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J&K बैंक के 1.54 लाख खातों में PAN क्यों नहीं? क्या आपका अकाउंट पैन लिंक्ड है? जानें क्यों है ये जरूरी

जम्मू-कश्मीर बैंक में 1.54 लाख खातों में PAN लिंक न होने से टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बैंक अकाउंट्स की पैन लिकिंग क्यों की जाती है? इसके साथ ही यह भी जानते हैं कि किन खातों में पैन लिकिंग की जरूरत नहीं होती है।
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Jul 31, 2026
Pan Card
JK Bank में 1.54 खाते पैन से लिंक्ड नहीं पाए गए। ( Photo : ChatGpt)

जम्मू-कश्मीर बैंक (J&K Bank) में लगभग 1.54 लाख खातों में PAN (स्थायी खाता संख्या) लिंक न होने का मामला सामने आया है। यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और बैंकिंग नियमों की अवहेलना से जुड़ा गंभीर संकेत है। आइए समझते हैं कि यह मामला क्या है, PAN लिंकिंग क्यों आवश्यक है, और किन खातों में PAN अनिवार्य नहीं होता।

4.88 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन

मामले की तह में जाएं तो फरवरी 2025 की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि J&K Bank में लगभग 1.54 लाख खाते PAN से लिंक नहीं थे, जबकि खाताधारकों के पास PAN कार्ड उपलब्ध था। इन खातों में वित्तीय वर्ष 2021‑22 से 2023‑24 के बीच लगभग 4.88 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन दर्ज हुए, जिनमें से 10,464 निजी गैर‑PAN खातों में अकेले 9,649 करोड़ रुपये का क्रेडिट था। यह स्थिति KYC (Know Your Customer) नियमों की अवहेलना और संभावित गड़बड़ी की ओर संकेत करती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन खातों का उपयोग टैक्स बचाने, फॉर्म‑60 के माध्यम से नियमों को दरकिनार करने और बैंक व कुछ व्यक्तियों के बीच गुप्त गठजोड़ के लिए किया जा सकता है। यह रिपोर्ट RBI सहित अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजी गई थी।

PAN लिंकिंग क्यों है जरूरी?

PAN लिंकिंग का मुख्य उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। जब बैंक खाता PAN से जुड़ा होता है, तो:

  • बड़े लेन-देन पर निगरानी आसान हो जाती है।
  • टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगती है।
  • आयकर विभाग को खाताधारक की आय और लेन-देन का मिलान करने में सहायता मिलती है।

PAN न होने पर बैंक खाते फॉर्म‑60 के आधार पर खोले जा सकते हैं, जो केवल एक घोषणा है और PAN का विकल्प नहीं हो सकता। इससे बड़े लेन-देन छिपाए जा सकते हैं और नियमों की अवहेलना हो सकती है।

किन खातों में PAN अनिवार्य नहीं होता?

  • जब खाताधारक फॉर्म‑60 भरता है, जो PAN न होने पर वैकल्पिक दस्तावेज़ होता है।
  • कुछ छोटे या न्यूनतम लेन-देन वाले खातों में PAN अनिवार्य नहीं होता, लेकिन बड़े लेन-देन के लिए यह आवश्यक हो जाता है।
  • SEBI के नियमों के अनुसार, डिमैट खाते (शेयर बाजार से जुड़े) में PAN अनिवार्य है; PAN न होने पर खाते को फ्रीज़ किया जा सकता है।

लेकिन J&K Bank के मामले में फॉर्म‑60 का उपयोग नियमों को दरकिनार करने के लिए किया गया प्रतीत होता है, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी संभव हुई।

इस पूरे मामले का यूजर्स के लिए क्या अर्थ है?

यह केवल J&K Bank की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग सिस्टम में PAN लिंकिंग की अनदेखी का संकेत है। यदि आपका PAN आपके बैंक खाते से लिंक नहीं है, तो:

  • बड़े लेन-देन पर रोक लग सकती है।
  • टैक्स विभाग से रिफंड या अन्य सेवाओं में देरी हो सकती है।
  • बैंकिंग सेवाओं में बाधा आ सकती है।

आपका अगला कदम क्या होना चाहिए?

बैंक और नियामक संस्थाओं को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए। खाताधारकों को अपने PAN को तुरंत बैंक खाते से लिंक कराना चाहिए। RBI और आयकर विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि PAN लिंकिंग की प्रक्रिया सरल, स्पष्ट और सभी खातों पर लागू हो।

यह मामला हमें याद दिलाता है कि वित्तीय नियमों का पालन न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और पारदर्शिता की नींव भी है। यदि आप अपनी PAN लिंकिंग की स्थिति जानना चाहते हैं, तो अपने बैंक शाखा या नेट बैंकिंग पोर्टल पर जाकर तुरंत जांचें और यदि लिंक नहीं है, तो उसे शीघ्र पूरा करें।

Updated on:
31 Jul 2026 01:33 pm
Published on:
31 Jul 2026 01:33 pm