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Ai Robots: सिर पर मोबाइल बांधकर रिकॉर्ड हो रहे घरेलू काम, महिलाओं के लिए कमाई का नया जरिया या भविष्य की चुनौती?

क्या आपने सोचा है कि आपके रोजमर्रा के काम अब एआई रोबोट्स को सिखाने का साधन बन सकते हैं? जानिए कैसे महिलाएं अपने घर के कामों को रिकॉर्ड करके पैसे कमा रही हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 03, 2026

AI Robot Training Jobs

घरेलू काम को रिकॉर्ड कर पैसे कमा रहीं महिलाएं। (फोटोः एआई)

एक आम घर की रोजमर्रा की गतिविधियां अब AI (Artificial Intelligence) रोबोट्स को सिखाने का माध्यम बन रही हैं। इसके लिए महिलाएं सिर पर स्मार्टफोन बांधकर वीडियो रिकॉर्ड कर रही हैं। इस नए ट्रेंड ने कमाई के नए रास्ते तो खोले हैं, लेकिन रोजगार, नैतिकता और तकनीकी भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे होती है कमाई?

25 वर्षीय एक गृहिणी चेन्नई से हैं, जो अपने घर के कामों जैसे कॉफी बनाना, फल काटना, कपड़े तह करना आदि को सिर पर लगे स्मार्टफोन से रिकॉर्ड करती हैं। इसके लिए उन्हें प्रति घंटे लगभग ₹250 की कमाई होती है। वे दिन में 90 से अधिक छोटे वीडियो क्लिप रिकॉर्ड करती हैं, ताकि एआई कंपनियों को विविध कोणों (Different Angles) और परिस्थितियों में डेटा मिल सके।

रोबोट्स कैसे सीखते हैं?

ये वीडियो एआई कंपनियों को भेजे जाते हैं, जो इन्हें ह्यूमनॉइड रोबोट्स को प्रशिक्षित करने में इस्तेमाल करती हैं। इन क्लिप्स से रोबोट सीखते हैं कि इंसान कैसे वस्तुएं पकड़ता है, कैसे झुकता है, और विभिन्न घरेलू काम कैसे करता है। इस प्रक्रिया को “embodied AI” या “physical AI” कहा जाता है। यानी ऐसे एआई सिस्टम जो डिजिटल होने के साथ वास्तविक दुनिया में भी काम कर सकें। भारत में यह कार्य बड़े पैमाने पर हो रहा है। चेन्नई के अलावा कई छोटे कस्बों और गांवों में महिलाएं और अन्य श्रमिक भी इस काम को कर रहे हैं।

कुछ कंपनियां, जैसे Objectways (बेंगलुरु), इस डेटा को पेशेवर तरीके से एकत्रित कर रही हैं। इससे हजारों लोग जुड़े हैं, जो वीडियो, मोशन-सेंसर डेटा आदि भेजते हैं। इस डेटा की मांग इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि रोबोट्स को असली दुनिया की जटिलताओं को समझने के लिए अलग-अलग तरह के और वास्तविक वीडियो की जरूरत होती है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस काम को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस भी हो रही है। कुछ लोग इसे “हम अपनी ही जगह रोबोट्स को तैयार कर रहे हैं” जैसा बता रहे हैं, यानी हम अपने प्रतिस्थापन (Replacement) की ट्रेनिंग कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “हम अपनी ही कब्र खोद रहे हैं।” कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह भविष्य में रोजगार के अवसरों को प्रभावित करेगा।

दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों ने इस काम को महिलाओं के लिए एक लचीला और घर से जुड़ा हुआ आय का स्रोत बताया है, जो पारंपरिक नौकरियों से दूर रहकर काम करना चाहती हैं। यह कार्य घर के कामों के साथ आसानी से मेल खा जाता है, और इसमें यात्रा या कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होती।

गोपनीयता पर उठे सवाल

इस काम को लेकर गोपनीयता और नैतिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि बेंगलुरु की स्टार्टअप Pronto घरेलू सेवाओं के दौरान वीडियो रिकॉर्ड कर रही है और यह डेटा “physical AI labs” को भेजा जा रहा है। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से वैकल्पिक है और ग्राहक की सहमति के बाद ही रिकॉर्डिंग होती है।

यह कहानी बताती है कि कैसे तकनीक ने रोजमर्रा के कामों को भी डेटा में बदल दिया है और कैसे यह डेटा भविष्य के रोबोट्स को आकार दे रहा है। इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या हम अपनी ही जगह मशीनों को तैयार कर रहे हैं और क्या यह हमें भविष्य में बेरोजगार बना सकता है?

इस काम में शामिल लोगों को इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में जानकारी होना चाहिए और उन्हें उचित पारिश्रमिक तथा सुरक्षा मिलना चाहिए। साथ ही, यह आवश्यक है कि इस तरह के डेटा-आधारित कार्यों के लिए नैतिक दिशा-निर्देश और गोपनीयता नियम बनाए जाएं, ताकि तकनीक और मानव दोनों के हित सुरक्षित रहें।