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15 अगस्त पर झारखंड में 26 कैदियों की आजादी और ‘ओपन जेल’ प्लान, जानिए क्यों है खास?

झारखंड सरकार ने 15 अगस्त 2026 तक 26 आजीवन कारावास के कैदियों की रिहाई पर सहमति जताई है। साथ ही राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। जानिए इस फैसले का पूरा महत्व।
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Jul 31, 2026
15 august jharkhand open jail
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

झारखंड में हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्य सरकार ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे 79 कैदियों के मामलों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में यह बैठक 30 जुलाई 2026 को हुई। इसमें 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी, जिन्हें 15 अगस्त 2026 तक रिहा किया जा सकता है।

बैठक में राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद द्वारा अनुशंसित 37 नए मामलों और पिछली बैठकों में अस्वीकृत 42 मामलों पर भी विचार किया गया। अधिकारियों ने पात्रता की शर्तें, बंदियों का आचरण, कारावास की अवधि, कानूनी प्रावधान, न्यायालयों की टिप्पणियां, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक और प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट सहित सभी पहलुओं की बिंदुवार समीक्षा की। इसके बाद 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।

न्याय व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार न्याय व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक दृष्टिकोण को समान महत्व दे रही है। उन्होंने जेल से रिहा होने वाले बंदियों के पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, मानसिक रूप से बीमार बंदियों का डाटाबेस तैयार करने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का भी निर्देश दिया गया।

ओपन जेल खोलने की दिशा में भी कदम उठाए- CM

ओपन जेल खोलने की दिशा में भी कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने के लिए भूमि चिह्नित करने और प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया। ओपन जेल में कैदियों को परिवार के साथ रहने, सुबह रोजगार के लिए बाहर जाने और शाम को लौटने की व्यवस्था होगी। हजारीबाग सेंट्रल जेल में इस तरह की व्यवस्था शुरू की जाएगी, हालांकि अभी भूमि उपलब्ध नहीं है; भूमि मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू होगा।

यह निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। एक ओर यह सरकार की सुधारवादी नीति और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है; दूसरी ओर, यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में लिया गया कदम भी है।

15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर रिहाई का समय चुनना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

जमीनी हकीकत यह है कि जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में यह एक सकारात्मक संकेत है। ओपन जेल की अवधारणा, जहां कैदी परिवार के साथ रहकर समाज में धीरे-धीरे लौटने की तैयारी कर सकते हैं, व्यवहार में बदलाव और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती है। लेकिन यह तभी सफल होगी जब भूमि उपलब्ध हो, निर्माण समय पर हो और रिहा होने वाले कैदियों को रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए।

रिहा होने वाले कैदियों की निगरानी

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कदम सरकार की संवेदनशीलता और सुधारवादी छवि को मजबूत करता है। लेकिन विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था पर असर डालने वाला कदम भी मान सकता है। इसलिए, सरकार को इस निर्णय की पारदर्शिता बनाए रखनी होगी और रिहा होने वाले कैदियों की निगरानी, पुनर्वास और सामाजिक समावेशन की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से लागू करना होगा।

जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले, 15 अगस्त तक 26 कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी होगी। उसके बाद, ओपन जेल के लिए भूमि का चयन और प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही, मानसिक रूप से बीमार बंदियों का डाटाबेस तैयार करने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की दिशा में भी कार्य आगे बढ़ेगा।

यह कदम झारखंड में जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकता है—यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए।

Updated on:
31 Jul 2026 11:23 am
Published on:
31 Jul 2026 11:23 am