
हिमाचल में संपत्ति विवाद की गूंज अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के लिए एक चुनौती बन चुकी है। सोलन जिले में चल रहे Chester Hills-2 और Chester Hills-4 नामक गेटेड हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा यह मामला अब तक कई जांच और राजनीतिक उठापटक का विषय बन चुका है।
सोलन की उप-मंडल मजिस्ट्रेट डॉ. पूनम बंसल ने 13 नवंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में पाया कि इस परियोजना के लिए खरीदी गई जमीन कृषि योग्य होने के बावजूद गैर-कृषि व्यवसायियों को अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की गई थी। यह हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 का उल्लंघन माना गया, जो गैर-कृषि व्यवसायियों को बिना सरकार की मंजूरी के कृषि भूमि खरीदने से रोकता है।
बंसल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जमीन का वास्तविक नियंत्रण और विकास गैर-कृषि (गैर-हिमाचली) प्रवर्तकों के हाथ में था, जबकि नाम मात्र का मालिक एक किसान व्यक्ति हंस राज ठाकुर था, जो मंडी का निवासी है। रिपोर्ट ने इसे एक "शैडो डेवलपर" (Shadow Developer) मॉडल बताया, जो धारा 118 से बचने के लिए अपनाई गई थी। परियोजना का प्रचार-प्रसार M/s Chester Hills (M/s NG Estate) के नाम से किया जाता रहा है।
इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹47 करोड़ बताई गई है, और रिपोर्ट में वित्तीय विसंगतियों के चलते आयकर व वित्तीय जांच एजेंसियों से जांच की सिफारिश की गई है। हालांकि, 6 दिसंबर 2025 को तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने यह कहते हुए कि परियोजना रद्द करने से कृषि योग्य व्यक्ति को नुकसान होगा, इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और आगे की कार्रवाई रोक दी। बाद में विधानसभा में उठे सवालों और गुप्ता की देरी पर आपत्तियों के बाद राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने मामले को दोबारा खुलवाया।
शिकायतकर्ता राजीव शंडिल, जिन्होंने अगस्त 2025 में स्थानीय निवासी के तौर पर मूल शिकायत दर्ज कराई थी और अन्य पक्षों ने बाद में अपनी अपील वापस ले ली।
राजनीतिक दबाव भी बढ़ा। विपक्षी पार्टियां भाजपा और सीपीआई(एम) ने विशेष जांच दल (SIT) की मांग की, जबकि विधानसभा में यह मुद्दा कई बार उठाया गया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार मामले की गहराई से जांच करेगी और यदि कुछ गलत पाया गया तो निश्चित कार्रवाई होगी।
इस बीच, अप्रैल 2026 में हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (HP RERA) ने Chester Hills-2 और Chester Hills-4 परियोजनाओं पर 70 लाख रुपये का अंतरिम जुर्माना लगाया। दोनों परियोजनाओं पर 35-35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई परियोजनाओं में वित्तीय और नियामकीय गड़बड़ियों के कारण हुई। आरोप थे कि अलग बैंक खाते नहीं रखे गए, परियोजना-वार हिसाब-किताब नहीं रखा गया, फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और बिना जरूरी मंजूरी के निर्माण कार्य किया गया।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में लगभग 150 बीघा जमीन (व्यापक मामला करीब 275 बीघा तक फैला) और लगभग ₹300 करोड़ तक के संभावित बेनामी लेन-देन की आशंका जताई गई है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। मार्च 2026 में राज्य सरकार के निर्देश पर सोलन के उपायुक्त ने SDM की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया। यदि धारा 118 का उल्लंघन सिद्ध होता है, तो संपत्तियां सरकार के कब्जे में चली जाएंगी।
मामले ने एक और मोड़ तब लिया जब पूर्व RERA अध्यक्ष व पूर्व मुख्य सचिव श्रीकांत बालदी और (हाल ही में सेवानिवृत्त) मुख्य सचिव संजय गुप्ता के बीच सार्वजनिक विवाद छिड़ गया। गुप्ता की शिकायत पर 30 मई 2026 गुप्ता की सेवानिवृत्ति के ही दिन बालदी के खिलाफ मानहानि से जुड़ी FIR दर्ज की गई, जिसे बालदी ने "झूठा, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण" बताया। बालदी का आरोप था कि यह FIR उनके उस बयान की प्रतिक्रिया में दर्ज कराई गई जिसमें उन्होंने चेस्टर हिल्स मामले में गुप्ता के आदेशों पर सवाल उठाए थे।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सुक्खू सरकार जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों को गंभीरता से ले रही है, लेकिन जांचों की निष्पक्षता और कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल बने हुए हैं। यह मामला हिमाचल की राजनीति में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों की संवेदनशीलता को फिर से उजागर करता है। यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हुई, तो यह सरकार की जवाबदेही और कानून के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाएगा; अन्यथा यह विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक विश्वास दोनों को कमजोर कर सकता है।