
Tehsil Divas Sampurna Samadhan Divas UP
ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में जमीन, कब्जा, नामांतरण, आय-जाति प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं और राजस्व विभाग से जुड़े विवाद आम हैं। ऐसे मामलों में लोगों को अक्सर तहसील और सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी समस्या को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तहसील दिवस (सम्पूर्ण समाधान दिवस) आयोजित किया जाता है, जहां आम नागरिक सीधे अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रख सकते हैं।
तहसील दिवस एक विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम है, जिसमें जिला और तहसील स्तर के अधिकारी एक ही स्थान पर बैठकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों में लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण करना और लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना है।
उत्तर प्रदेश में सम्पूर्ण समाधान दिवस प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय शनिवार को आयोजित होता है, जिसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक/अधीक्षक, उप जिलाधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। कई बार जिलाधिकारी खुद भी अलग-अलग तहसीलों में जाकर इसकी अध्यक्षता करते हैं, और कभी-कभी परीक्षा या अन्य प्रशासनिक जरूरतों के चलते तारीख आगे-पीछे भी की जाती है।
वास्तविक तहसील दिवसों में सबसे ज्यादा शिकायतें राशन, बिजली, भूमि पैमाइश, आवास और पेंशन से जुड़ी दर्ज होती देखी गई हैं, जो बताता है कि यह मंच वाकई रोजमर्रा की प्रशासनिक समस्याओं के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
तहसील दिवस का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शिकायत सीधे जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचती है। सामान्य दिनों में जिस मामले को कई विभागों में भेजना पड़ सकता है, उसकी सुनवाई एक ही मंच पर हो जाती है।
शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग को भेजा जाता है और उसकी निगरानी भी की जाती है। कई मामलों में मौके पर ही आदेश जारी कर दिए जाते हैं। असल आयोजनों में देखा गया है कि दर्ज शिकायतों में से कुछ हिस्से (आमतौर पर 10-15%) का समाधान उसी दिन, मौके पर मौजूद संबंधित विभागीय अधिकारी के जरिए हो जाता है, बाकी शिकायतें आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भेजी जाती हैं।
इसके अलावा शिकायत का रिकॉर्ड भी बनता है, जिससे बाद में कार्रवाई न होने पर उच्च अधिकारियों के सामने मामला उठाना आसान हो जाता है।
यहां एक बात साफ समझनी जरूरी है। तहसील दिवस में शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई एक समान, सरकार-निर्धारित 7 दिन या 30 दिन जैसी तय संख्या वाली समय-सीमा सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं होती। इसके बजाय, हर आयोजन में जिलाधिकारी या अपर जिलाधिकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को "निर्धारित समय-सीमा के भीतर" निस्तारण के निर्देश देते हैं, और यह समय-सीमा मामले की जटिलता और जिले के आंतरिक निर्देशों पर निर्भर करती है।
जो शिकायतें मौके पर ही निपट सकती हैं (जैसे किसी दस्तावेज की जांच या सामान्य स्पष्टीकरण), उनका निस्तारण उसी दिन कर दिया जाता है। सरल प्रशासनिक मामलों में कुछ जिलों में एक सप्ताह के भीतर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच वाले मामलों (जैसे भूमि विवाद, सीमांकन, कब्जा) में मौके का स्थलीय निरीक्षण जरूरी होता है, इसलिए इनमें ज्यादा समय — कई बार कई हफ्ते लग सकता है।
तहसील दिवस विशेष रूप से राजस्व और प्रशासनिक मामलों में प्रभावी माना जाता है। सबसे अधिक असर इन मामलों में देखा जाता है:
ऐसे मामलों में अधिकारियों को सीधे निर्देश मिलने से प्रक्रिया तेज हो सकती है, खासकर जब मामला स्थलीय निरीक्षण से जुड़ा हो — कई जिलों में देखा गया है कि अधिकारी शिकायतकर्ता और सभी पक्षों को साथ लेकर मौके पर जाकर ही निस्तारण करते हैं।
कुछ मामलों में तहसील दिवस केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम होता है, अंतिम फैसला नहीं। जैसे- दीवानी न्यायालय में लंबित भूमि विवाद, आपराधिक मुकदमे, न्यायालय के विचाराधीन मामले, निजी संपत्ति के जटिल विवाद आदि पर प्रभाव पड़ता है। इन मामलों में प्रशासन जांच या रिपोर्ट दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत या संबंधित न्यायिक प्राधिकारी ही लेते हैं।
तहसील दिवस में शिकायत देने के लिए एक साधारण प्रार्थना पत्र पर्याप्त होता है। शिकायत के साथ आधार कार्ड की प्रति, संबंधित दस्तावेज, खसरा-खतौनी (यदि भूमि मामला हो), और पुराने आदेश या नोटिस संलग्न किए जा सकते हैं। शिकायत जमा करने पर रसीद या शिकायत संख्या लेना जरूरी होता है, ताकि बाद में उसकी स्थिति की जानकारी ली जा सके।
| ❓ सवाल | ✅ जवाब |
|---|---|
| तहसील दिवस कब आयोजित होता है? | हर माह के प्रथम और तृतीय शनिवार (उत्तर प्रदेश में) |
| तहसील दिवस क्या है? | अधिकारियों की संयुक्त जनसुनवाई |
| शिकायत कौन कर सकता है? | कोई भी नागरिक |
| क्या निस्तारण की तय समय-सीमा होती है? | नहीं, यह मामले की प्रकृति और संबंधित विभाग की निर्धारित समय-सीमा पर निर्भर करता है |
| सबसे असरदार किन मामलों में? | भूमि, राजस्व, प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों में |
| शिकायत के लिए क्या चाहिए? | आवेदन पत्र और संबंधित दस्तावेज |
| कार्रवाई न होने पर क्या करें? | DM/SDM से संपर्क, CM हेल्पलाइन, जनसुनवाई पोर्टल या RTI का उपयोग |
Updated on:
03 Aug 2026 04:02 pm
Published on:
03 Aug 2026 04:02 pm
