
शहर में सीवर की समस्या आम है, विशेषकर मानसून में जलभराव, बदबू और सड़कों पर गंदगी फैलने की समस्या बढ़ जाती है। लेकिन अब नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने और समाधान पाने के नए, डिजिटल रास्ते उपलब्ध हो गए हैं। आइए जानते हैं कि कौन-कौन से विकल्प हैं और आप क्या कर सकते हैं?
शहर में सीवर की समस्या से निजात पाने के लिए अब शिकायत दर्ज कराने के कई डिजिटल रास्ते उपलब्ध हैं। चाहे वह केंद्र सरकार का पोर्टल हो, राज्य का जनसुनवाई सिस्टम हो या स्मार्ट सिटी ऐप्स। शिकायत दर्ज करें, ट्रैक करें और समय पर समाधान की मांग करें। यदि आप स्वयं जागरूक होकर शिकायत दर्ज करेंगे और ट्रैक करेंगे, तो विभागों की जवाबदेही बढ़ेगी और समस्या का समाधान भी तेज होगा।
सरकारी स्तर पर कई शहरों में शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, भारत सरकार का एक सेवा पोर्टल है, जहाँ आप सीवर ब्लॉक या ओवरफ्लो की शिकायत 24×7 ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं और एक शिकायत ID प्राप्त होती है, जिसे मोबाइल पर ट्रैक भी किया जा सकता है। इसके अलावा, उत्तराखंड जल संस्थान की वेबसाइट पर भी पेयजल और सीवर संबंधी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज की जा सकती हैं। इसके साथ ही टोल-फ्री नंबर 1800‑180‑4100 या 1916 पर कॉल करके भी शिकायत की जा सकती है। राजस्थान सरकार का 'जनसुनवाई‑समाधान' पोर्टल भी एक समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली है, जहां शिकायत दर्ज करने, ट्रैक करने और अनुस्मारक भेजने की सुविधा उपलब्ध है।
कुछ शहरों ने नागरिक शिकायतों के निवारण के लिए स्मार्ट ऐप्स भी लॉन्च की है। उदाहरण के लिए, गुरुग्राम नगर निगम ने मई 2026 से एक 'सुपर ऐप' शुरू किया है, जिससे सड़क, पानी, सीवर और कचरे जैसी शिकायतें घर बैठे दर्ज की जा सकती हैं। यह ऐप शिकायत को संबंधित विभाग तक पहुंचाता है और 24 घंटे के भीतर समाधान का वादा करता है। इसमें AI चैटबॉट और ड्रोन सर्वे से जुड़ा डेटा भी शामिल है।
दिल्ली में 'e‑NIVARAN' नामक एक प्लेटफॉर्म है, जहां शिकायतें दर्ज करने, ट्रैक करने और समाधान की स्थिति जानने की सुविधा उपलब्ध है। यह सिस्टम नागरिकों को रीयल‑टाइम अपडेट देता है और विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करता है। स्वच्छता मिशन के तहत ‘स्वच्छता ऐप’ भी है, जिससे नागरिक फोटो और लोकेशन के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह सीधे नगर निगम तक पहुंचती है और शिकायत की स्थिति पर नियमित अपडेट मिलता है।
इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करना आसान है। सबसे पहले ऐप या पोर्टल पर जाकर समस्या का विवरण और फोटो अपलोड करें। लोकेशन जोड़ें, शिकायत सबमिट करें और प्राप्त होने वाली शिकायत आईडी को संभालकर रखें। इसके बाद, SMS या ईमेल के जरिए मिलने वाले स्टेटस अपडेट देखें। यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो पोर्टल पर अनुस्मारक भेजें या हेल्पडेस्क से संपर्क करें। कुछ शहरों में शिकायतों का औसत समाधान समय भी बताया जाता है। जैसे- दिल्ली में लगभग 36 घंटे में समाधान किया जाता है।