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ITR फाइलिंग में गलती और देरी दोनों पड़ सकती हैं महंगी, ऐसे बचाए अपना पैसा

ITR Filing Mistakes 2026 : ITR भरने में जरा सी गलती या देरी भारी नुकसान करा सकती है। जानें AIS की गलतियों, F&O ट्रेडिंग, NRI नियमों, AY 2026-27 की डेडलाइन्स और लेट फीस से बचने के आसान उपाय।
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ITR filing mistakes 2026

ITR filing mistakes 2026 : ITR फाइल करते समय किन गलतियों से बचें, PC- Patrika

हर साल लाखों लोग आयकर रिटर्न (ITR) भरते हैं, लेकिन जल्दबाजी, अधूरी जानकारी या डेडलाइन चूक जाने की वजह से अच्छा-खासा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। आयकर विभाग अब AIS (Annual Information Statement), बैंकिंग डेटा, म्यूचुअल फंड लेनदेन, शेयर ट्रेडिंग और विदेशी खातों सहित सबका आपस में मिलान कर रहा है। ऐसे में न सिर्फ गलती, बल्कि देरी भी उतनी ही भारी पड़ सकती है। आइए इसे दो हिस्सों में समझते हैं, पहला फाइलिंग में होने में वाली गलतियां और दूसरा देरी होने पर कितना फाइन लगता है। पहले समझिए फाइलिंग में होने वाली गलतियां...।

सिर्फ AIS पर आंख मूंदकर भरोसा करना

AIS यानी Annual Information Statement में आपके बैंक ब्याज, शेयर निवेश, म्यूचुअल फंड लेनदेन और प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन जैसी जानकारियां दिखाई जाती हैं। लेकिन यह हमेशा 100% सटीक नहीं होता, कभी-कभी किसी लेनदेन की डुप्लीकेट एंट्री हो जाती है या गलत आंकड़ा दर्ज हो जाता है।

इससे यह नुकसान होता है कि अगर गलत जानकारी बिना जांचे स्वीकार कर ली जाए, तो आपकी आय वास्तविक से ज्यादा दिख सकती है और अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। इसका सबसे अच्छा बचाव है Form 16, बैंक स्टेटमेंट और अपने निवेश रिकॉर्ड से AIS का मिलान जरूर करें।

FD और सेविंग अकाउंट का ब्याज न दिखाना

कई करदाता मान लेते हैं कि जो आय AIS में नहीं दिख रही, उसे बताने की जरूरत नहीं। यह गलत है FD और सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स योग्य आय है, भले ही वह AIS में न दिखे।

इसका यह नुकसान है बाद में विभाग को जानकारी मिलने पर अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माना देना पड़ सकता है।

डुप्लीकेट म्यूचुअल फंड एंट्री

म्यूचुअल फंड लेनदेन अक्सर ब्रोकर और रजिस्ट्रार (CAMS या KFintech) दोनों द्वारा रिपोर्ट किए जाते हैं, जिससे एक ही निवेश दो बार दिख सकता है। गलत आंकड़े स्वीकार करने पर कैपिटल गेन ज्यादा दिख सकता है और टैक्स देनदारी बढ़ सकती है।

जॉइंट ओनरशिप प्रॉपर्टी में गलत कैपिटल गेन

अगर संपत्ति संयुक्त स्वामित्व में है, तो AIS में कई बार पूरी बिक्री राशि एक ही व्यक्ति के नाम दिख जाती है। इससे यह नुकसान होता है कि एक व्यक्ति पर उसकी वास्तविक हिस्सेदारी से अधिक कैपिटल गेन टैक्स का बोझ आ सकता है। इसे स्वामित्व अनुपात के हिसाब से सही तरीके से बांटना जरूरी है।

NRI के लिए Deemed Residency नियम को नजरअंदाज करना

विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सिर्फ भारत में बिताए दिनों की गिनती काफी नहीं है। सेक्शन 6(1A) के तहत, अगर किसी भारतीय नागरिक की कुल आय (विदेशी स्रोतों को छोड़कर) ₹15 लाख से अधिक है और वह किसी अन्य देश में निवास या समान आधार पर टैक्स के दायरे में नहीं आता, तो उसे 'डीम्ड रेजिडेंट' माना जाता है। भले ही उसने भारत में एक भी दिन न बिताया हो। यह नियम खासतौर पर UAE, सऊदी अरब जैसे टैक्स-फ्री देशों में रहने वाले भारतीयों पर लागू होता है।

यह भी समझें

डीम्ड रेजिडेंट को "Resident but Not Ordinarily Resident" (RNOR) की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि आपकी पूरी विदेशी आय भारत में टैक्सेबल हो जाएगी। RNOR की विदेशी पैसिव आय (जैसे विदेशी बैंक ब्याज) भारत में टैक्स-फ्री ही रहती है। सिर्फ वह आय टैक्सेबल होती है जो भारत-नियंत्रित बिजनेस से जुड़ी हो, साथ ही भारतीय स्रोत की सारी आय (सैलरी, रेंट आदि) हमेशा टैक्सेबल रहती है।

इससे यह नुकसान हो सकता है कि गलत रेजिडेंसी स्टेटस चुनने पर टैक्स नोटिस और अतिरिक्त टैक्स देनदारी बन सकती है। इसलिए अपने दिनों की गिनती और आय दोनों को ट्रैक करना जरूरी है।

विदेशी संपत्ति की जानकारी छिपाना

आयकर विभाग अब कई देशों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर विदेशी बैंक खातों और संपत्तियों का ब्योरा भी AIS में दिखा रहा है। विदेशी खाते या संपत्ति का खुलासा न करने पर जांच शुरू हो सकती है और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

F&O और इंट्रा-डे ट्रेडिंग को गलत फॉर्म में दिखाना

कई निवेशक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या इंट्रा-डे ट्रेडिंग से हुई आय को कैपिटल गेन मानकर ITR-2 भर देते हैं। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी आय आमतौर पर बिजनेस इनकम मानी जाती है, जिसके लिए ITR-3 फॉर्म सही है। गलत ITR फॉर्म चुनने पर रिटर्न त्रुटिपूर्ण मान लिया जाता है और बाद में उसे संशोधित करना पड़ता है।

AY 2026-27 का डेडलाइन कैलेंडर

  • सैलरीड / सामान्य व्यक्ति (ITR-1, ITR-2): 31 जुलाई 2026
  • बिजनेस/प्रोफेशनल, नॉन-ऑडिट (ITR-3, ITR-4): 31 अगस्त 2026
  • ऑडिट के दायरे वाले बिजनेस (ITR-5, ITR-6): 31 अक्टूबर 2026 (ऑडिट रिपोर्ट: 30 सितंबर 2026)
  • ट्रांसफर प्राइसिंग केस: 30 नवंबर 2026 (रिपोर्ट: 31 अक्टूबर 2026)
  • बिलेटेड रिटर्न की आखिरी तारीख: 31 दिसंबर 2026
  • रिवाइज्ड रिटर्न की आखिरी तारीख: 31 मार्च 2027

ध्यान दें: यह AY 2026-27 का आखिरी फाइलिंग सीजन है जो पुराने Income Tax Act, 1961 के तहत होगा। नया Income Tax Act, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू है, लेकिन FY 2025-26 की आय अब भी पुराने कानून के दायरे में आती है।

डेडलाइन चूकने पर क्या-क्या नुकसान होता है?

  1. लेट फीस (सेक्शन 234F): डेडलाइन के बाद फाइल करने पर ₹5,000 तक लेट फीस लगती है (₹5 लाख से कम आय पर ₹1,000)।
  2. ब्याज (सेक्शन 234A): बकाया टैक्स पर हर महीने 1% साधारण ब्याज लगता है। डेडलाइन के अगले दिन से लेकर फाइल करने की तारीख तक।
  3. पुरानी टैक्स व्यवस्था का विकल्प हमेशा के लिए खत्म: यह सबसे बड़ा नुकसान है। बिलेटेड रिटर्न (सेक्शन 139(4)) सिर्फ नई टैक्स व्यवस्था के तहत ही फाइल हो सकता है। भले ही आपने डेडलाइन से पहले Form 10-IEA जमा करके पुरानी व्यवस्था चुनी हो। मतलब 80C, 80D जैसी पुरानी छूट और डिडक्शन उस साल के लिए हाथ से निकल जाते हैं।
  4. बिजनेस और कैपिटल लॉस कैरी फॉरवर्ड की सुविधा खत्म: अगर शेयर ट्रेडिंग, बिजनेस या किसी अन्य स्रोत से नुकसान हुआ है, तो बिलेटेड रिटर्न में वह नुकसान अगले साल कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता। (अपवाद: हाउस प्रॉपर्टी का नुकसान और अनएब्जॉर्ब्ड डेप्रिसिएशन अब भी कैरी फॉरवर्ड हो सकते हैं।)
  5. रिफंड में देरी और ब्याज का नुकसान: देर से फाइल करने पर रिफंड मिलने में भी देरी होती है, और रिफंड पर मिलने वाला ब्याज (सेक्शन 244A) भी कम हो सकता है।
  6. भविष्य में लोन आवेदन में परेशानी: बैंक और NBFC अक्सर लोन प्रोसेसिंग के दौरान पिछले 2-3 साल के ITR मांगते हैं। समय पर फाइल न किया गया रिटर्न आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
  7. डेडलाइन भी मिस हो जाए तो? बिलेटेड रिटर्न की डेडलाइन (31 दिसंबर 2026) भी निकल जाए, तो असेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीने के भीतर 'अपडेटेड रिटर्न' भरने का विकल्प बचता है। लेकिन इसमें टैक्स और पेनल्टी और भी ज्यादा लगती है, और रिफंड क्लेम करने का हक भी नहीं रहता।

एक नजर में: क्या करें, कब करें

  • AIS का मिलान- गलत/डुप्लीकेट एंट्री पकड़ने के लिए
  • FD/सेविंग ब्याज घोषित करें - छूटी आय पर बाद में जुर्माने से बचने के लिए
  • म्यूचुअल फंड रिकॉर्ड जांचें - डुप्लीकेट कैपिटल गेन रोकने के लिए
  • प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन का सही बंटवारा - अधिक कैपिटल गेन टैक्स से बचने के लिए
  • NRI: दिनों की गिनती + ₹15 लाख आय ट्रैक करें - गलत रेजिडेंसी स्टेटस से बचने के लिए
  • विदेशी संपत्ति का पूरा खुलासा - जुर्माने और जांच से बचने के लिए
  • सही ITR फॉर्म चुनें (F&O के लिए ITR-3) - रिटर्न त्रुटि से बचने के लिए
  • 31 जुलाई से पहले फाइल करें - पुरानी टैक्स व्यवस्था और लॉस कैरी फॉरवर्ड बचाने के लिए