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सिमरन से कहीं आगे… 10 फिल्मों ने बदली बॉलीवुड हीरोइन की परिभाषा, 90s में ‘हीरो’ नहीं, कहानी की जान बनीं काजोल

Kajol Birthday: कुछ कुछ होता है कि अंजलि का किरदार आज भी यूथ के बीच खासा लोकप्रिय है और प्रेमियों के बीच सिमरन का खूबसूरत अंदाज। हर किरदार में जान डालने वाली अभिनेत्री काजोल का 5 अगस्त को जन्मदिन हैं, बर्थडे स्पेशल में जानिए काजोल क्यों कहलाती हैं 90s की आखरी सुपरस्टार
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 04, 2026

Kajol Birthday Special

Kajol Birthday Special: हैप्पी बर्थ डे काजोल। (AI Creative)

Kajol Birthday: न ग्लैमर का तय पैमाना अपनाया, न हर साल कई फिल्में कीं। फिर भी तीन दशक बाद भी काजोल की पहचान कायम है। उनकी 10 फिल्मों ने यह साबित किया कि बॉलीवुड की हीरोइन सिर्फ खूबसूरत चेहरा नहीं, कहानी का सबसे मजबूत किरदार भी हो सकता है। दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे की सिमरन और दुश्मन फिल्म में डबल रोल में भूमिका निभाने वाली काजोल का 5 अगस्त को जन्मदिन है। जानिए 5 अगस्त 1974 को मुंबई में जन्मीं काजोल की 10 फिल्में और 10 वो बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं।

'हीरो की हीरोइन' नहीं, कहानी की जान बनीं काजोल

90 का दशक बॉलीवुड में बड़े हीरो का दौर था। फिल्मों का केंद्र अक्सर नायक होता था और नायिका का रोल सीमित। लेकिन इसी दौर में काजोल ने ऐसे किरदार चुने, जिन्होंने इस सोच को चुनौती दी। उन्होंने कभी पारंपरिक 'ग्लैमरस' छवि पर भरोसा नहीं किया। उनकी बड़ी-बड़ी आंखें, तेज संवाद अदायगी, स्वाभाविक अभिनय और भावनाओं को सहजता से पर्दे पर उतारने की क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दी। आज जब उनका जन्मदिन मनाया जा रहा है, तब यह समझना दिलचस्प है कि आखिर क्यों काजोल को 90 के दशक की आखिरी सुपरस्टार अभिनेत्रियों में गिना जाता है।

वे 10 फिल्में जिन्होंने बदली बॉलीवुड हीरोइन की छवि

  1. बाजीगर (Baazigar-1993) :यहां काजोल सिर्फ प्रेमिका नहीं थीं। कहानी में उनका भावनात्मक संघर्ष फिल्म का महत्वपूर्ण आधार बना
  2. ये दिल्लगी (Yeh Dillagi-1994) : आधुनिक, आत्मविश्वासी और अपने फैसले लेने वाली युवती का किरदार उस दौर की पारंपरिक छवि से अलग था।
  3. दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे (Dilwale Dulhania Le Jayenge-1995) : 'सिमरन' भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय महिला पात्रों में गिनी जाती है। वह परिवार का सम्मान करती है, लेकिन अपनी पसंद और प्रेम को भी महत्व देती है।
  4. गुप्त (Gupt-1997) : इस फिल्म ने इतिहास रचा। काजोल का किरदार हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित महिला नकारात्मक भूमिकाओं में गिना जाता है। इससे साबित हुआ कि नायिका सिर्फ सकारात्मक किरदार तक सीमित नहीं।
  5. इश्क (Ishq-1997) : कॉमेडी में उनकी सहज टाइमिंग ने दिखाया कि वे सिर्फ रोमांटिक फिल्मों की अभिनेत्री नहीं हैं।
  6. दुश्मन (Dushman-1998) : बल रोल और बदले की कहानी। यहां काजोल पूरी फिल्म अपने कंधों पर लेकर चलती हैं।
  7. कुछ-कुछ होता है (Kuch Kuch Hota Hai-1998) : 'अंजलि' ने दोस्ती, प्यार और आत्मसम्मान के भाव को नई पहचान दी। यह किरदार आज भी युवाओं के बीच लोकप्रिय है।
  8. कभी खुशी-कभी गम (Kabhi Khushi Kabhie Gham-2001) : अंजलि शर्मा के रूप में उन्होंने हास्य, भावुकता और पारिवारिक संवेदनाओं का शानदार संतुलन दिखाया।
  9. फना (Fanaa-2006) : एक दृष्टिहीन महिला के जटिल किरदार ने साबित किया कि शादी और मातृत्व के बाद भी अभिनेत्री मजबूत मुख्य भूमिका निभा सकती है।
  10. माय नेम इज खान (My Name Is Khan-2010) : एक मां और पत्नी के रूप में उनके अभिनय ने फिल्म को भावनात्मक गहराई दी। यह उनके करियर की सबसे परिपक्व प्रस्तुतियों में गिनी जाती है।

आखिर क्यों कहलाती हैं 90 के दशक की आखिरी सुपरस्टार?

काजोल की खासियत सिर्फ हिट फिल्मों की संख्या नहीं है। उनकी सफलता कई वजहों से अलग दिखाई देती है, इनमें-
उन्होंने अपने दौर के लगभग सभी बड़े सितारों के साथ सफल फिल्में दीं। रोमांस, कॉमेडी, थ्रिलर, पारिवारिक ड्रामा और गंभीर विषय तक, हर शैली में खुद को साबित किया। शादी के बाद भी उनका स्टारडम कम नहीं हुआ, जबकि उस दौर में कई अभिनेत्रियों का करियर धीमा पड़ जाता था। उन्होंने लंबे ब्रेक लिए, लेकिन हर वापसी यादगार रही। आज भी ओटीटी और फिल्मों में उनके नए प्रोजेक्ट चर्चा का विषय बनते हैं।

काजोल का 'सक्सेस फॉर्मूला' क्या है?

  1. कम फिल्में, बेहतर चुनाव

उन्होंने कभी सिर्फ संख्या बढ़ाने पर जोर नहीं दिया। किरदार मजबूत हो तो ही फिल्म स्वीकार की।

  1. अभिनय को ग्लैमर पर तरजीह

उनकी पहचान अभिनय रही, फैशन नहीं।

  1. हर किरदार अलग

सिमरन, अंजलि, ईशा, नैना या सोनिया—दो किरदार एक जैसे नहीं दिखते।

  1. निजी जिंदगी को प्राथमिकता

शादी, परिवार और बच्चों के लिए उन्होंने काम से ब्रेक लिया, लेकिन वापसी भी दमदार रही।

  1. बदलते दौर के साथ खुद को बदला

सिनेमा से लेकर ओटीटी तक, उन्होंने माध्यम बदला लेकिन अभिनय का स्तर नहीं।

काजोल का शानदार अभिनय बना खास

  • डेब्यू- Bekhudi (1992)
  • पहली बड़ी सफलता - Baazigar (1993)
  • सबसे प्रतिष्ठित फिल्म - Dilwale Dulhania Le Jayenge
  • सबसे साहसी भूमिका - Gupt
  • सबसे भावनात्मक प्रदर्शन - My Name Is Khan
  • खास पहचान - स्वाभाविक अभिनय, मजबूत महिला किरदार

10 बातें जो कम लोग जानते हैं: Untold Story Of Kajol

  1. पूरा नाम 'Kajol Mukherjee' है शादी के बाद भी उन्होंने स्क्रीन पर अपना पहला नाम ही रखा।
  2. 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया उन्होंने पंचगनी के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन पहली फिल्म के लिए पढ़ाई बीच में छोड़ दी।
  3. पहली फिल्म फ्लॉप थी 1992 में आई Bekhudi, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन इसके बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा।
  4. 'DDLJ' के लिए पहली पसंद नहीं थीं फिल्म में पहले दूसरी अभिनेत्रियों पर विचार हुआ था, लेकिन अंत में काजोल को चुना गया और यह उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म बनी।
  5. बिना मेकअप रहने में सहज काजोल कई इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि उन्हें ग्लैमर से ज्यादा सहज रहना पसंद है।
  6. पढ़ने की शौकीन उन्हें किताबें पढ़ने का बहुत शौक है और शूटिंग के दौरान भी अक्सर किताब साथ रखती हैं।
  7. रिकॉर्ड जीत उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए कई फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं और इस मामले में शीर्ष अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
  8. अभिनय परिवार से संबंध मां Tanuja, नानी Shobhna Samarth और पिता Shomu Mukherjee फिल्म जगत से जुड़े रहे हैं।
  9. समाजसेवा से जुड़ाव वे शिक्षा और बच्चों से जुड़े सामाजिक अभियानों का समर्थन करती रही हैं।
  10. 'सिमरन' से आगे भी कई यादगार किरदार Gupt में नेगेटिव रोल हो या Fanaa, My Name Is Khan और Helicopter Eela में उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।

काजोल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं, बल्कि यह है कि उन्होंने बॉलीवुड की नायिका की परिभाषा बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने दिखाया कि एक अभिनेत्री बिना तयशुदा ग्लैमर, बिना हर साल दर्जनों फिल्में किए और बिना किसी बनावटी छवि के भी दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज कर सकती है। यही वजह है कि आज भी काजोल का नाम 90 के दशक की सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक असर छोड़ने वाली अभिनेत्रियों में लिया जाता है।