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गुलाब सकरी से लेकर दूधिया खीच तक: राजस्थान की 4 मिठाइयों का अनोखा स्वाद!

घेवर और मावा कचौरी के अलावा भी राजस्थान में कई ऐसी पारंपरिक मिठाइयाँ हैं, जिनके बारे में कम लोग जानते हैं। जानिए मिश्री मावा, दूधिया खीच, तिलपट्टी और अन्य अनसुनी मिठाइयों का इतिहास, स्वाद और सांस्कृतिक महत्व।
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Jul 29, 2026
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प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

राजस्थान की अनसुनी मिठाइयाँ एक स्वाद-भरी यात्रा हैं, जो हमें शाही रसोई की गहराईयों और रेगिस्तान की ज़रूरतों से जुड़ी पाक कला की कहानियाँ सुनाती हैं। इन मिठाइयों में घी, सूखे मेवे, दूध और खोए का भरपूर इस्तेमाल होता है, जो राजस्थान की शुष्क जलवायु में लंबे समय तक सुरक्षित रहने के लिए आदर्श हैं।

अक्सर घेवर, मावा कचौरी, मोहनथाल जैसी मिठाइयाँ चर्चित होती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी हैं जो अब कम सुनने को मिलती हैं।

शाही रसोई की याद दिलाती मिठाइयाँ

मिश्री मावा (Mishri Mawa) एक बेहद समृद्ध मिठाई है, जिसे शाही अवसरों पर बनाया जाता था। इसमें दूध को गाढ़ा करके उसमें मिश्री (कच्ची चीनी) और इलायची मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता था - आजकल यह लगभग भूला दी गई है।

गुलाब सकरी (Gulab Sakri) भी एक दुर्लभ मिठाई है, जिसमें गुलाब की खुशबू, कंडेंस्ड मिल्क और सूखे मेवे मिलाकर एक कोमल और सुगंधित व्यंजन तैयार किया जाता था।

चंद्रहास, चाँद के आकार की यह मिठाई केसर, बादाम और दूध के ठोस भागों से बनाई जाती थी - आज केवल कुछ पारंपरिक हलवाई ही इसकी असली विधि जानते हैं।

केसर बाटी (Kesar Bati) गेहूं, घी और केसर से बनी एक भरवां मिठाई थी, जिसे शाही रसोई में विशेष रूप से तैयार किया जाता था।

क्षेत्रीय अनसुनी मिठाइयाँ

दूधिया खीच (Doodhiya Kheech), भीलवाड़ा–उदयपुर क्षेत्र की एक सर्दियों की खास मिठाई है। इसमें साबुत गेहूं को दूध और सूखे मेवों के साथ पकाकर एक गाढ़ा खिचड़ा तैयार किया जाता है—यह स्वाद में हल्का और पोषक होता है।

बीवर की तिलपट्टी (Tilpatti of Beawar) तिल और गुड़ से बनी एक पतली, कुरकुरी पट्टी है, जिसे माघ महीने और मकर संक्रांति पर खास तौर पर बनाया जाता है। गुड़ गट्टा (Gud Gatta या Kadaka) गुड़ से बनी एक टॉफी जैसी मिठाई है, जिसमें मूंगफली और सूखे मेवे मिलाए जाते हैं - यह विशेष रूप से मकर संक्रांति पर बनाई जाती है।

स्थानीय बाजारों में मिलती अनूठी मिठाइयाँ

जयपुर के पारंपरिक मिठाई विक्रेता “गजक वाले” की दुकान में तिलपट्टी, गजक और चिक्की जैसी मिठाइयाँ मिलती हैं, जो कुरकुरी, मीठी और स्थानीय स्वाद की याद दिलाती हैं। ये मिठाइयाँ अक्सर त्योहारों और खास मौकों पर ही मिलती हैं, और बाहर के लोगों के लिए एक अनोखा स्वाद अनुभव होती हैं।

अनसुनी मिठाइयों की खासियत

इन मिठाइयों की खास बात यह है कि इनमें शुष्क जलवायु के अनुकूल सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल होता है - घी, खोया, सूखे मेवे, गुड़ - जो इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित और स्वादिष्ट बनाए रखते हैं। शाही रसोई की मिठाइयाँ शाही मेहमानों के लिए बनाई जाती थीं, जबकि स्थानीय क्षेत्रीय मिठाइयाँ त्योहारों और मौसम के अनुसार विकसित हुई थीं।

अगर आप राजस्थान की यात्रा पर हैं, तो इन अनसुनी मिठाइयों को ढूंढना एक स्वाद-खोज की यात्रा हो सकती है। जैसे:

  • भीलवाड़ा या उदयपुर में दूधिया खीच का स्वाद लें।
  • माघ या मकर संक्रांति पर बीवर की तिलपट्टी और गुड़ गट्टा का आनंद लें।
  • जयपुर में इश्वरजी गजक वाले की दुकान पर जाकर तिलपट्टी और गजक जैसी स्थानीय मिठाइयाँ चखें।
  • नोट- यह मिठाइयां जयपुर जैसे अन्य शहरों में भी मिल सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान की मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवे और घी न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं। 2020 में जयपुर के एक खाद्य अध्ययन संस्थान ने पाया कि इन मिठाइयों में मौजूद तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। अध्ययन में 500 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में 85% लोगों ने कहा कि ये मिठाइयाँ उन्हें ऊर्जा और स्फूर्ति प्रदान करती हैं।

राजस्थान की मिठाइयों का स्वाद और उनकी विविधता एक अनोखा अनुभव है। चाहे वह शाही रसोई की मिठाइयाँ हों या स्थानीय बाजारों की, हर मिठाई में एक कहानी छिपी है। यह कहानी राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और इतिहास की है, जो हर मिठाई के स्वाद में महसूस की जा सकती है।

Updated on:
29 Jul 2026 11:25 am
Published on:
29 Jul 2026 11:17 am