
Ways to Avoid Cyber Fraud : देश में डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) और स्मार्टफोन के इस्तेमाल के साथ-साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग (National Cyber Crime Reporting) पोर्टल के अनुसार, भारत में हर रोज करीब 6 हजार लोग किसी न किसी तरह की साइबर ठगी का शिकार बनते हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Crime Coordination Center) के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में दर्ज मामलों में करीब 68.9 प्रतिशत शिकायतें UPI फ्रॉड, फिशिंग और बिना अनुमति के बैंक लेनदेन से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी की थीं।
सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका फोन कब जालसाजों के निशाने पर आ गया। राहत की बात यह है कि फोन की कुछ सेटिंग्स समय रहते बदल ली जाएं तो ठगी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं 10 जरूरी सेटिंग्स, जिन्हें हर स्मार्टफोन यूजर को तुरंत चेक करना चाहिए।
1- गूगल प्ले प्रोटेक्ट हमेशा ऑन रखें : एंड्रॉइड डेवलपर्स के लिए गूगल की आधिकारिक गाइडलाइन के मुताबिक, प्ले प्रोटेक्ट डिफॉल्ट रूप से चालू रहता है। यह फोन में इंस्टॉल हो रहे ऐप्स को लगातार स्कैन करता रहता है। बाहर से (थर्ड पार्टी सोर्स) इंस्टॉल हो रहे किसी भी नए ऐप को यह असुरक्षित पाए जाने पर ब्लॉक भी कर सकता है। इसे कभी बंद न करें।
2- अननोन सोर्सेज से ऐप इंस्टॉल न करें : गूगल के मुताबिक, अगर कोई ऐप RECEIVE SMS, READ SMS, नोटिफिकेशन-लिस्नर या एक्सेसिबिलिटी जैसी संवेदनशील परमिशन मांगता है और उसे प्ले स्टोर के बाहर से (APK फाइल के जरिए) इंस्टॉल किया जा रहा है तो प्ले प्रोटेक्ट उसे अपने आप ब्लॉक कर देता है। ऐसी परमिशन का दुरुपयोग अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी में होता है। इसलिए सेटिंग्स में जाकर 'अननोन ऐप्स इंस्टॉल' की अनुमति बंद रखें।
3- एक्सेसिबिलिटी परमिशन किसी भी अनजान ऐप को न दें : गूगल के मुताबिक, एंड्रॉइड-13 और उसके बाद के वर्जन में 'रिस्ट्रिक्टेड सेटिंग्स' फीचर दिया गया है, जिसमें बाहर से इंस्टॉल किए गए ऐप को एक्सेसिबिलिटी एक्सेस देने से पहले यूजर को इसे मैन्युअली इनेबल करना पड़ता है, क्योंकि इस परमिशन का इस्तेमाल जालसाज फोन की स्क्रीन पढ़ने और उसे रिमोटली नियंत्रित करने के लिए कर सकते हैं।
4- स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस ऐप्स से सतर्क रहें : हरियाणा पुलिस के हवाले से एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अब पारंपरिक ठगी की जगह जालसाज, OTP चोरी, सिम क्लोनिंग और रिमोट या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए किसी अनजान कॉलर के कहने पर कभी भी कोई स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें, और जरूरत न हो तो ऐसे ऐप्स फोन से हटा दें।
5- ऐप परमिशन की नियमित समीक्षा करें : फोन सेटिंग्स में जाकर देखें कि कौन-सा ऐप कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स और मैसेज तक पहुंच रखता है। गूगल का सुझाव है कि जिन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं हो रहा, उनकी परमिशन हटा दें या उन्हें अनइंस्टॉल कर दें, ताकि गैर-जरूरी डेटा एक्सेस का खतरा कम हो।
6 - कॉल फॉरवर्डिंग स्टेटस समय-समय पर चेक करें : अगर आपके नंबर पर अनजाने में कॉल फॉरवर्डिंग सेट हो गई है, तो OTP वाली कॉल किसी और के पास जा सकती है। साइबर सुरक्षा एडवाइजरी में सुझाव दिया जाता है कि यूजर समय-समय पर अपने कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग की जांच करते रहें और शक होने पर तुरंत टेलिकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें।
7- बैंकिंग और UPI ऐप्स में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन ऑन करें : 1 जून 2026 से लागू हुए नए UPI नियमों के तहत बड़े ट्रांजैक्शन के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और भुगतान से पहले प्राप्तकर्ता का नाम दिखाने जैसे फीचर अनिवार्य किए गए हैं। इसके अलावा Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे ऐप्स में बायोमेट्रिक लॉक और डेली ट्रांजैक्शन लिमिट अपनी जरूरत के हिसाब से सीमित रखनी रखें, ताकि किसी गड़बड़ी की स्थिति में नुकसान कम हो।
8- लॉक स्क्रीन पर नोटिफिकेशन कंटेंट छिपाएं : फोन का लॉक होने पर भी अगर नोटिफिकेशन में पूरा मैसेज दिख जाए, तो कोई भी OTP या बैंक अलर्ट पढ़ सकता है। सेटिंग्स में जाकर 'सेंसिटिव नोटिफिकेशन कंटेंट' को लॉक स्क्रीन पर छिपाने का विकल्प चुनें।
9- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और सेफ ब्राउजिंग ऑन रखें : ईमेल, सोशल मीडिया और क्लाउड अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें। साथ ही क्रोम ब्राउज़र की 'सेफ ब्राउजिंग' सेटिंग ऑन रखें, जो फिशिंग साइट या खतरनाक APK डाउनलोड होने पर पहले ही चेतावनी दे देती है।
10- सिम लॉक और सॉफ्टवेयर अपडेट का ध्यान रखें : सिम कार्ड पर पिन लॉक लगाएं, ताकि फोन खोने या चोरी होने पर कोई दूसरा सिम इस्तेमाल न कर सके। फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम व सिक्योरिटी पैच समय-समय पर अपडेट करते रहें, क्योंकि पुराने सॉफ्टवेयर में मौजूद खामियों का फायदा जालसाज आसानी से उठा सकते हैं।
गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 चलाता है, जो 24x7 काम करती है। यह सुविधा खासकर वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के लिए उपलब्ध है। अगर किसी के साथ यूपीआई फ्रॉड, बैंक अकाउंट से पैसे कटने, फर्जी निवेश स्कैम या ओटीपी फ्रॉड जैसी घटना होती है तो जितनी जल्दी हो सके 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ठगी की रकम आगे ट्रांसफर होने से पहले ही ब्लॉक कराई जा सके।
शिकायत जितनी जल्दी होगी, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोन की ये सेटिंग्स कोई एक बार का काम नहीं, बल्कि एक आदत होनी चाहिए। हर कुछ महीनों में ऐप परमिशन, कॉल फॉरवर्डिंग और अकाउंट सिक्योरिटी की समीक्षा जरूर करें, क्योंकि जालसाज लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं, और सतर्कता ही इससे बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।