
गोबरधन योजना ग्रामीण इलाकों में जैविक कचरे को ऊर्जा और खाद में बदलकर किसानों की आमदनी बढ़ाने और स्वच्छता सुनिश्चित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। यह योजना सिर्फ कचरे को प्रबंधित नहीं करती, बल्कि उसे ग्रामीणों के लिए एक मूल्यवान संसाधन में बदल देती है। यदि आप गोबरधन योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो सबसे पहले एकीकृत पंजीकरण पोर्टल पर जाएं और रजिस्ट्रेशन करें। उसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार करें और आवेदन पूरा करें। इस योजना से न केवल आपकी आय बढ़ेगी, बल्कि आपके गांव में स्वच्छता, ऊर्जा और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
गोबरधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू की गई एक समेकित पहल है। इसका उद्देश्य पशु गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे को बायोगैस, संपीड़ित बायोगैस (CBG), बायो-CNG और जैविक खाद में बदलकर 'वेस्ट को वेल्थ' में बदलना है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, ऊर्जा उत्पादन, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती है।
गोबरधन योजना की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसके बाद फरवरी 2021 में एकीकृत पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किया गया, जिससे राज्यों, सीबीजी ऑपरेटरों और निवेशकों को परियोजनाओं का पंजीकरण और निगरानी आसान हुई। इस पोर्टल पर 450 जिलों से 1,200 से अधिक बायोगैस और सीबीजी संयंत्र पंजीकृत हुए, जिनकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 6,600 टन जैविक अवशेषों को संसाधित करने की थी।
दूसरे चरण के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक जिले में सामुदायिक/क्लस्टर-आधारित बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध है। इसके अलावा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (BAM) खरीद में सहायता के लिए 564.75 करोड़ रुपये का बजट रखा है। जिसमें अब तक 0.91 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
गोबरधन योजना का लाभ किसान, पशुपालक, FPO (किसान उत्पादक संगठन), गौशाला, स्वयं सहायता समूह और उद्यमी उठा सकते हैं। यह योजना जैविक कचरे को ऊर्जा और खाद में बदलने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है।
गोबरधन योजना का लाभ लेने के लिए एकीकृत पंजीकरण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद परियोजना प्रस्ताव, भूमि से संबंधित दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, आधार, पैन आदि दस्तावेज अपलोड करना होते हैं। इस योजना का आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है। कुछ मामलों में ग्राम पंचायत या संगठन भी आवेदन कर सकते हैं।
गोबरधन योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बढ़ी है, क्योंकि गोबर और जैविक कचरा वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित होता है। इससे बायोगैस और जैविक खाद का उत्पादन होता है, जो ऊर्जा और खेती दोनों में उपयोगी है। इसके साथ ही, इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।