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पुरानी दिल्ली की गलियों में रात का सफर: जहां छुपा है स्वाद का जादू! क्या आप तैयार हैं?

पुरानी दिल्ली की गलियों में छुपा है स्वाद, इतिहास और संस्कृति का अनोखा संगम। जानिए चांदनी चौक, परांठे वाली गली, खारी बावली, नटराज दही भल्ला और जामा मस्जिद के आसपास की मशहूर फूड स्ट्रीट्स, घूमने का सही समय और जरूरी ट्रैवल टिप्स।
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Jul 28, 2026
Old Delhi Food, Chandni Chowk Food, Paranthe Wali Gali,
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

पुरानी दिल्ली की गलियों में छुपा है स्वाद का शहर। जिसकी कहानियां सुनते ही एक रहस्यमयी और स्वाद भरी दुनिया सामने आ जाती है। अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और स्वाद के सफर पर जाने की सोच रहे हैं तो चलिए एक यात्रा पर निकलते हैं-

पुरानी दिल्ली का खाना और बाजार: एक जीवंत विरासत

पुरानी दिल्ली, खासकर चांदनी चौक और आसपास की गलियां, सदियों से स्वाद और व्यापार का केंद्र रही हैं। यहां के बाजारों में मसालों की खुशबू, मिठाइयों की मिठास और पराठों की खुशबू हर कदम पर मिलती है।

खारी बावली, एशिया का सबसे बड़ा मसाला थोक बाजार, 17वीं सदी से मसालों, सूखे मेवों और चाय के लिए जाना जाता है।

चांदनी चौक में परांठे वाली गली 150 साल से भी पुरानी है- यहां के परांठे घी में तले जाते हैं और पारंपरिक स्टफिंग जैसे आलू, पनीर, दाल से लेकर सूखे मेवे और रबड़ी तक मिलते हैं।

साथ ही, नत्राज दही भल्ला (1940 से) और ओल्ड फेमस जलेबी वाला (1884 से) जैसे प्रतिष्ठित स्टॉल आज भी अपनी विरासत बनाए हुए हैं।

पुरानी दिल्ली के कई बाजारों में शाम या रात के समय एक अलग, रहस्यमयी माहौल जरूर होता है - खासकर जब रोशनी कम हो और गलियां सुनसान लगने लगें। पर खाने की महक के आगे ये सबकुछ दिखता नहीं है।

पुरानी दिल्ली की गलियों में रात का अनुभव

शाम होते ही चांदनी चौक की गलियां कुछ शांत हो जाती हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में जैसे जामा मस्जिद के पास की गलियां, अल जवाहर जैसे कबाब वाले स्टॉल्स के साथ जीवंत रहती हैं।

खरी बावली के आसपास की गलियों में सुबह से दोपहर तक मसालों की खुशबू और हलचल रहती है। यहां का माहौल दिन में जीवंत और रात में शांत हो सकता है।

कैसे करें ‘स्वाद के बाजार’ का सफर

यहां कुछ सुझाव हैं, जो आपको पुरानी दिल्ली की रहस्यमयी गलियों और स्वादों की खोज में मदद करेंगे:

  1. सही समय चुनें • सुबह 9–11 बजे: परांठे वाली गली और मसालों की गलियाँ खुली और जीवंत होती हैं।• शाम 6–9 बजे: जामा मस्जिद के पास कबाब और मटन स्टॉल्स का माहौल खास होता है।• रात 10 बजे के बाद: गलियाँ सुनसान हो सकती हैं—यह वह समय है जब ‘भूतिया’ एहसास गहराता है।
  2. मार्ग और स्थान
  • परांठे वाली गली (चांदनी चौक से): पारंपरिक परांठों का स्वाद लें।• नत्राज दही भल्ला और ओल्ड फेमस जलेबी वाला: मीठे का आनंद लें।• जामा मस्जिद के पास अल जवाहर: मटन और कबाब का स्वादिष्ट अनुभव।• खारी बावली: मसालों की खुशबू और थोक बाजार का अनुभव।
  1. अनुभव को सुरक्षित और सुखद बनाएं
  • साथ में जाएं—रात में अकेले घूमना जोखिम भरा हो सकता है।• हल्की रोशनी वाले रास्तों और भीड़ वाले हिस्सों में रहें।• स्थानीय लोगों से मार्ग पूछें—वे अक्सर सबसे सुरक्षित और दिलचस्प रास्ते जानते हैं।
  1. स्वाद और कहानी का संगम• परांठे वाली गली में परांठे बनते देखना और खाना एक अनुभव है—यहाँ की गंध, धुआँ और स्वाद सब मिलकर एक कहानी कहते हैं।• मसालों की गलियों में चाय पीते हुए, चारों ओर फैली खुशबू और हलचल आपको इतिहास में ले जाती है।

पुरानी दिल्ली की गलियों में शाम और रात के समय जो माहौल बनता है - वह एक अलग, रहस्यमयी अनुभव जरूर देता है। यह अनुभव स्वाद, इतिहास और रहस्य का संगम है। अगर आप पुरानी दिल्ली की गलियों में चलें, सही समय और साथी के साथ, तो यह यात्रा सिर्फ खाने की नहीं - एक यादगार कहानी बन जाएगी।

Updated on:
28 Jul 2026 06:07 pm
Published on:
28 Jul 2026 06:07 pm