। इस दिशा में प्रोबायोटिक्स पर भी शोध चल रहा है।
ज्यादा सोडियम खाने से पेशाब में कैल्शियम बढ़ता है, जिससे कैल्शियम स्टोन बनने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए विशेषज्ञ केवल ऑक्सालेट नहीं, नमक कम करने की सलाह भी दे रहे हैं।
कई लोग दूध और दही छोड़ देते हैं, जबकि सामान्य मात्रा में भोजन से मिलने वाला कैल्शियम आंत में ऑक्सालेट को बांधकर उसके अवशोषण को कम कर सकता है।
नींबू, संतरा जैसे खट्टे फल साइट्रेट देते हैं, जो क्रिस्टल बनने से रोकने में मदद करता है। फल और सब्जियां पोटैशियम भी बढ़ाती हैं, जिससे जोखिम कम हो सकता है।
भारत 'स्टोन बेल्ट' वाले देशों में गिना जाता है। गर्म मौसम, कम पानी पीना, अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन तथा जीवनशैली में बदलाव किडनी स्टोन के मामलों को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ अब केवल पानी पीने की सलाह नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्टोन रिपोर्ट, 24 घंटे की यूरिन जांच और खानपान के अनुसार अलग-अलग रोकथाम रणनीति अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
हालांकि किडनी स्टोन की रोकथाम का अब भी सबसे महत्वपूर्ण उपाय है ज्यादा पानी पीना, लेकिन यह सोच 'ज्यादा पानी पीजिए' तक सीमित नहीं रही। नई रिसर्च बताती है कि माइक्रोबायोम, संतुलित कैल्शियम, कम नमक, पर्याप्त साइट्रेट, बेहतर आहार और व्यक्तिगत मेडिकल मूल्यांकन, इन सबका संयोजन भविष्य की रणनीति होगा। यानी किडनी स्टोन से बचाव का नया युग पर्सनलाइज्ड और साइंस-आधारित प्रिवेंशन का है।
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज और यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी गाइडलाइन के मुताबिक किडनी स्टोन 4 तरह के होते हैं।
कैल्शियम ऑक्सालेट - 70-80% मामले - ऑक्सालेट, कम पानी, अधिक सोडियम
यूरिक एसिड - 10-15% मामले - हाई प्यूरिन डाइट, गाउट, डायबिटीज
स्ट्रुवाइट - 10% से कम मामले - बार-बार यूरिन इन्फेक्शन
सिस्टीन - 1% से कम मामले - आनुवंशिक बीमारी
नई रिसर्च बताती है कि कुछ एंटीबायोटिक्स आंत के अच्छे बैक्टीरिया कम कर सकते हैं। यही बैक्टीरिया ऑक्सालेट को तोड़ते हैं। इसलिए भविष्य की रोकथाम में Gut Microbiome बड़ी भूमिका निभा सकता है।
बहुत लोग सोचते हैं कि सिर्फ नींबू पानी पीने से स्टोन नहीं होगा। जबकि सच यह है कि साइट्रेट फायदेमंद है, लेकिन यदि चीनी बहुत अधिक मिलाई जाए तो लाभ कम हो सकता है। बिना कम चीनी वाला पेय अधिक उपयुक्त माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार पुरुषों में किडनी स्टोन का जोखिम महिलाओं की तुलना में अधिक रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में महिलाओं में भी मामले बढ़े हैं। यदि एक बार किडनी स्टोन हो चुका है, तो बिना उचित रोकथाम के अगले 5-10 वर्षों में दोबारा होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। अधिकांश छोटे स्टोन अपने आप निकल सकते हैं, लेकिन बड़े स्टोन के लिए चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ सकती है।
किडनी स्टोन अब केवल पानी कम पीने की बीमारी नहीं मानी जा रही। नई रिसर्च बता रही है कि भविष्य की सबसे बड़ी लड़ाई माइक्रोबायोम, मेटाबॉलिज्म, व्यक्तिगत डाइट और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों को समझकर लड़ी जाएगी। यानी इलाज से ज्यादा महत्व अब वैज्ञानिक रोकथाम का होगा।
Updated on:
04 Aug 2026 04:02 pm
Published on:
04 Aug 2026 04:02 pm
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