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भारत में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी किस विभाग में है? रेलवे, सेना, शिक्षा, पुलिस कहां कितने पद खाली?

Government Jobs in India : भारत में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरियां किस विभाग में हैं? पढ़ें रेलवे, सेना, पुलिस और शिक्षा क्षेत्र में खाली पड़े लाखों पदों का पूरा ब्योरा और भर्ती की मौजूदा स्थिति।
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Aug 04, 2026
Government Jobs in India
Government Jobs in India

भारत में सरकारी नौकरी को लेकर हमेशा से एक खास आकर्षण रहा है। स्थिरता, सम्मान और सुरक्षा के लिहाज से। पर सवाल यह उठता है कि आखिर सबसे ज्यादा सरकारी नौकरियां किस विभाग में हैं, और आज की तारीख में कहां-कहां सबसे ज्यादा पद खाली पड़े हैं? यह एक्सप्लेनर संसद में दिए गए सरकारी जवाबों, BPRD, UDISE+ और रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है।

सबसे ज्यादा सरकारी नौकरियां किस विभाग में हैं?

रैंकविभाग/संस्थाकुल कर्मचारी (लगभग)
🥇 1भारतीय सशस्त्र सेना (थल, नौ, वायु सेना)~14 लाख
🥈 2भारतीय रेलवे~12.5 लाख
🥉 3अर्धसैनिक बल (CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB आदि)~10.6 लाख
4️⃣भारतीय डाक (India Post)~4.2 लाख

यानी अकेले रक्षा और सुरक्षा से जुड़े विभाग (सेना + अर्धसैनिक बल + राज्यों की पुलिस) मिलाकर भारत में सबसे बड़ा सरकारी नियोक्ता समूह बनाते हैं। भारतीय रेलवे अकेले देश का सबसे बड़ा सिविलियन (असैनिक) नियोक्ता है, और दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में गिना जाता है।

अब बात करते हैं कि इनमें से हर बड़े विभाग में भर्ती और खाली पदों की क्या स्थिति है।

रेलवे: सबसे बड़ा सिविलियन नियोक्ता, पर लाखों पद खाली

भारतीय रेलवे में करीब 12.5 लाख कर्मचारी काम करते हैं, और यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग, ऑपरेशन, कॉमर्शियल, सिविल इंजीनियरिंग जैसे कई विभागों में बंटा हुआ है। इनमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं।

खाली पद: संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक रेलवे में 2.63 लाख गजेटेड और कैडर पद खाली पड़े हैं। रेलवे कर्मचारी यूनियनों का यह भी दावा है कि इनमें से करीब 1.7 लाख पद सीधे तौर पर सुरक्षा (सेफ्टी) से जुड़े हैं। यानी लोको पायलट, ट्रैक मेंटेनर, सिग्नल स्टाफ जैसे पद, जो ट्रेन हादसों की रोकथाम के लिहाज से अहम माने जाते हैं।

भर्ती की रफ्तार: राहत की बात यह है कि भर्ती अभियान तेज़ हुआ है। जून 2026 तक रेलवे ने 5.56 लाख से ज्यादा भर्तियां पूरी कर ली हैं, और फिलहाल 1.61 लाख गैर-राजपत्रित (नॉन-गजेटेड) पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। जिनमें असिस्टेंट लोको पायलट, टेक्नीशियन, RPF सब-इंस्पेक्टर व कांस्टेबल, जूनियर इंजीनियर जैसे पद शामिल हैं।

सेना: तीनों सेनाओं में डेढ़ लाख से ज्यादा पद खाली

भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों मिलाकर एक बड़ी तस्वीर बनाती हैं, और यहां अधिकारियों और जवानों, दोनों स्तर पर कमी है।

थल सेना (Army): जुलाई 2024 तक सेना में अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 50,538 थी, जबकि तैनात संख्या सिर्फ 42,095 यानी करीब 16.7% अधिकारियों की कमी। जवानों (JCO/NCO) के स्तर पर भी करीब 92,410 पद खाली हैं, जो करीब 8% कमी दर्शाता है। रक्षा मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया कि कुल मिलाकर सेना में एक लाख से ज्यादा जवानों-अधिकारियों की कमी है, जिसका असर सीमा पर तैनाती पर भी पड़ सकता है।

नौसेना (Navy): करीब 12,428 कर्मियों की कमी है, जिसमें अधिकारी और नाविक (sailors) दोनों शामिल हैं।

वायुसेना (Air Force): करीब 7,031 कर्मियों की कमी दर्ज की गई है, खासकर फ्लाइट लेफ्टिनेंट और स्क्वाड्रन लीडर जैसे मध्य-स्तरीय पदों पर।

भर्ती की स्थिति: मौजूदा भर्ती अग्निपथ योजना के तहत होती है, जिसमें 'अग्निवीर' के तौर पर सैनिकों की भर्ती की जाती है। हर साल थल सेना, नौसेना और वायुसेना अलग-अलग बैचों में हजारों अग्निवीरों की भर्ती करती हैं। 2026 में भी अलग-अलग चरणों में यह भर्ती जारी है। हालांकि अधिकारी स्तर की कमी को पूरा करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि युवाओं का रुझान अपेक्षाकृत बेहतर वेतन और आसान करियर विकल्पों की तरफ ज्यादा है।

पुलिस: राज्य और केंद्रीय बल दोनों में बड़ी कमी

पुलिस भारत में 'राज्य का विषय' है, यानी ज्यादातर भर्ती और स्टाफिंग राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती है, जबकि केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) केंद्र सरकार के अधीन आते हैं।

राज्यों की पुलिस: ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) के आंकड़ों के मुताबिक राज्यों की पुलिस फोर्स में 5.31 लाख से ज्यादा पद खाली हैं। सबसे ज्यादा खाली पद उत्तर प्रदेश में हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश का नंबर आता है।

केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF): यानी CRPF, BSF, CISF जैसे बल — इनमें भी करीब 1.27 लाख पद खाली हैं।

कुल मिलाकर राज्य पुलिस और केंद्रीय बल मिलाकर साढ़े छह लाख से ज्यादा पद खाली हैं। इसका सीधा असर पुलिस-जनसंख्या अनुपात पर पड़ता है। भारत में प्रति लाख जनसंख्या पर सिर्फ करीब 195 पुलिसकर्मी सैंक्शन हैं (संयुक्त राष्ट्र के 222 प्रति लाख के मानक से कम), और असल तैनाती इससे भी कम है।

भर्ती की स्थिति: राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर भर्तियां चल रही हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में 25,000+ कांस्टेबल और जेल वार्डर पद, बिहार में 65,000+ पदों की योजना, हरियाणा में 5,500 कांस्टेबल पद। ये भर्तियां लगातार जारी हैं, पर बड़े राज्यों में रिक्तियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि इन्हें पूरी तरह भरने में अभी भी वक्त लगेगा।

शिक्षा: लाखों शिक्षकों के पद खाली, राज्यों में बड़ा अंतर

शिक्षा क्षेत्र में भी स्थिति गंभीर है, हालांकि आंकड़े थोड़े जटिल हैं क्योंकि अलग-अलग स्रोत अलग-अलग स्तर (सिर्फ स्कूल बनाम स्कूल+उच्च शिक्षा) को कवर करते हैं।

कुल शिक्षक और सैंक्शन पद: UDISE+ 2024-25 डेटा के मुताबिक देशभर में करीब 96 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि सैंक्शन पदों की संख्या घटकर 55.79 लाख रह गई है (2024-25 में यह 59.24 लाख थी) यानी सैंक्शन पद खुद भी घट रहे हैं, जो तस्वीर को थोड़ा उलझा देता है।

खाली पद: शिक्षा मंत्रालय को 18 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से मिली जानकारी (सितंबर 2025) के मुताबिक स्कूली शिक्षा में 3.57 लाख शिक्षक पद खाली हैं। इनमें 2.97 लाख प्राथमिक स्तर पर, 28,019 माध्यमिक और 32,793 उच्च-माध्यमिक स्तर पर। सबसे ज्यादा खाली पद उत्तर प्रदेश (1.93 लाख) में हैं, इसके बाद मध्य प्रदेश (52,019) और कर्नाटक (38,163) का नंबर आता है। वहीं केरल, ओडिशा और नागालैंड जैसे राज्यों ने बताया कि उनके यहां सभी सैंक्शन पद भरे हुए हैं।

व्यापक स्तर पर देखा जाए (सभी राज्यों और उच्च शिक्षा को शामिल करते हुए) तो कुछ विश्लेषण करीब 9.83 लाख शिक्षक पद खाली होने की बात भी करते हैं। इसमें एकल-शिक्षक वाले स्कूल (जहां एक ही शिक्षक सभी कक्षाएं और विषय पढ़ाता है) भी शामिल हैं, जिनकी संख्या अब भी करीब 1 लाख है।

उच्च शिक्षा की स्थिति और भी खराब है: केंद्रीय विश्वविद्यालयों में करीब 28.56% सैंक्शन पद खाली हैं, और प्रोफेसर स्तर के पदों में तो 56% से ज्यादा खाली हैं। यह शोध और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है।

जानिए किस विभाग में कितने पद खाली

विभागकुल कर्मचारी (लगभग)खाली पद (लगभग)
🪖 सशस्त्र सेना (थल, वायु, नौसेना)~14 लाख~1.5 लाख+
🚆 भारतीय रेलवे~12.5 लाख~2.63 लाख
👮 राज्य पुलिस + CAPF~26 लाख (स्वीकृत पद)~6.58 लाख
🏫 स्कूली शिक्षा (शिक्षक)~96 लाख~3.57 लाख*

आखिर इतने पद खाली क्यों रहते हैं?

  • भर्ती प्रक्रिया में देरी - परीक्षा, रिजल्ट और नियुक्ति के बीच अक्सर सालों का अंतर आ जाता है
  • बजट और वित्तीय सीमाएं - खासकर राज्य सरकारों के लिए बड़ी संख्या में स्थायी पद भरना महंगा साबित होता है
  • कोर्ट केस और भर्ती रद्द होना - कई भर्तियां पेपर लीक या अनियमितता के आरोपों में अटक जाती हैं
  • कोविड काल का असर - 2020-21 में लगभग सभी बड़ी भर्तियां रुक गई थीं, जिसका असर आज भी दिख रहा है (जैसे सेना के अधिकारियों की कमी में)
  • संविदा/अस्थायी नियुक्तियां - स्थायी पद खाली रहते हुए भी अस्थायी स्टाफ से काम चलाया जाता है, जिससे सैंक्शन पद कागज़ पर खाली दिखते रहते हैं
Updated on:
04 Aug 2026 04:39 pm
Published on:
04 Aug 2026 03:59 pm