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पार्किंग ढूंढने में सिर्फ समय नहीं, ₹1,500 करोड़ भी हो रहे बर्बाद! ये शहर अपना रहे स्मार्ट तरीका

क्या आप जानते हैं कि पार्किंग की समस्या अब स्मार्ट टेक्नोलॉजी से हल हो सकती है? सोचिए, अगर आपको अपनी कार के लिए जगह खोजने में घंटों नहीं, बल्कि केवल कुछ सेकंड लगें!
3 min read
Aug 04, 2026
parking issues india
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

शहरों में पार्किंग की "महा-समस्या" रोजमर्रा की जिंदगी की एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। बढ़ते वाहनों और सीमित जगह के बीच, पार्किंग की कमी से जाम, समय की बर्बादी और तनाव बढ़ता है। इतना ही नहीं इस चक्कर में देश की अर्थव्यवस्था को करीब 1500 करोड़ का नुकसान भी हो रहा है। लेकिन अब समाधान की दिशा में कई शहर ठोस कदम उठा रहे हैं। चलिए, इस बात को एक-एक करके समझते हैं-

डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्टार्ट‑अप्स की भूमिका

ParkWise.city जैसे प्लेटफॉर्म का दावा है कि पार्किंग की गड़बड़ी से भारत के शहरों को सालाना लगभग ₹1,500 करोड़ का नुकसान होता है और 30% ट्रैफिक सिर्फ पार्किंग ढूँढने में ही खर्च होता है।

डिजिटल ज़ोन में पार्किंग से 30% कम जाम, 3–5 गुना अधिक राजस्व और 90% से ज़्यादा स्वैच्छिक अनुपालन देखा गया है। GoParkEasy जैसी कंपनियाँ रीयल‑टाइम पार्किंग स्लॉट खोजने, बुक करने और भुगतान करने की सुविधा देती हैं, जिससे ड्राइवरों का समय बचता है और शहरों में पार्किंग व्यवस्था व्यवस्थित होती है।

शहरों की चुनौतियाँ और समाधान के रास्ते

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की रिपोर्ट बताती है कि अहमदाबाद, बेंगलुरु, दिल्ली, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में पार्किंग नीति के जरिए निजी वाहन उपयोग को कम करने, सार्वजनिक और गैर‑मोटर चालित वाहनों को प्राथमिकता देने, पार्किंग शुल्क को जमीन की लागत के अनुरूप तय करने, शॉर्ट‑टर्म पार्किंग को बढ़ावा देने और स्मार्ट तकनीक अपनाने की कोशिशें हो रही हैं।

मुंबई की क्लाइमेट एक्शन प्लान में पार्किंग प्रबंधन, पैदल और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई है, ताकि जाम कम हो और वायु गुणवत्ता सुधरे।

स्मार्ट टेक्नोलॉजी से पार्किंग में सुधार

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने 87 पार्किंग स्थलों को स्मार्ट सेंसर आधारित प्रणाली से जोड़ने की योजना बनाई है। इससे रीयल‑टाइम स्लॉट जानकारी, मोबाइल ऐप से मार्गदर्शन, प्रवेश‑निकास डेटा और पार्किंग उल्लंघन की निगरानी संभव होगी, जिससे समय और प्रयास दोनों की बचत होगी।

मुंबई में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने ‘बुक‑योर‑स्पॉट’ स्मार्ट पार्किंग सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे ड्राइवर ऐप के ज़रिए पार्किंग स्लॉट देख, रिज़र्व और पे कर सकेंगे, और सार्वजनिक, निजी व आवासीय पार्किंग को एकीकृत किया जाएगा। साथ ही, शहर के 27 वार्डों में भूमिगत पार्किंग बनाने का प्रस्ताव भी बजट में शामिल किया गया है।

पार्किंग के लिए सरकारी पहल

ओडिशा सरकार ने ‘ओडिशा पार्किंग पॉलिसी 2026’ जारी की है, जिसमें ज़ोन‑वार पार्किंग मैनेजमेंट प्लान (PAMPs), तकनीकी एकीकरण, डिजिटल प्रवर्तन, ग्रेडेड जुर्माने, टोइंग, और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं।

भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) की 2015 की गाइडलाइन्स में भी बताया गया है कि अलग-अलग शहरों के आकार और ज़रूरतों के अनुसार पार्किंग की व्यवस्था, ऑफ‑स्ट्रीट और ऑन‑स्ट्रीट पार्किंग, और नीति‑निर्माण की रूपरेखा तय होनी चाहिए।

पार्किंग के लिए शहरों में क्या हो रहा है

शहर/राज्यपहल / समाधान
नई दिल्ली (NDMC)स्मार्ट सेंसर, मोबाइल ऐप, रीयल‑टाइम पार्किंग डेटा
मुंबई (BMC)ऐप‑आधारित रिज़र्वेशन, भूमिगत पार्किंग प्रस्ताव
ओडिशाक्षेत्रीय पार्किंग प्लान, डिजिटल प्रवर्तन, ग्रेडेड जुर्माने
राष्ट्रीय स्तरनीति‑निर्माण के लिए ढांचा
स्टार्ट‑अप्सParkWise, GoParkEasy जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से बेहतर प्रबंधन

नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है

डिजिटल ऐप से पार्किंग स्लॉट पहले से देख और बुक करने की सुविधा मिलने से रोजमर्रा की समस्या से निजात मिल सकती है। भूमिगत और मल्टी‑लेवल पार्किंग से सड़क पर जगह खाली होगी, जिससे जाम घटेगा। क्षेत्रीय पार्किंग योजनाओं और स्पष्ट नियमों से उल्लंघन में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, जुर्माने और टोइंग जैसी व्यवस्था से नियमों का पालन बढ़ेगा।

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि शहरों को चाहिए कि वे अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार क्षेत्रीय पार्किंग योजनाएं बनाएं, डिजिटल तकनीक को अपनाएं, और नागरिकों को ऐप्स और प्लेटफॉर्म के जरिए जोड़ें। मल्टी‑लेवल और भूमिगत पार्किंग की योजना बनाते समय वित्तीय व्यवहार्यता और रख‑रखाव पर ध्यान देना होगा। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाकर निजी वाहन उपयोग को कम करने की दिशा में भी काम करना होगा।

व्यक्तिगत स्तर पर भी करें सुधार

यदि आप पार्किंग की समस्या से जूझते हैं, तो अपने नगर निगम या स्थानीय प्रशासन को सुझाव भेजें - जैसे कि स्मार्ट ऐप, मल्टी‑लेवल पार्किंग, या क्षेत्रीय पार्किंग प्लान की मांग। डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और नियमों का पालन करें। इससे आप न सिर्फ अपनी यात्रा को आसान बनाएंगे, बल्कि शहर की पार्किंग व्यवस्था को भी बेहतर बनाने में योगदान देंगे।

इस तरह, तकनीक, नीति और नागरिक भागीदारी मिलकर शहरों के पार्किंग संकट को हल करने की दिशा में ठोस कदम उठा सकते हैं। साथ ही इससे समय, स्ट्रेस के साथ-साथ आर्थिक नुकसान से देश को बचा सकते हैं।

Updated on:
04 Aug 2026 04:12 pm
Published on:
04 Aug 2026 04:12 pm