
Indian Army future Warfare Course: भारतीय सेना का नया कोर्स, AI बनेगा हथियार, जंग के मैदानों में साइबर वार की तैयारी। (AI Creative)
Indian Army Future Warfare Course: भारत की सेना अब केवल बंदूक, टैंक और मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। आने वाले वर्षों में युद्ध का मैदान बदल सकता है, जहां दुश्मन सीमा पर गोली चलाने से पहले कंप्यूटर नेटवर्क ठप कर सकता है, ड्रोन के झुंड से हमला कर सकता है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए सैन्य फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी बदलते खतरे को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों ने चौथे ट्राई-सर्विसेज फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स की शुरुआत की है। यह चार सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 3 अगस्त से नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में शुरू हो गया है।
इस पहल का उद्देश्य केवल नई तकनीक की जानकारी देना नहीं, बल्कि सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों को ऐसे युद्ध के लिए तैयार करना है जिसमें AI, साइबर, ड्रोन, क्वांटम तकनीक, स्पेस और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के युद्ध और ड्रोन आधारित हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़े जाएंगे। ड्रोन स्वॉर्म, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सूचना युद्ध किसी भी सैन्य अभियान का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इसी बदलाव के अनुरूप भारतीय सेना अपने अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है। �
आधुनिक युद्ध में दुश्मन केवल सैनिकों को नहीं, बल्कि संचार व्यवस्था, बिजली नेटवर्क, डेटा सेंटर और सूचना प्रणाली को भी निशाना बना सकता है। इसलिए अब सैनिकों को डिजिटल सुरक्षा और सूचना युद्ध की समझ देना भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है। शोध बताते हैं कि भविष्य में साइबर और AI आधारित हमले किसी भी सैन्य अभियान की दिशा बदल सकते हैं।
इस कोर्स का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के बीच संयुक्त सोच विकसित करना भी है। भविष्य के युद्धों में तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत रणनीति के तहत काम करेंगी। यही अवधारणा प्रस्तावित थिएटर कमांड व्यवस्था का भी आधार मानी जा रही है।
शुरुआत: 3 अगस्त 2026
अवधि: 4 सप्ताह
स्थान: मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली
आयोजन: Headquarters Integrated Defence Staff (HQ IDS)
समन्वय: Centre for Joint Warfare Studies (CENJOWS)
प्रतिभागी: थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारी
भारतीय सेना का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक नया कोर्स नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य सोच में बड़े बदलाव का संकेत है। भविष्य का युद्ध केवल सीमा पर नहीं, बल्कि कंप्यूटर नेटवर्क, अंतरिक्ष, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मोर्चों पर भी लड़ा जाएगा। ऐसे में भारतीय सशस्त्र बलों का यह कदम उन्हें तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Updated on:
03 Aug 2026 03:42 pm
Published on:
03 Aug 2026 03:42 pm
