
किसी भी छोटे व्यवसाय को बढ़ाने, नया कारोबार शुरू करने या रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल होता है कि कर्ज कहां से लिया जाए और कौन सा विकल्प सबसे बेहतर रहेगा। बाजार में सरकारी योजनाओं से लेकर बैंक, NBFC और डिजिटल लेंडर तक कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन हर योजना का उद्देश्य, शर्तें और लाभ अलग-अलग हैं। इसलिए कर्ज लेने से पहले अपनी जरूरत को समझना जरूरी है।
यदि आप पहली बार कारोबार शुरू कर रहे हैं और आपके पास गिरवी रखने के लिए कोई संपत्ति नहीं है, तो प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। इस योजना में बिना गारंटी के ऋण दिया जाता है।
अब इसकी चार श्रेणियां हैं (बजट 2024-25 में एक नई श्रेणी जोड़ी गई है)
यानी अब मुद्रा योजना के तहत अधिकतम ऋण सीमा ₹10 लाख नहीं, बल्कि ₹20 लाख हो गई है। यह ऋण व्यापार शुरू करने, विस्तार करने या कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया जा सकता है। आवेदन बैंक, NBFC, MFI या जन समर्थ (Jan Samarth) और उद्यमी मित्र (Udyamimitra) जैसे पोर्टलों के माध्यम से किया जा सकता है।
यदि आपके व्यवसाय को अधिक राशि की जरूरत है और आप संपत्ति गिरवी नहीं रखना चाहते, तो CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises) उपयोगी विकल्प हो सकता है।
इस योजना के तहत सरकार ऋण का बड़ा हिस्सा गारंटी के रूप में कवर करती है। इससे बैंकों का जोखिम कम होता है और उद्यमियों को बिना संपार्श्विक (Collateral) के ऋण मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
स्टैंड-अप इंडिया योजना विशेष रूप से महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लोगों के लिए बनाई गई है। इस योजना में:
नई घोषणा: बजट 2025-26 में वित्त मंत्री ने Stand-Up India से आगे बढ़कर एक और योजना का ऐलान किया। इसके तहत 5 लाख नई SC/ST और पहली बार उद्यम शुरू करने वाली महिला उद्यमियों को ₹2 करोड़ तक का टर्म लोन मिलेगा। यानी बड़ी परियोजनाओं के लिए अब इस वर्ग के उद्यमियों के पास पहले से बड़ा विकल्प भी उपलब्ध होने जा रहा है। यदि आप इन श्रेणियों में आते हैं और नया उद्यम शुरू करना चाहते हैं, तो ये महत्वपूर्ण विकल्प हो सकते हैं।
सब्सिडी वाला ऋण चाहिए तो PMEGP देखें : यदि आप नई विनिर्माण (Manufacturing) या सेवा इकाई स्थापित करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) मददगार हो सकता है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें परियोजना लागत पर 15% से 35% तक सब्सिडी (मार्जिन मनी) का लाभ मिल सकता है। शहरी सामान्य वर्ग के लिए सबसे कम (15%) और ग्रामीण विशेष वर्ग (SC/ST/OBC/महिला/दिव्यांग आदि) के लिए सबसे ज़्यादा (35%)। इससे ऋण का वास्तविक बोझ काफी कम हो जाता है, और यह सब्सिडी वापस नहीं करनी पड़ती (बशर्ते इकाई तय अवधि तक सफलतापूर्वक चले)।
इस योजना के तहत सब्सिडी पाने के लिए अधिकतम परियोजना लागत विनिर्माण के लिए ₹50 लाख और सेवा/व्यापार क्षेत्र के लिए ₹20 लाख तय है।
हर व्यवसाय को केवल विस्तार के लिए ही नहीं, बल्कि दैनिक संचालन के लिए भी पैसे की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति में:
वर्किंग कैपिटल लोन : वेतन, किराया, बिजली बिल और इन्वेंट्री खरीदने के लिए उपयोगी, अल्पकालिक जरूरतों के लिए बेहतर
ओवरड्राफ्ट और कैश क्रेडिट : बैंक एक सीमा तय करता है, जरूरत के अनुसार पैसा निकाल सकते हैं, ब्याज केवल उपयोग की गई राशि पर लगता है यह विकल्प उन व्यवसायों के लिए अच्छा है जिनकी आय और खर्च में उतार-चढ़ाव रहता है।
यदि आपको नई मशीनें खरीदनी हैं, दुकान या फैक्ट्री का विस्तार करना है या कोई बड़ा निवेश करना है, तो टर्म लोन सबसे उपयुक्त माना जाता है।
इनमें SIDBI का SMILE (SIDBI Make in India Soft Loan Fund) प्रमुख है। यह नई MSME इकाइयों को लंबी अवधि के लिए वित्त उपलब्ध कराता है और इसकी ब्याज दरें कई बार सामान्य व्यावसायिक ऋणों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं।
यदि ग्राहकों का पैसा अटका हुआ है? : कई बार व्यवसाय में बिक्री हो जाती है लेकिन भुगतान देर से मिलता है। ऐसी स्थिति में नकदी की कमी हो सकती है। इसके लिए दो विकल्प उपयोगी हैं:
बिजनेस लाइन ऑफ क्रेडिट उन व्यवसायों के लिए उपयोगी है जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग राशि की जरूरत पड़ती है।
आज कई NBFC और डिजिटल लेंडर जैसे Lendingkart, NeoGrowth और Indifi तेज ऋण स्वीकृति प्रदान करते हैं।
हालांकि इनकी ब्याज दरें और शुल्क पारंपरिक बैंकों की तुलना में अधिक हो सकते हैं। इसलिए शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
| 💼 विकल्प | 🎯 किसके लिए उपयुक्त | ⭐ प्रमुख लाभ |
|---|---|---|
| PMMY (मुद्रा) | नया व्यवसाय, छोटा कारोबार | बिना गारंटी ऋण, ₹20 लाख तक |
| CGTMSE | बड़ा व्यवसाय ऋण | सरकारी गारंटी |
| Stand-Up India | महिला एवं SC/ST उद्यमी | ₹10 लाख–₹1 करोड़, नई योजना ₹2 करोड़ तक |
| PMEGP | नई इकाई | 15–35% सब्सिडी |
| वर्किंग कैपिटल | दैनिक खर्च | संचालन में मदद |
| टर्म लोन | विस्तार, मशीनरी | निश्चित EMI |
| इनवॉइस फाइनेंसिंग | लंबित भुगतान | त्वरित नकदी |
| लाइन ऑफ क्रेडिट | लचीली जरूरतें | उपयोग पर ही ब्याज |
| NBFC / डिजिटल लेंडर | त्वरित ऋण | तेज प्रोसेसिंग |
कर्ज लेने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात यह तय करना है कि आपको पैसा किस उद्देश्य के लिए चाहिए। यदि व्यवसाय शुरू करना है तो मुद्रा योजना बेहतर हो सकती है — और अब तरुण प्लस के साथ इसकी सीमा भी ₹20 लाख तक बढ़ गई है। विस्तार के लिए टर्म लोन या CGTMSE उपयोगी हो सकता है। नकदी प्रवाह की समस्या है तो इनवॉइस फाइनेंसिंग या लाइन ऑफ क्रेडिट मदद कर सकती है। महिला या SC/ST उद्यमी हैं और बड़ी परियोजना शुरू करनी है, तो Stand-Up India के साथ-साथ नई ₹2 करोड़ वाली योजना पर भी नज़र रखें।
साथ ही, केवल ब्याज दर ही न देखें। प्रोसेसिंग फीस, प्री-पेमेंट चार्ज, छिपे हुए शुल्क और पुनर्भुगतान की शर्तों को भी ध्यान से समझें। Udyam Registration, GST, बैंक स्टेटमेंट और ITR जैसे दस्तावेज पहले से तैयार रखें।