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गट हेल्थ के लिए क्या खा रहे हैं आप? भारतीय रसोई के ये फर्मेंटेड फूड डाइट में जरूर करें शामिल

पाचन से लेकर मूड और त्वचा तक, आपकी गट हेल्थ का असर शरीर पर कई तरह से पड़ सकता है। जानिए दही, कांजी, इडली जैसे भारतीय फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करने के फायदे और इन्हें खाने का सही तरीका।
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Aug 10, 2026
gut health
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

खाने का स्वाद और सेहत दोनों साथ-साथ हो सकते हैं, खासकर जब बात गट (आंत) की सेहत की हो। भारतीय रसोई में स्वाद के साथ-साथ गट-फ्रेंडली व्यंजन भी भरपूर हैं। आइए जानते हैं कि कैसे आप स्वाद और पेट के स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ सकते हैं।

स्वाद और गट-हेल्थ का संबंध

गट हेल्थ का मतलब केवल पाचन ठीक होना नहीं है, बल्कि यह आपकी प्रतिरक्षा, मूड, त्वचा और नींद तक से जुड़ा हुआ है। फंक्शनल मेडिसिन और आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विजय मुरथी के अनुसार, आंत की सेहत हमारे पूरे शरीर की नींव है।

भारतीय रसोई में फाइबर, प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स का अच्छा मिश्रण मिलता है। जैसे, अमरूद में सॉल्यूबल और इनसॉल्यूबल फाइबर दोनों होते हैं, जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।

फर्मेंटेड व्यंजन जैसे इडली, डोसा, ढोकला, अंबली और घर के अचार में प्रोबायोटिक माइक्रोब्स होते हैं, जो गट माइक्रोबायोम को संतुलित करने में मदद करते हैं।

वैज्ञानिक समीक्षा बताती है कि फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ जीवित या मृत माइक्रोब्स और बायोएक्टिव यौगिकों के माध्यम से गट स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं, साथ ही कुछ हानिकारक तत्वों को भी कम कर सकते हैं।

भारतीय पारंपरिक फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ जैसे दही, इडली, खमीर, किण्वित सब्जियां पोषण, फाइबर, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होते हैं और प्रतिरक्षा को भी मजबूत करते हैं।

अध्ययन बताते हैं कि लैक्टोबैसिलस प्लांटेरम जैसे बैक्टीरिया, जो दही और किनेमा (एक पूर्वोत्तर भारतीय फर्मेंटेड सोया व्यंजन) में पाए जाते हैं, हानिकारक बैक्टीरिया को रोकने में सक्षम हैं।

प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक फूड्स

भारत में पारंपरिक प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी और उपयोग पर एक पैन-इंडिया अध्ययन (240 वयस्कों पर) किया गया है, जो इस विविधता को उजागर करता है।

एक अन्य सर्वेक्षण (Scientific Reports, दिसंबर 2025) ने भारतीय आबादी में प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूकता, रुझान और व्यवहार का अध्ययन किया है।

मसाले और जड़ी-बूटियां भी गट हेल्थ में सहायक होती हैं। आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध प्रणाली में मसालों का उपयोग पाचन, प्रतिरक्षा और सूजन कम करने के लिए बताया गया है।

फूड सेफ्टी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने “Healthy Gut, Healthy You” नामक एक रेसिपी बुक लॉन्च की है, जिसमें पारंपरिक फर्मेंटेड ड्रिंक्स, प्रोबायोटिक करी और चटनी शामिल हैं।

कैसे चुनें और बनाएं गट-फ्रेंडली व्यंजन

घर में दही या छाछ जैसे फर्मेंटेड डेयरी उत्पाद बनाना सबसे आसान और असरदार तरीका है। क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. त्रिशाला गोस्वामी बताती हैं कि घर का दही प्रोबायोटिक सप्लीमेंट से कहीं बेहतर होता है, और दो-तीन हफ्तों में पाचन में सुधार दिखता है।

इडली, डोसा, ढोकला, अंबली जैसे फर्मेंटेड व्यंजन रोजाना के खाने में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं।

फाइबर से भरपूर दालें, साबुत अनाज, कच्चा केला, प्याज, लहसुन और हरी पत्तेदार सब्जियां प्रीबायोटिक का काम करती हैं । ये अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देती हैं।

श्रेणीउदाहरणलाभ
फर्मेंटेड डेयरीदही, छाछप्रोबायोटिक्स, पाचन सुधार
फर्मेंटेड स्नैक्सइडली, डोसा, ढोकला, अंबलीबैक्टीरिया विविधता, पाचन में मदद
फाइबर युक्तअमरूद, साबुत अनाज, दालेंप्रीबायोटिक्स, नियमितता
मसाले/घीहल्दी, जीरा, अदरक, घीसूजन कम, पाचन सहज, गट मजबूत

अमरूद, सेब, नाशपाती जैसे फलों को पूरे रूप में खाना फाइबर के लिए बेहतर होता है। आप जूस की बजाय इनको काटकर खाएं।

घी में मौजूद ब्यूटायरेट नामक फैटी एसिड आंत की परत को मजबूत करता है - थोड़ी मात्रा में दाल, खिचड़ी या रोटी में शामिल करें।

मसाले जैसे हल्दी, जीरा, सौंफ, अदरक और पुदीना पाचन को सहज बनाते हैं और सूजन कम करते हैं - इनका प्रयोग रोजमर्रा के खाने में करें।

फर्मेंटेड व्यंजन धीरे-धीरे शुरू करें - कुछ लोगों को शुरुआत में गैस या फुलाव हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं और शरीर की प्रतिक्रिया देखें।

क्या ध्यान रखें

सिर्फ फर्मेंटेड होना ही पर्याप्त नहीं है - शुगर, शराब या अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचें। प्रोबायोटिक लेबल वाले उत्पादों में “live cultures” होना आवश्यक है।

कुछ लोगों को हिस्टामाइन या FODMAP से संवेदनशीलता हो सकती है - ऐसे में डॉक्टर या डायटिशियन से सलाह लें।

फर्मेंटेड फूड्स को विविधता के साथ नियमित रूप से शामिल करें - दूध आधारित (दही, छाछ) और फाइबर आधारित (इडली, अंबली, फलों के फर्मेंट्स) दोनों प्रकार।

गट-फ्रेंडली भारतीय फूड्स हैं लाभकारी

रसोई में स्वाद और सेहत का संगम करना आसान है। दही से शुरुआत करें, फिर धीरे-धीरे फर्मेंटेड स्नैक्स और फाइबर युक्त सब्जियां शामिल करें। मसालों और घी का संतुलित उपयोग पाचन को और बेहतर बनाएगा।

जब आप ऐसे स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं जो आपकी आंत की सेहत को भी पोषण देते हैं, तो यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक छोटा-सा स्वास्थ्य निवेश बन जाता है। यह आपको हर तरह से हैप्पी-हैप्पी महसूस कराता है।

Updated on:
10 Aug 2026 11:17 am
Published on:
10 Aug 2026 11:17 am