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राजस्थान में ऑनलाइन ठगी के नए तरीके: WhatsApp बॉस से लेकर AI डीपफेक तक, जानें कैसे बचें

राजस्थान में ऑनलाइन ठगी के नए तरीके तेजी से सामने आ रहे हैं। WhatsApp Boss Scam, Gold Trading Fraud, AI Deepfake, Digital Census Scam और Remote Access App Fraud जैसे साइबर अपराधों से कैसे बचें, जानें पुलिस की सलाह और जरूरी सुरक्षा उपाय।
4 min read
Jul 28, 2026
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प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT AI

राजस्थान में ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, जो अब पहले से कहीं अधिक जटिल और खतरनाक हो चुके हैं। साइबर ठग अब सिर्फ नौकरी या वर्क-फ्रॉम-होम के झांसे तक सीमित नहीं रहे, बल्कि निवेश, गोल्ड ट्रेडिंग, डिजिटल जनगणना और डीपफेक जैसी नई तकनीकों का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। आइए, राजस्थान में सामने आए ताजा मामलों और पुलिस की प्रतिक्रिया को विस्तार से समझते हैं।

नए साइबर फ्रॉड्स की एक झलक

राजस्थान में सामने आए ठगी के नए तरीकों को संक्षेप में नीचे देखा जा सकता है:

ठगी का तरीकाकैसे होती है
फर्जी बॉस/चेयरमैन स्कैमव्हाट्सएप पर सीनियर अधिकारी की फोटो-नाम
लगाकर कर्मचारी से पैसे ट्रांसफर कराना
गोल्ड/शेयर ट्रेडिंग स्कैमफर्जी वेबसाइट या ग्रुप में जोड़कर भारी मुनाफे
का लालच देना, फिर निकासी पर फीस वसूलना
डिजिटल जनगणना फ्रॉडजनगणना अधिकारी बनकर फर्जी लिंक
भेजना या घर आकर OTP मांगना
AnyDesk/TeamViewer स्कैमरिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड
करवाकर मोबाइल का पूरा नियंत्रण लेना
AI-डीपफेक फ्रॉडपरिचित की आवाज़ या चेहरा नकल कर पैसे मांगना
लॉटरी/इनाम मैसेज स्कैमबड़ा इनाम जीतने का झूठा मैसेज भेजकर
फीस या टैक्स के नाम पर पैसे ऐंठना
फर्जी कूरियर/FedEx स्कैमपार्सल रुकने का बहाना बनाक
कस्टम फीस के नाम पर ठगी करना
इंस्टेंट लोन ऐप एक्सटॉर्शनतुरंत लोन का लालच देकर
बाद में धमकाकर वसूली करना

व्हाट्सएप पर बॉस बनकर 5.30 करोड़ की ठगी

राजस्थान पुलिस ने हाल ही में एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में ठगों ने गैलेक्सी माइनिंग कंपनी के चेयरमैन की प्रोफ़ाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया। इसी नंबर से कंपनी के अकाउंटेंट दीपेंद्र सिंह को संदेश भेजकर दो अलग-अलग बैंक खातों में तुरंत भुगतान करने के निर्देश दिए गए। भरोसा कर दीपेंद्र सिंह ने 5 करोड़ 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह घटना 24 अप्रैल 2026 की है, जब पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। जांच में पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गिरोह के 17 आरोपियों को कोटा, पाली, जोधपुर और बांसवाड़ा जैसे कई शहरों से गिरफ्तार किया।

किशनगढ़ में ट्रेडिंग के नाम पर ठगी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किशनगढ़ में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश का झांसा देकर एक व्यक्ति से लगभग 5 लाख रुपये की ठगी की गई। यह घटना दिखाती है कि बड़े शहरों के अलावा राजस्थान के छोटे कस्बों में रहने वाले लोग भी अब इन नए तरह के ट्रेडिंग स्कैम का शिकार हो रहे हैं, जहां व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर भारी मुनाफे का लालच दिया जाता है।

जयपुर का 12 करोड़ का गोल्ड स्कैम

सबसे बड़ा और ताजा मामला जयपुर से सामने आया है, जहां एक ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग स्कैम में 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपये की ठगी का खुलासा हुआ। पीड़ित को व्हाट्सएप मैसेज के जरिए एक फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट पर तेज मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया। जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने आयकर, प्रोसेसिंग फीस और अकाउंट अनफ्रीज कराने जैसे बहानों से लगातार और पैसे वसूले।

जांच में सामने आया कि इस ठगी में वर्चुअल मर्चेंट खातों और एक फर्जी फाइनेंस कंपनी - गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने इस कंपनी की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को मुंबई से गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी जयंता रॉय समेत अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

डिजिटल जनगणना और डीपफेक का नया खतरा

इन बड़ी घटनाओं के बीच, राजस्थान पुलिस ने कई अहम साइबर सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की हैं। इनमें सबसे ताजा चेतावनी डिजिटल जनगणना के नाम पर हो रही ठगी को लेकर है। साइबर अपराधी जनगणना अधिकारी बनकर फर्जी कॉल, मैसेज या लिंक के ज़रिए बैंक खाते खाली कर सकते हैं। कई बार ठग AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल का पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, या घर आकर टैबलेट पर जानकारी भरने का नाटक कर ओटीपी मांग लेते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल जनगणना केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही और पूरी तरह मुफ्त में होती है, और यह प्रक्रिया 1 मई से 15 मई 2026 तक ही निर्धारित थी। इसके अलावा, AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए पुलिस ने बायोमेट्रिक सुरक्षा को लेकर भी अलग से एडवाइजरी जारी की है।

शिकार होने पर क्या करें

राज्य सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT&C) ने भी हाल के महीनों में कई साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की हैं, जिनमें लॉटरी मैसेज स्कैम, LPG सब्सिडी व KYC फ्रॉड, फर्जी कूरियर स्कैम और इंस्टेंट लोन ऐप एक्सटॉर्शन जैसी चेतावनियां शामिल हैं।

यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो पुलिस और संबंधित विभागों ने साफ निर्देश दिए हैं - सबसे पहले साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। अगर पैसा पहले ही ट्रांसफर हो चुका है, तो गृह मंत्रालय के अधीन इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा जून 2026 में लॉन्च किए गए Money Restoration Module (MRM) का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मॉड्यूल प्रभावित बैंकों, पेमेंट गेटवे और पुलिस इकाइयों के बीच तेज़ समन्वय स्थापित कर चोरी की गई राशि को फ्रीज़ करने और पीड़ित के खाते में वापस लौटाने में मदद करता है। हालांकि इसका लाभ उन्हीं लोगों को मिलता है जिन्होंने समय रहते शिकायत दर्ज कराई हो।

खुद को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी टिप्स

राजस्थान में बदलते साइबर अपराध के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखकर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं:

  • किसी भी अनजान नंबर से आए वित्तीय निर्देश पर तुरंत भरोसा न करें। संबंधित व्यक्ति से सीधे फोन कॉल या मिलकर पुष्टि करें।
  • बैंक डिटेल, ओटीपी, आधार नंबर या पासवर्ड जैसी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें, चाहे कॉलर खुद को कोई भी अधिकारी क्यों न बताए।
  • AnyDesk, TeamViewer या किसी भी अनजान ऐप को केवल किसी भरोसेमंद तकनीकी सहायता के अनुरोध पर ही डाउनलोड करें, वह भी सावधानी के साथ।
  • निवेश, ट्रेडिंग या गोल्ड स्कीम में भारी और तुरंत मुनाफे का दावा करने वाले किसी भी ऑफर पर शक करें। असली निवेश में इतना जल्दी और गारंटीड रिटर्न लगभग असंभव है।
  • डिजिटल जनगणना जैसी सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही लें, किसी लिंक या कॉल पर भरोसा न करें।
  • यदि कोई नौकरी, निवेश या सरकारी योजना के नाम पर अग्रिम पैसे मांगे, तो उसे धोखाधड़ी समझें।
  • ठगी होने पर देरी न करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा रहेगी।

राजस्थान पुलिस और संबंधित विभागों की सतर्कता और समय पर कार्रवाई ने कई बड़े गिरोहों को बेनकाब किया है, लेकिन आम नागरिकों की जागरूकता के बिना यह लड़ाई अधूरी है। ऑनलाइन दुनिया जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही जोखिम भरी भी है और सही जानकारी व सतर्कता ही हमें इससे सुरक्षित रख सकती है।

Updated on:
28 Jul 2026 01:01 pm
Published on:
28 Jul 2026 01:01 pm