
PM 15 August Speech: स्वतंत्रता दिवस का भाषण कभी केवल सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का दस्तावेज माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें एक बड़ा बदलाव आया है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त के संबोधन से पहले सीधे देशवासियों से सुझाव मांगते हैं। इस वर्ष भी 26 जुलाई से 12 अगस्त तक MyGov पोर्टल पर नागरिकों को अपने सुझाव भेजने के लिए आमंत्रित किया गया है। सरकार का कहना है कि नागरिकों के उपयोगी सुझाव भाषण का हिस्सा बन सकते हैं। इस बात से एक दिलचस्प सवाल जेहन में आता है कि क्या यह केवल जनभागीदारी का प्रतीक है या वास्तव में जनता की प्राथमिकताएं राष्ट्रीय एजेंडे को प्रभावित कर रही हैं?
इस बार MyGov पोर्टल पर आए सैकड़ों सुझावों का विश्लेषण करने पर एक नई तस्वीर उभरती है। रोजगार, शिक्षा सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कौशल विकास, किसानों की आय, साइबर सुरक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे मुद्दे सबसे अधिक दिखाई दे रहे हैं। कई नागरिकों ने AI शिक्षा, डिजिटल फ्रॉड से सुरक्षा, सरकारी स्कूलों में सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को प्राथमिकता देने की मांग की है।
दिलचस्प बात यह है कि बड़ी संख्या में सुझाव किसी नई योजना की मांग नहीं करते, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने की बात करते हैं। दरअसल युवाओं ने कौशल विकास को स्थानीय रोजगार से जोड़ने, किसानों ने गांव स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने, छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और कई नागरिकों ने डिजिटल सेवाओं को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की मांग रखी है।
हालांकि यह दावा करना सही नहीं होगा कि किसी एक नागरिक का सुझाव सीधे प्रधानमंत्री के भाषण में शामिल हुआ। जबकि MyGov मंच पर सरकार लगातार यह कहती रही है कि प्राप्त सुझावों का अध्ययन किया जाता है और उपयोगी विचारों को संबोधन में स्थान मिल सकता है। पिछले वर्षों के भाषणों में 'वोकल फॉर लोकल', 'हर घर तिरंगा', 'मिशन लाइफ', 'डिजिटल इंडिया', 'महिला सशक्तिकरण', 'स्टार्टअप' और 'विकसित भारत 2047' जैसे विषयों पर विशेष जोर रहा, जिन पर MyGov सहित विभिन्न जनभागीदारी मंचों पर व्यापक चर्चा भी होती रही है
इनमें खास बात यह है कि बड़ी संख्या में सुझाव युवाओं की ओर से आए हैं, जिनका फोकस रोजगार, तकनीक और शिक्षा पर है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीति निर्माण केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहता। MyGov जैसे प्लेटफॉर्म सरकार और नागरिकों के बीच संवाद का माध्यम बनते हैं। हालांकि इन सुझावों के चयन की विस्तृत प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं है, लेकिन यह पहल नागरिकों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं दर्ज कराने का अवसर देती है।
इस बार विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या प्रधानमंत्री के भाषण में युवाओं के रोजगार, शिक्षा सुधार, AI, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल सुरक्षा और किसानों से जुड़े वे मुद्दे प्रमुखता से आते हैं, जो MyGov पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो यह संकेत होगा कि जनभागीदारी केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन रही है।
1947-1964- जवाहरलाल नेहरू : भाषण का मसौदा स्वयं तैयार करते थे। व्यक्तिगत लेखन शैली प्रमुख।
1966-1984- इंदिरा गांधी : अधिकारियों के ड्राफ्ट में स्वयं संशोधन। अंतिम शब्द प्रधानमंत्री के।
1998-2004 - अटल बिहारी वाजपेयी : भाषण में व्यक्तिगत भाषा और शैली। कई हिस्से स्वयं लिखते या तत्काल जोड़ते थे।
2004-2014 - मनमोहन सिंह : मंत्रालयों और PMO के इनपुट पर आधारित विस्तृत ड्राफ्ट। अंतिम संपादन स्वयं करते थे।
2014- वर्तमान - नरेंद्र मोदी : MyGov के माध्यम से जनता से सुझाव। मंत्रालयों, विशेषज्ञों और नागरिकों के सुझावों का समावेश। अंतिम भाषण प्रधानमंत्री की स्वीकृति और संपादन के बाद तैयार होता है।
15 अगस्त का भाषण हर वर्ष सरकार की दिशा तय करता है, लेकिन इस बार उससे पहले देश अपनी प्राथमिकताएं लिख रहा है। अंतिम फैसला भले सरकार का हो, मगर MyGov पर दर्ज सैकड़ों सुझाव यह बताते हैं कि भारत का नागरिक अब केवल श्रोता नहीं रहना चाहता, बल्कि राष्ट्रीय एजेंडा तय करने की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी भी चाहता है।