Patrika+

मेडिकल रीइंबर्समेंट पर टैक्स के नए नियम: जानें क्या है सही प्रक्रिया

क्या आपने नए टैक्स नियमों की उलटफेर से अपनी मेडिकल रीइंबर्समेंट की संभावनाएं खो दी हैं? यह लेख आपको मेडिकल रीइंबर्समेंट के नए टैक्स नियमों को समझने और अपनी टैक्स बचत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद करेगा।
2 min read
Aug 12, 2026
medical reimbursement rules
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

नए टैक्स नियमों के तहत अब मेडिकल रीइंबर्समेंट की प्रक्रिया में बदलाव हुआ है। पहले कर्मचारियों को मेडिकल खर्च के बिल दिखाकर टैक्स-फ्री रीइंबर्समेंट मिलता था, लेकिन अब यह सुविधा सीमित हो गई है। इसके बजाय, कुछ विशेष परिस्थितियों में ही छूट मिलती है और यह पूरी तरह नए टैक्स ढांचे पर निर्भर करता है। मेडिकल रीइंबर्समेंट अब सामान्यतः टैक्स योग्य परिक्विजिट माना जाता है। इसका मतलब है कि यह आपकी सैलरी का हिस्सा बनकर टैक्स में शामिल हो जाता है। हालांकि, कुछ विशेष मामलों में यह टैक्स-फ्री हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका इलाज किसी ऐसे अस्पताल में हुआ है, जो नियोक्ता द्वारा संचालित है या सरकारी/स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चलाया जाता है या वह अस्पताल आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त द्वारा अनुमोदित है और नियम 3A में वर्णित शर्तें पूरी करता है, तो यह टैक्स-फ्री माना जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, यदि इलाज किसी विशेष बीमारी (जैसे कैंसर, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां आदि) के लिए अनुमोदित अस्पताल में हुआ है, तो भी टैक्स-फ्री सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए भी अस्पताल को नियम 3A और नियम 18 में वर्णित मानकों को पूरा करना होगा। विदेश में इलाज या यात्रा की स्थिति में भी कुछ छूट मिलती है, लेकिन यह केवल उस सीमा तक मान्य है, जो RBI द्वारा निर्धारित की गई हो। इसके साथ ही यात्रा खर्च तभी टैक्स-फ्री माना जाता है, जब कर्मचारी की कुल आय उस निर्धारित सीमा से कम हो।

सेक्शन 80DDB के तहत टैक्स कटौती

सेक्शन 80DDB की यह एक महत्वपूर्ण टैक्स कटौती है, जो विशेष बीमारियों के इलाज पर लागू होती है। यदि आपने या आपके आश्रित ने ऐसी बीमारी का इलाज कराया है, तो आप वास्तविक खर्च या 40,000 रुपये (जो भी कम हो) तक की कटौती क्लेम कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 1,00,000 रुपये है। ध्यान दें कि यदि आपको इलाज के लिए बीमा कंपनी या नियोक्ता से कोई रीइंबर्समेंट मिला है, तो उस राशि को इस कटौती से घटा दिया जाएगा।

नए नियमों का असर

यदि आप पुराने टैक्स ढांचे (ओल्ड रेजीम) में हैं, तो सेक्शन 80DDB के तहत छूट मिल सकती है। लेकिन नए टैक्स ढांचे (न्यू रेजीम) में यह कटौती उपलब्ध नहीं है। नए ढांचे में कई कटौतियां जैसे 80D, 80DD, 80DDB आदि शामिल नहीं हैं। इसका अर्थ यह है कि यदि आप नए टैक्स ढांचे में हैं, तो मेडिकल रीइंबर्समेंट के बिल दिखाकर छूट पाने की संभावना बहुत कम है। वहीं, पुराने रेजीम में रहकर आप सेक्शन 80DDB जैसी कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं।

आपके लिए व्यावहारिक कदम

  1. अपने टैक्स रेजीम (पुराना या नया) की पुष्टि करें।
  2. यदि आप पुराने रेजीम में हैं और किसी विशेष बीमारी का इलाज हुआ है, तो इलाज के बिल और डॉक्टर की पर्ची संभालकर रखें। 80DDB के तहत कटौती क्लेम करने के लिए यह आवश्यक है।
  3. यदि इलाज अनुमोदित अस्पताल में हुआ है, तो रीइंबर्समेंट टैक्स-फ्री हो सकता है। इसकी पुष्टि नियोक्ता से करें।
  4. विदेश में इलाज या यात्रा के मामले में, RBI की सीमा और आपकी कुल आय की स्थिति जानें, ताकि टैक्स-फ्री लाभ मिल सके।

(डिस्क्लेमर: यह लेख आपको मेडिकल रीइंबर्समेंट के नए टैक्स नियमों को समझने और अपनी टैक्स बचत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद करेगा। अपने टैक्स कंसल्टेंट या CA से मिलकर यह तय करें कि कौन सा टैक्स रेजीम आपके लिए अधिक लाभकारी रहेगा)

Updated on:
12 Aug 2026 09:03 pm
Published on:
12 Aug 2026 09:03 pm