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लाइफस्टाइल रोगों से बचने के लिए खानपान में करें बदलाव, समझिए स्वस्थ आहार के चार मूल सिद्धांत

मानसून में गंभीर लाइफस्टाइल बीमारियों से बचना है? जानिए WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ आहार के मूल सिद्धांत, फाइबर, नमक-शक्कर का नियम और सही डाइट टिप्स।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 03, 2026

Balance diet

बदलते मौसम में गंभीर बीमारियों का खतरा और बचाव (AI)

मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी तो लाता ही है, लेकिन साथ ही हवा में नमी और बदलते मौसम के कारण स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। क्या आप जानते हैं कि इस मौसम में सेहत का ध्यान रखने के लिए केवल छाता लेकर बाहर निकलना ही काफी नहीं है? जी हाँ, हमारी थाली का हमारे स्वास्थ्य से सीधा संबंध है। मानसून के समय सही आहार और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके आप न केवल मौसमी बीमारियों बल्कि जीवनशैली (लाइफस्टाइल) से जुड़ी गंभीर बीमारियों से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

मानसून की नमी और बदलते वातावरण के दौरान हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और कुछ विशेष प्रकार के कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (Non-Communicable Diseases) का जोखिम और अधिक बढ़ सकता है। दैनिक खानपान में किए गए छोटे और समझदारी भरे बदलाव इन रोगों के बचाव में अत्यंत कारगर साबित होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशें और भारत के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों के दिशा-निर्देश इस दिशा में एक स्पष्ट और वैज्ञानिक मार्ग दिखाते हैं।

स्वस्थ आहार के चार मूल सिद्धांत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक संतुलित, पौष्टिक और संपूर्ण आहार मुख्य रूप से चार मूल सिद्धांतों पर आधारित होता है: पर्याप्तता (Adequacy), संतुलन (Balance), संयम (Moderation), और विविधता (Variety)।

  • पर्याप्तता: इसका अर्थ है कि आपके दैनिक आहार से शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व (विटामिन, खनिज, प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट) पर्याप्त मात्रा में मिलने चाहिए।
  • संतुलन: आपकी ऊर्जा की खपत (कैलोरी सेवन) और शारीरिक गतिविधियों द्वारा ऊर्जा का व्यय समान होना चाहिए ताकि वजन नियंत्रित रहे।
  • संयम: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले तत्वों जैसे अत्यधिक नमक, शक्कर और अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन सीमित मात्रा में होना चाहिए।
  • विविधता: भोजन में केवल एक प्रकार का अनाज या सब्जी शामिल करने के बजाय साबुत अनाज, दालें, फल, सब्जियाँ, नट्स और डेयरी उत्पादों का मिश्रण होना चाहिए।

फल, सब्जियां और फाइबर: आरोग्य का असली आधार

WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 10 वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। 2 से 5 वर्ष के छोटे बच्चों के लिए यह मात्रा 250 ग्राम और 6 से 9 वर्ष के बच्चों के लिए 350 ग्राम निर्धारित की गई है।

इसके साथ ही, वयस्कों को प्रतिदिन कम से कम 25 ग्राम फाइबर (रेशा) अपने आहार में ज़रूर शामिल करना चाहिए। फाइबर हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करता है, रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और कोलेस्ट्रॉल घटाकर हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम करता है।

नमक, शक्कर और वसा में संयम जरूरी

प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) और पैक्ड खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन ने हमारे आहार में सोडियम, शुगर और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा बहुत बढ़ा दी है। बीमारियों से बचने के लिए इनमें संयम बरतना अनिवार्य है:

  • नमक (सोडियम): अत्यधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप और दिल के दौरे का सबसे बड़ा कारण बनता है। WHO के अनुसार, एक वयस्क को प्रतिदिन 5 ग्राम (लगभग एक छोटी चम्मच) से अधिक नमक नहीं खाना चाहिए।
  • फ्री शुगर (ऊपरी शक्कर): दिनभर की कुल कैलोरी में शक्कर की मात्रा 10% से कम होनी चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे 5% तक सीमित करना सबसे आदर्श माना जाता है।
  • वसा (फैट): कुल दैनिक ऊर्जा का 30% से अधिक हिस्सा वसा से नहीं आना चाहिए। इसमें संतृप्त वसा (Saturated Fat) 10% से कम और ट्रांस वसा (Trans Fat) 1% से कम होनी चाहिए। ट्रांस वसा (जैसे बार-बार गर्म किया गया तेल या बेकरी उत्पाद) को पूरी तरह से त्याग देना ही सेहत के लिए सबसे सुरक्षित है।

पारंपरिक भारतीय थाली और पौष्टिक विकल्प

भारत की पारंपरिक थाली जिसमें दाल, मौसम के अनुसार सब्जी, रोटी या चावल, और दही या छाछ शामिल होती है पोषण का एक बेहतरीन उदाहरण है। WHO और भारतीय पोषण विशेषज्ञों की सलाह है कि रिफाइंड अनाज (जैसे मैदा या सफेद चावल) की जगह साबुत अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स जैसे बाजरा, ज्वार, रागी), दालें, नट्स और बीज प्राथमिकता से अपनाएं। ये न केवल आपको ऊर्जा देते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को भी मजबूत बनाते हैं।

बचपन सेस्वस्थ आदतों की करेंशुरुआत

खानपान की अच्छी आदतों की नींव बचपन में ही रखी जानी चाहिए। शिशु के जन्म के शुरुआती छह महीनों तक केवल और केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) कराना चाहिए। इसके बाद, बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पूरक आहार के रूप में विविध और पोषक तत्वों से भरपूर ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए। यह अभ्यास बच्चे को भविष्य में मोटापे, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखता है।

वजन और बीएमआई (BMI) का संतुलन

वयस्कों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) हमेशा 18.5 से 24.9 के आदर्श दायरे में होना चाहिए। 25 या उससे अधिक BMI अतिवजन या मोटापे का संकेत है, जिससे हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह और जोड़ों के दर्द का खतरा बढ़ जाता है। नियमित संतुलित आहार और प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि से सही वजन बनाए रखना आसान हो जाता है।

रसोई में करें ये आसान बदलाव

अपने दैनिक जीवन में इन नियमों को लागू करना बहुत आसान है:

  • अनाज बदलें: गेहूं और सफेद चावल के साथ-साथ बाजरा, ज्वार, कुट्टू या ब्राउन राइस को आहार में शामिल करें।
  • थाली का संतुलन: अपनी थाली का आधा हिस्सा रंग-बिरंगी सब्जियों और सलाद से भरें।
  • तेल और पकाने का तरीका: तलने के बजाय उबालकर, भाप में पकाकर या ग्रिल करके खाना बनाएं। कम तेल का प्रयोग करें।
  • पौष्टिक स्नैक्स: चाय के साथ बिस्कुट या नमकीन की जगह भुने हुए चने, मखाना, दही, या मुट्ठी भर नट्स (बादाम, अखरोट) खाएं।

डॉक्‍टरी सलाह कब है जरूरी?

यदि आपको पहले से ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गुर्दे से जुड़ी कोई बीमारी है, तो अपने खानपान में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या पंजीकृत पोषण विशेषज्ञ (Dietitian) से परामर्श अवश्य लें। वे आपकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और दवाओं के आधार पर आपके लिए सही आहार योजना (Diet Chart) तैयार कर सकते हैं।


खानपान में किए गए छोटे-छोटे किंतु निरंतर बदलाव जैसे ताजे फल-सब्जियां खाना, नमक-चीनी-तेल कम करना और साबुत अनाज को प्राथमिकता देना आपको जीवनशैली से जुड़ी गंभीर बीमारियों से दूर रख सकते हैं। आज ही अपनी थाली में सुधार करें और एक स्वस्थ, रोगमुक्त जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।