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मानसून में आंखें हो रही हैं लाल? जानिए कौन-सा संक्रमण है, कब खतरा बढ़ता है और कैसे करें बचाव?

बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है। वहीं, आंखों के संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है। इस लेख में जानिए, मानसून में आंखों के संक्रमण क्यों बढ़ते हैं, किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है और बचाव कैसे करें?
4 min read
Aug 03, 2026
Monsoon Eye Infection
मानसून में आखों की सुरक्षा कैसे करें? (फोटोः एआई)

Monsoon Eye Infection: बारिश का मौसम हर किसी को पसंद होता है, लेकिन यही मौसम आंखों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। हर साल मानसून के दौरान अस्पतालों और नेत्र विशेषज्ञों के पास आंखों में लालपन, खुजली, पानी आना और चिपचिपे डिस्चार्ज जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। कई लोग इसे सामान्य आई फ्लू समझकर घरेलू इलाज करने लगते हैं, जबकि कई मामलों में यह किसी गंभीर संक्रमण की शुरुआत भी हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। यह नमी वायरस, बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। इसके अलावा गंदे हाथों से आंखों को बार-बार छूना, दूषित पानी, साझा तौलिया और खराब साफ-सफाई संक्रमण के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं।

आखिर मानसून में आंखों का संक्रमण क्यों बढ़ जाता है?

बारिश के मौसम में हवा में नमी अधिक रहती है। इससे सूक्ष्म जीव लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति आंखों को छूने के बाद किसी वस्तु को छूता है और दूसरा व्यक्ति उसी वस्तु के संपर्क में आने के बाद अपनी आंखों को छू ले, तो संक्रमण फैल सकता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बारिश का पानी अपने आप संक्रमण का कारण नहीं बनता, लेकिन यदि उसमें प्रदूषण, धूल, गंदगी या संक्रमित कण मौजूद हों, तो आंखों में परेशानी हो सकती है।

मानसून में होने वाले 5 बड़े आंखों के संक्रमण

1. कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू)

यह सबसे सामान्य संक्रमण है। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं, पानी आता है और कभी-कभी चिपचिपा पदार्थ भी निकलता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस तेजी से फैल सकता है।

2. स्टाई (गुहेरी)

पलकों के किनारे छोटी दर्दनाक गांठ बन जाती है। यह बैक्टीरिया के कारण होती है और साफ-सफाई की कमी से इसका खतरा बढ़ जाता है।

3. केराटाइटिस

कॉर्निया में संक्रमण होने पर तेज दर्द, धुंधला दिखना और रोशनी से परेशानी हो सकती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर दृष्टि प्रभावित हो सकती है।

4. ब्लेफेराइटिस

इसमें पलकों के किनारे सूज जाते हैं और खुजली या जलन महसूस होती है। यह लंबे समय तक बनी रह सकती है।

5. फंगल आंखों का संक्रमण

मानसून में फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर तब जब आंख में मिट्टी, पौधों या दूषित पानी का संपर्क हुआ हो।

शुरुआती लक्षण जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें

  • आंख लाल होना
  • लगातार पानी आना
  • खुजली या जलन
  • आंख से पीला या सफेद डिस्चार्ज निकलना
  • पलकों का चिपक जाना
  • धुंधला दिखाई देना
  • तेज रोशनी से परेशानी
  • आंख में दर्द

यदि इनमें से कोई भी लक्षण लगातार बने रहें तो स्वयं दवा लेने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

  • छोटे बच्चे
  • स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले
  • बुजुर्ग
  • मधुमेह या कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
  • भीड़भाड़ वाले स्थानों पर काम करने वाले लोग

संक्रमण और एलर्जी में क्या अंतर है?

  • कई बार लोग एलर्जी को भी आई फ्लू समझ लेते हैं।
  • यदि दोनों आंखों में तेज खुजली हो और पानी आए लेकिन संक्रमण जैसा डिस्चार्ज न हो तो यह एलर्जी हो सकती है।
  • वहीं यदि आंखें लाल हों, चिपचिपा पदार्थ निकले, सूजन हो और परिवार के अन्य लोगों में भी ऐसे लक्षण दिखने लगें तो संक्रमण की संभावना अधिक होती है।

क्या बारिश का पानी सीधे संक्रमण फैलाता है?

यह एक आम धारणा है कि बारिश का पानी आंखों का संक्रमण फैलाता है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल बारिश का पानी जिम्मेदार नहीं होता। असली खतरा दूषित पानी, गंदे हाथ, संक्रमित सतहों और खराब स्वच्छता से होता है। इसलिए बारिश में भीगने के बाद आंखों को साफ पानी से धोना और साफ कपड़े से पोंछना बेहतर माना जाता है।

घर पर क्या करें और क्या बिल्कुल न करें?

  • दिन में कई बार हाथ धोएं।
  • आंखों को साफ पानी से धोएं।
  • अपना अलग तौलिया और रूमाल इस्तेमाल करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई आई ड्रॉप ही इस्तेमाल करें।

क्या न करें

  • आंखों को बार-बार न मलें।
  • बिना सलाह के स्टेरॉयड आई ड्रॉप न डालें।
  • किसी दूसरे व्यक्ति की आई ड्रॉप इस्तेमाल न करें।
  • संक्रमण होने पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से बचें।
  • आंखों का मेकअप साझा न करें।

डॉक्टर के पास कब तुरंत जाना चाहिए?

यदि आंखों में तेज दर्द हो, धुंधला दिखाई देने लगे, रोशनी से परेशानी हो, आंख से अधिक मात्रा में पस निकले या दो से तीन दिन में आराम न मिले तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। देर करने से संक्रमण गंभीर हो सकता है।

बच्चों के लिए विशेष सावधानी

बच्चों में संक्रमण तेजी से फैल सकता है क्योंकि वे बार-बार आंखों को छूते हैं। वहीं कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को मानसून में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गंदे लेंस या लेंस केस संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार आंखों का संक्रमण सामान्य दिख सकता है, लेकिन हर लाल आंख आई फ्लू नहीं होती। कई बार इसके पीछे बैक्टीरियल, फंगल या कॉर्निया से जुड़ी गंभीर समस्या भी हो सकती है। इसलिए बिना जांच के दवा लेना नुकसान पहुंचा सकता है।

7 बड़ी गलतियां जो संक्रमण बढ़ा सकती हैं

  • आंखों को बार-बार मलना
  • तौलिया साझा करना
  • बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना
  • कॉन्टैक्ट लेंस साफ न रखना
  • आंखों का मेकअप साझा करना
  • गंदे हाथों से आंख छूना
  • लक्षण होने पर भी इलाज में देरी करना
Updated on:
03 Aug 2026 09:25 pm
Published on:
03 Aug 2026 09:24 pm