
UPI MDR Bill 2026: देश में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और यही वजह है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है। लेकिन जिस UPI का इस्तेमाल ग्राहक और व्यापारी बिना किसी शुल्क के कर रहे हैं, उसके पीछे बैंकों और पेमेंट कंपनियों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। अब संसद में पेश संशोधन विधेयक ने पहली बार ऐसा कानूनी रास्ता खोल दिया है, जिसके बाद भविष्य में सरकार चाहे तो कुछ डिजिटल भुगतान पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू कर सकती है। हालांकि अभी कोई शुल्क लागू नहीं हुआ है और अंतिम फैसला भी बाकी है।
दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ऐसा संशोधन विधेयक पेश किया है जो, Payment and Settlement Systems कानून में बदलाव का रास्ता खोलता है। इससे भविष्य में सरकार नियम बनाकर तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट पर MDR होगा और किन पर नहीं। अभी यह सिर्फ कानूनी प्रावधान है, शुल्क लागू नहीं हुआ है।
MDR यानी M- Merchant, D- Discount, R- Rate यानी वह शुल्क जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है। यही पैसा आगे बैंक, पेमेंट नेटवर्क, पेमेंट एग्रीगेटर, फिनटेक कंपनियों के बीच तय नियमों के अनुसार बंटता है।
बताते चलें कि 2019-20 में सरकार ने UPI और RuPay Debit Card पर MDR खत्म कर दिया था ताकि डिजिटल पेमेंट बढ़े, छोटे व्यापारी जुड़ें, कैश पर निर्भरता घटे और इसके बाद ही UPI में विस्फोटक वृद्धि दर्ज की गई।
UPI चलाना मुफ्त में नहीं चल सकेगा। दरअसल इसके लिए लगातार खर्च होता है, सर्वर, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड, मॉनिटरिंग, बैंकिंग नेटवर्क, डेटा सेंटर, तकनीकी अपग्रेड, ग्राहक सहायता, ये खर्च फिलहाल बैंक और पेमेंट कंपनियां उठा रही हैं। RBI भी कह चुका है कि इस लागत को किसी न किसी को वहन करना होगा।
फिलहाल ग्राहक को पैसे देने को लेकर अब तक कोई चर्चा या विचार नहीं किया जा रहा है। और प्रस्ताव यह नहीं कहता कि ग्राहक से शुल्क लिया जाएगा। यदि भविष्य में MDR लागू होता है तो, उसका भुगतान व्यापारी करेगा। हालांकि व्यापारी चाहें तो, वह लागत सामान या सेवा की कीमत में जोड़ सकते हैं। ऐसे में इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
अब तक सामने आ रही जानकारी के मुताबिक 2000 रुपए से ज्यादा का UPI भुगतान करने पर इसका असर दिखाई देगा। लेकिन फिलहाल ये भुगतान बड़े व्यापारी, बड़े कारोबार जैसे विकल्पों के लिए ही तय किया जाना संभव है। छोटे दुकानदारों और कम राशि वाले भुगतान को राहत देने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
नहीं ऐसा नहीं है कि यह बिल सीधे चार्ज लगा देगा। यही सबसे बड़ा फैक्ट भी है। बिल सिर्फ सरकार को भविष्य में नियम बनाने की शक्ति देता है। चार्ज कब लगेगा, किस पर लगेगा, कितना लगेगा, इनमें से किसी पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ।
कई देशों में कार्ड पेमेंट, डिजिटल वॉलेट, ऑनलाइन भुगतान पर व्यापारी शुल्क देना सामान्य बात है। भारत ने UPI को लगभग शून्य लागत वाला मॉडल बनाकर डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ाया। अब चुनौती यह है कि इस मॉडल को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे रखा जाए।
कहना होगा कि अब सरकार और RBI के सामने चुनौती दोहरी है। एक ओर करोड़ों लोगों के लिए डिजिटल भुगतान सस्ता और आसान बनाए रखना, दूसरी ओर उस पूरी व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ भी बनाना। संसद में आया यह विधेयक उसी संतुलन की दिशा में पहला कानूनी कदम माना जा रहा है, लेकिन MDR लागू होगा या नहीं और यदि होगा तो किस पर और कितना इस पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।