
राजस्थान में हाल ही 20 नई माताओं की मौतों की खबर ने एक बार फिर देश में मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। मई से अब तक सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 20 महिलाओं की मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकांश मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव, गुर्दे की विफलता और संक्रमण जैसी जटिलताएं शामिल हैं। इस लेख में समझते हैं, पूरे भारत में प्रसूता मृत्यु की स्थिति क्या है और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था कहां कमजोर पड़ रही है।
मई से अब तक राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 20 महिलाओं की मौतें हुई हैं। इनमें से एक हालिया मामला 20 जुलाई को जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में दर्ज सामने आया, जहां एक महिला ने पोस्ट-डिलीवरी कठिनाइयों से जूझते हुए दम तोड़ दिया। इन मौतों में कई मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव, गुर्दे की विफलता और संक्रमण जैसे कारण सामने आए हैं। राज्य सरकार ने इन घटनाओं की जांच के लिए विशेषज्ञ टीमों को भेजा है, ऑपरेशन थिएटर से नमूने लिए गए हैं और दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। 15 जुलाई से पांच दिनों का गर्भवती महिलाओं का स्क्रीनिंग अभियान भी शुरू किया गया, ताकि एनीमिया और उच्च जोखिम वाली गर्भधारणाओं की पहचान की जा सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2021–23 के बीच 88 प्रति लाख जीवित जन्म है। राज्यवार आंकड़ों में राजस्थान का MMR 86 है, जो राष्ट्रीय औसत के आसपास है।
| राज्य / क्षेत्र | MMR (2021–23, प्रति 1 लाख जीवित जन्म) |
|---|---|
| भारत (कुल) | 88 |
| राजस्थान | 86 |
| केरल | 30 |
| तमिलनाडु | 35 |
| महाराष्ट्र | 36 |
| गुजरात | 51 |
| कर्नाटक | 68 |
| तेलंगाना | 59 |
| हरियाणा | 89 |
| पंजाब | 90 |
| उत्तर प्रदेश | 141 |
| मध्य प्रदेश | 142 |
| छत्तीसगढ़ | 146 |
| ओडिशा | 153 |
| बिहार | 104 |
| असम | 110 |
| पश्चिम बंगाल | 104 |
| झारखंड | 54 |
(स्रोत: SRS 2021–23, Registrar General of India)
राजस्थान का MMR (86) राष्ट्रीय औसत (88) के आसपास है। यह दक्षिणी राज्यों जैसे केरल (30), तमिल नाडु (35) और महाराष्ट्र (36) की तुलना में काफी ज्यादा है। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश (142), छत्तीसगढ़ (146), उत्तर प्रदेश (141) और ओडिशा (153) जैसे राज्य अभी भी बहुत पीछे हैं। इसका मतलब है कि राजस्थान की स्थिति मध्यवर्ती श्रेणी में है, बेहतर राज्यों की तुलना में कमजोर, लेकिन कुछ राज्यों से बेहतर।
इन मौतों के पीछे कई कारण सामने आए हैं, संक्रमण नियंत्रण में कमी, ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता में लापरवाही, रक्तस्राव और गुर्दे की विफलता जैसी जटिलताओं का समय पर इलाज न होना, और उच्च जोखिम वाली गर्भधारणाओं की पहचान में देरी। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवा की गुणवत्ता (जैसे ऑक्सिटोसिन) को दोष देना ठीक नहीं है; असल में निगरानी, रिकॉर्ड-कीपिंग और संक्रमण नियंत्रण में व्यापक कमी है। सरकार ने स्क्रीनिंग अभियान और जांच शुरू की है, लेकिन अभी तक किसी मामले में स्पष्ट जवाब या जवाबदेही नहीं मिली है।
राजस्थान सरकार ने स्क्रीनिंग अभियान और जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या इससे वास्तविक सुधार होता है। लंबी अवधि में संक्रमण नियंत्रण, ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता, उच्च जोखिम गर्भधारणाओं की पहचान और समय पर हस्तक्षेप जैसे क्षेत्रों में सुधार जरूरी है। दूसरे राज्यों के अनुभव (जैसे केरल, तमिलनाडु) से सीख लेकर बेहतर मॉनिटरिंग, प्रशिक्षित स्टाफ और बेहतर संसाधन व्यवस्था लागू की जा सकती हैनिष्कर्ष
संक्रमण नियंत्रण, निगरानी, रिकॉर्ड-कीपिंग और उच्च जोखिम पहचान में सुधार के बिना यह स्थिति सुधरना मुश्किल है। स्क्रीनिंग अभियान और जांच एक शुरुआत हैं, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब स्वास्थ्य प्रणाली में जवाबदेही, संसाधन और प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।