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जयपुर के पुराने बाजारों की स्वाद यात्रा: चखें लस्सी, कचौरी और थाली के अनमोल जायके

Jaipur Famous Food: जयपुर के पुराने बाजार अपनी समृद्ध खानपान परंपरा के लिए मशहूर हैं। इस लेख में पढ़िए, चांदपोल से लेकर पुराने शहर की गलियों तक रबड़ी, लस्सी, प्याज कचौरी और राजस्थानी थाली जैसे पारंपरिक व्यंजनों की कहानी।
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Aug 02, 2026
Jaipur Food Trail
Jaipur Street Food: जयपुर के मशहूर खाने का चखें स्वाद (Image: AI)

Jaipur Street Food: चांदपोल से काठकूड़ी तक पुराने बाजारों का स्वाद एक ऐसी यात्रा है, जो जयपुर की पुरानी गलियों में बसी पाक-परंपरा और बाजारों की जीवंतता का एक साथ अनुभव कराती है। आइए, इस स्वाद-यात्रा को समझते हैं और जानते हैं कि इन गलियों में क्या विशेष है, यह अनुभव क्यों खास है और आप इसे कैसे जी सकते हैं।

चांदपोल: मसालों और मिठास की गली

चांदपोल बाजार, छोटी चौपड़ और चांदपोल गेट के बीच स्थित जयपुर का एक ऐतिहासिक बाजार है। यहां मसाले, दाल और किराने की दुकानों की भरमार है। यहां की दुकानों में ताजा मसाले पीसे जाते हैं, जिनकी खुशबू ही आपको आकर्षित कर लेती है। इसी बाजार में महावीर रबड़ी भंडार की कहानी भी जुड़ी है, जिसकी शुरुआत लगभग सौ वर्ष पहले कपूरचंद जैन (जिन्हें कपूरचंद पहलवान भी कहा जाता है) ने की थी। उन्होंने दूध के साथ प्रयोग करते हुए रबड़ी बनाई और आज यह जयपुर की पहचान बन चुकी है। चांदपोल की गलियां गुलाबी रंग की दुकानों से सजी हैं, जहां मसालों की महक, दालों की रंगत और हस्तशिल्प की सुंदरता एक साथ मिलती है। यह अनुभव आंखों और स्वाद दोनों के लिए सुखद एहसास है।

पुराने स्वाद: लस्सी, कचौरी और थाली

जयपुर के पुराने खाने के ठिकानों में लस्सी, प्याज कचौरी और राजस्थानी थाली का अपना अलग ही आनंद है।

  • एम.आई. रोड पर स्थित लस्सीवाला, 1944 से संचालित है, जहां मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी गई गाढ़ी लस्सी का स्वाद यादगार होता है।
  • स्टेशन रोड पर रावत मिष्ठान भंडार की प्याज कचौरी जयपुर की स्ट्रीट फूड संस्कृति की पहचान बन चुकी है।
  • लस्सीवाला और रावत दोनों ही सुबह जल्दी खुलते हैं और दोपहर तक बिक जाते हैं, इसलिए समय का ध्यान रखना आवश्यक है।

पुरानी गलियों का स्वाद: थाली और मिठास

पुराने शहर की गलियों में राजस्थानी थाली और मिठाइयों का अपना अलग ही आकर्षण है।

  • जोहरी बाजार में स्थित लक्ष्मी मिष्ठान भंडार (LMB), 1727 से संचालित है और यहां की गेंवर, दाल-बाटी-चूरमा और रबड़ी अत्यंत लोकप्रिय हैं।
  • पुराने शहर की गलियों में बने छोटे-छोटे ढाबों में गट्टे की सब्जी, कढ़ी, दाल-बाटी और लस्सी जैसे पारंपरिक व्यंजन मिलते हैं, जो घर जैसा स्वाद देते हैं।

चांदपोल से काठकूड़ी तक: स्वाद और संस्कृति का संगम

जहां चांदपोल मसालों और मिठास का केंद्र है, वहीं काठकूड़ी (Kathkudi) शब्द का संबंध संभवतः 'कथा' (catechu) से है, जो दक्षिण राजस्थान से आया था। काठकूड़ी बाजार स्थानीय खाद्य-संस्कृति और व्यापार से जुड़ा हुआ नाम है।

इस यात्रा में मसालों की खुशबू, रबड़ी की मिठास, लस्सी की ठंडक और थाली की विविधता, सब कुछ एक साथ मिलता है। यह भोजन एक सांस्कृतिक अनुभव है, जो पुराने बाजारों की आत्मा को सामने लाता है।

आपके लिए क्या खास है?

  • यदि आप मसालों की खुशबू का आनंद लेना चाहते हैं, तो सुबह चांदपोल जाएं।
  • लस्सीवाला और रावत की कचौरी सुबह का स्वाद हैं, जल्दी पहुंचें।
  • थाली और मिठाई के लिए LMB और पुराने ढाबे सबसे विश्वसनीय हैं।
  • काठकूड़ी जैसे नामों की खोज में, स्थानीय लोगों से पूछकर और गली-गली घूमकर आप और भी अनछुए स्वाद पा सकते हैं।
Updated on:
02 Aug 2026 03:59 pm
Published on:
02 Aug 2026 03:59 pm