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बुमराह श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर, जानिए 5 खिलाड़ियों के बारे में जिन्हें अधूरी रिकवरी में खेलना पड़ा भारी

Bumrah Injury: जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट से पूरी तरह फिट नहीं होने के कारण श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर रहेंगे। इस लेख में जानिए 5 खिलाड़ियों के उदाहरण, जिनकी चोट जल्द वापसी के बाद फिर उभर गई या प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
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Aug 02, 2026
Bumrah Injury
Bumrah Injury: इंजरी के बाद पर्याप्त रेस्ट क्यों है जरूरी? (फोटोः एआई)

Jasprit Bumrah Injury Recovery: भारत के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर रखा गया है। वजह बीसीसीआई की वह रणनीति है, जिसमें खिलाड़ी की लंबी पारी को एक सीरीज से ज्यादा अहम माना जाता है। मेडिकल टीम ने साफ किया है कि बुमराह अभी पूरी तरह फिट नहीं हैं और ऐसे में उन्हें प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में उतारना भविष्य के लिए बड़ा जोखिम हो सकता है।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर वापसी की और कुछ ही समय बाद फिर चोटिल हो गए। किसी का करियर छोटा हो गया, तो किसी का प्रदर्शन पहले जैसा कभी नहीं हो पाया। यही वजह है कि बुमराह के मामले में बीसीसीआई कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता।

आखिर बुमराह को क्यों नहीं खिलाया जा रहा?

टी20 विश्व कप के दौरान बुमराह के बाएं घुटने में परेशानी बढ़ गई थी। इसके बाद उन्हें इंजेक्शन दिया गया और रिहैबिलिटेशन शुरू कराया गया। शुरुआती उम्मीद थी कि वे श्रीलंका दौरे तक फिट हो जाएंगे, लेकिन बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हुई मेडिकल जांच के बाद विशेषज्ञों ने उन्हें और समय देने की सलाह दी।

तेज गेंदबाजों के शरीर पर सबसे ज्यादा दबाव घुटनों, पीठ और टखनों पर पड़ता है। हर गेंद डालते समय उनके पैरों पर शरीर के वजन से कई गुना अधिक दबाव आता है। अगर ऐसे खिलाड़ी पूरी तरह फिट हुए बिना लौटते हैं, तो चोट दोबारा उभरने की आशंका काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि आधुनिक क्रिकेट में मेडिकल टीम अब "रिटर्न टू प्ले" के लिए सख्त फिटनेस मानकों का पालन करती है।

जल्द वापसी क्यों पड़ सकती है भारी?

खेल चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी चोट के बाद सिर्फ दर्द खत्म होना ही पर्याप्त नहीं होता। मांसपेशियों की ताकत, जोड़ की स्थिरता, सहनशक्ति, गति और मैच जैसी परिस्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया भी जांची जाती है।

अगर खिलाड़ी पूरी तरह रिकवर हुए बिना लौटता है, तो ये खतरे रहते हैंः

  • चोट दोबारा लग सकती है।
  • दूसरी जगह भी चोट लगने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • गेंदबाजी या बल्लेबाजी की तकनीक प्रभावित होती है।
  • आत्मविश्वास कम हो सकता है।
  • करियर लंबा चलने की संभावना घट जाती है।

इसी सोच के कारण क्रिकेट बोर्ड अब बड़े खिलाड़ियों के मामले में ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं।

1. जोफ्रा आर्चर: जल्द वापसी और फिर लंबा इंतजार

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर 2021 में कोहनी की चोट से उबरकर लौटे थे, लेकिन वापसी के कुछ समय बाद ही उसी हाथ में स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या सामने आ गई। उन्हें फिर सर्जरी करानी पड़ी और लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा।

2023 में आईपीएल के दौरान भी उनकी फिटनेस चिंता का विषय बनी रही। लगातार चोटों के कारण वे कई बड़ी सीरीज और टूर्नामेंट नहीं खेल पाए।

2. शेन बॉन्ड: रफ्तार बनी सबसे बड़ी चुनौती

न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बॉन्ड दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में गिने जाते थे। पीठ की गंभीर चोटों के बाद वे कई बार मैदान पर लौटे और हर बार चोट फिर सामने आ गई।

विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार तेज गति से गेंदबाजी और पूरी तरह रिकवरी नहीं होने के कारण उनका करियर उम्मीद से काफी पहले खत्म हो गया। आज भी बॉन्ड का नाम उन खिलाड़ियों में लिया जाता है, जिनका करियर चोटों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

3. जेम्स पैटिनसन: प्रतिभा पर भारी पड़ी चोट

ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज जेम्स पैटिनसन को भविष्य का बड़ा स्टार माना जाता था। पीठ की चोट के बाद उनकी जल्द वापसी कई बार भारी पड़ी।

चोट बार-बार लौटती रही और उन्हें लंबे ब्रेक लेने पड़े। नतीजा यह रहा कि शानदार प्रतिभा होने के बावजूद वे ऑस्ट्रेलिया के लिए लगातार क्रिकेट नहीं खेल सके।

4. प्रसिद्ध कृष्णा: वापसी आसान नहीं रही

भारतीय तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण लंबे समय तक क्रिकेट से बाहर रहे। वापसी के बाद उन्हें फिर अपनी लय हासिल करने में काफी समय लगा।

हालांकि उन्होंने धीरे-धीरे फिटनेस हासिल की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर चोट के बाद पुराने प्रदर्शन तक पहुंचना आसान नहीं होता। यही वजह है कि मेडिकल टीम खिलाड़ियों को पर्याप्त समय देने पर जोर देती है।

5. हार्दिक पांड्या: बार-बार वर्कलोड मैनेजमेंट की जरूरत

हार्दिक पांड्या के करियर में पीठ और टखने की चोटें लगातार चुनौती बनी रहीं। 2019 में पीठ की सर्जरी के बाद उनकी वापसी को चरणबद्ध तरीके से किया गया। इसके बाद भी वर्कलोड पर लगातार नजर रखी गई।

2023 विश्व कप में टखने की चोट के बाद भी वे तुरंत नहीं लौटे। मेडिकल टीम ने उन्हें पूरा समय दिया, जिसके बाद ही उन्होंने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि जल्दबाजी के बजाय सही रिकवरी अधिक महत्वपूर्ण है।

रिकवरी टाइम आखिर इतना जरूरी क्यों है?

  • सूजन और दर्द को पूरी तरह नियंत्रित करना।
  • मांसपेशियों की ताकत वापस लाना।
  • गेंदबाजी या बल्लेबाजी की तकनीक का परीक्षण।
  • मैच जैसी परिस्थितियों में फिटनेस जांचना।
  • मानसिक रूप से खिलाड़ी का आत्मविश्वास लौटाना।

बुमराह के मामले में बीसीसीआई की रणनीति क्या बताती है?

भारतीय क्रिकेट टीम अगले महीनों में कई महत्वपूर्ण टेस्ट और सीमित ओवरों की सीरीज खेलने वाली है। ऐसे में टीम प्रबंधन नहीं चाहता कि बुमराह एक सीरीज खेलने के लिए जोखिम लें और फिर कई महीनों के लिए बाहर हो जाएं।

बीसीसीआइ का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट और वैज्ञानिक फिटनेस मॉडल पर लगातार काम कर रहा है। मोहम्मद शमी, ऋषभ पंत और कई अन्य खिलाड़ियों की वापसी भी चरणबद्ध तरीके से कराई गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ी की लंबी उपलब्धता किसी एक मैच या एक सीरीज से कहीं ज्यादा जरूरी है।

Updated on:
02 Aug 2026 07:15 pm
Published on:
02 Aug 2026 07:15 pm