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भारत सहित पूरी दुनिया में मंडराया अल नीनो का खतरा: अगले 6 महीनों में भीषण गर्मी से 4.5 लाख से अधिक मौतों की आशंका

भारत सहित पूरी दुनिया में अल नीनों का खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों ने अगले 6 महीनों में इसके गंभीर परिणामों को लेकर चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 6 महीनों में अल नीनो के प्रभाव से पूरी दुनियां में लाखों लोगों की जान जा सकती है।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 23, 2026

threat of al nino large over the entire world (3)

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

जलवायु वैज्ञानिकों के एक नए आकलन के अनुसार, प्रशांत महासागर में अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है। इसके प्रभाव से अगले 6 महीनों में दुनिया भर में अतिरिक्त गर्मी के कारण 4.5 लाख से अधिक लोगों की जान जा सकती है। यह अनुमान जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से बढ़ रही गर्मी से होने वाली मौतों के अतिरिक्त है। शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इंपैक्ट लैब ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है।


वैज्ञानिकों ने जाहिर की बड़ी चिंता

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस असाधारण अल नीनो का असर इंडोनेशिया, भारत और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक महसूस किया जा सकता है। इसके अलावा सूखा, जंगलों में आग और बाढ़ जैसी घटनाओं के कारण भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने की आशंका है।
रिपोर्ट में प्रकाशित आकलन के अनुसार, अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौत का अनुमान विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग लगाया गया है। इसका उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है, जहां समय रहते कदम उठाकर लोगों की जान बचाई जा सकती है। इनमें बेहतर गर्मी पूर्वानुमान, शीतलन केंद्रों की स्थापना, अत्यधिक गर्मी के दौरान चिकित्सा सुविधाओं में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हैं।

पनप रहा असाधारण खतरा

जलवायु वैज्ञानिकों ने पनप रहे अल नीनों की घटना की तीव्रता को बेहद असाधारण बताया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो गया है। इस गर्मी का असर पहले से गर्म हो रहे वैश्विक वातावरण पर पड़ रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि 4,51,000 लोगों की संभावित मौत का अनुमान इतना बड़ा है कि इसे समझना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा माता-पिता, बच्चों, बुजुर्गों, पड़ोसियों और रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोगों से जुड़ा है।

क्या है अल नीनो?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बारिश, तापमान और हवाओं के सामान्य पैटर्न में बदलाव आता है। मौजूदा घटना ऐसे समय में विकसित हो रही है, जब मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पहले ही बढ़ चुका है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अतिरिक्त गर्मी के कारण अल नीनो से जुड़े प्रभाव और गंभीर हो सकते हैं। अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है, जबकि दूसरे इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और तूफानों की स्थिति पैदा हो सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी संभावित खतरे का आकलन

वैज्ञानिकों ने कहा है कि गर्मी से होने वाली मौतों का अनुमान किसी निश्चित भविष्यवाणी के बजाय संभावित खतरे का आकलन है। इसका इस्तेमाल सरकारें और स्थानीय प्रशासन पहले से तैयारी करने के लिए कर सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो के प्रभावों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी और जलवायु जोखिमों की समय पर पहचान से इसके मानवीय नुकसान को कम किया जा सकता है।

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