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4G और 5G प्लान के अलग-अलग दाम की तैयारी? जानिए कौन तय करता है मोबाइल टैरिफ, आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?

G 5G plans Different Price: TRAI ने जारी किया मोबाइल नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक को नियमों में शामिल करने का मसौदा, अब 4G और 5G सेवाओं के लिए अलग-अलग कीमत तय करने का रास्ता खुल सकता है। जानिए कौन तय करता है भारत में मोबाइल टैरिफ? इसके पीछे पूरा नियम क्या है और दुनिया में क्या है व्यवस्था?
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 06, 2026

4G 5G Plan Different Price

4G 5G Plan Different Price: क्या 4G 5G के लिए चुकाने होंगे अलग-अलग पैसे, जानिए क्या है मामला? (AI Creative)

4G 5G plans Different Price: अगर आने वाले समय में 4G और 5G प्लान की कीमतें अलग-अलग दिखें तो हैरानी की बात नहीं होगी। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने सेवा गुणवत्ता (QoS) नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें पहली बार Network Slicing तकनीक को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियां एक ही 5G नेटवर्क पर अलग-अलग गुणवत्ता वाली सेवाएं दे सकेंगी और उनके लिए अलग-अलग शुल्क भी तय कर सकेंगी।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अगले ही दिन सभी मोबाइल प्लान महंगे हो जाएंगे। यह फिलहाल मसौदा है और लागू होने से पहले इस पर सभी पक्षों की राय ली जाएगी।

आखिर Network Slicing है क्या?

इसे आसान भाषा में समझें तो 5G नेटवर्क को कई 'वर्चुअल लेन' में बांट दिया जाता है। जैसे एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग लेन होती हैं, वैसे ही एक लेन आम इंटरनेट के लिए, दूसरी अस्पतालों के लिए, तीसरी उद्योगों के लिए और चौथी ड्राइवरलेस वाहन जैसी सेवाओं के लिए बनाई जा सकती है। जिसे ज्यादा स्पीड, कम लेटेंसी और अधिक भरोसेमंद सेवा चाहिए, वह उसके अनुसार अधिक शुल्क देकर अलग नेटवर्क स्लाइस ले सकता है।

मोबाइल रेट कौन तय करता है?

यह सबसे बड़ा सवाल है और इसका जवाब है कि TRAI सीधे कीमत तय नहीं करता है। बल्कि टेलीकॉम कंपनियां अपने टैरिफ तय करती हैं। TRAI सुनिश्चित करता है कि टैरिफ पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियमों के अनुरूप हों।
यदि कोई टैरिफ नियमों का उल्लंघन करता है तो TRAI हस्तक्षेप कर सकता है। स्पेक्ट्रम नीलामी, नेटवर्क लागत, निवेश, प्रतिस्पर्धा और बाजार की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करती है। यानी मोबाइल रिचार्ज का दाम सरकार नहीं बल्कि कंपनियां तय करती हैं, लेकिन नियामकीय ढांचे के भीतर।

क्या अब 4G और 5G के अलग-अलग दाम होंगे?

अलग-अलग कीमतों की संभावना जताई जा रही है, लेकिन यह हर ग्राहक पर लागू होना जरूरी नहीं है। TRAI के मसौदे में कहा गया है कि यदि ऑपरेटर अलग गुणवत्ता वाली सेवा देता है तो, उसके लिए अलग शुल्क लिया जा सकता है। इसका फायदा मुख्य रूप से एंटरप्राइज ग्राहकों, स्मार्ट फैक्ट्री, अस्पताल, क्लाउड गेमिंग और मिशन-क्रिटिकल सेवाओं को मिलेगा। भविष्य में उपभोक्ता स्तर पर भी अलग श्रेणी के प्लान आ सकते हैं।

आखिर रेट तय की जरूरत क्यों पड़ती है?

टेलीकॉम कंपनियां रेट तय करने के कई कारण बताती हैं। इनमें-

  • 5G नेटवर्क लगाने में भारी निवेश।
  • स्पेक्ट्रम खरीदने की बड़ी लागत।
  • फाइबर नेटवर्क और नए टावरों का विस्तार।
  • बिजली, रखरखाव और संचालन खर्च।
  • डेटा खपत में लगातार वृद्धि।

यही कारण है कि समय-समय पर टैरिफ में संशोधन किए जाते हैं।

सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?

यदि भविष्य में अलग-अलग गुणवत्ता वाले प्लान आते हैं तो, इसका असर सीधे उपभोक्ता पर पड़ेगा। सामान्य मोबाइल उपभोक्ता के लिए बेसिक प्लान जारी रह सकते हैं। हाई-स्पीड और प्रीमियम उपयोगकर्ताओं को महंगे प्लान चुनने पड़ सकते हैं। उद्योगों, अस्पतालों, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और AI आधारित सेवाओं को विशेष नेटवर्क उपलब्ध होगा। गेमिंग, AR/VR और ऑटोमेशन जैसी सेवाओं को बेहतर प्रदर्शन मिलेगा।

दूसरे देशों में क्या व्यवस्था है?

दक्षिण कोरिया: 5G नेटवर्क स्लाइसिंग का उपयोग औद्योगिक और स्मार्ट फैक्ट्री प्रोजेक्ट्स में शुरू हो चुका है।
जापान: निजी 5G नेटवर्क और स्लाइसिंग का उपयोग उद्योगों व परिवहन में किया जा रहा है।
यूरोप: कई देशों में 5G SA (Standalone) नेटवर्क के साथ एंटरप्राइज स्लाइसिंग विकसित हो रही है।
अमेरिका: प्रमुख ऑपरेटर बिजनेस ग्राहकों के लिए अलग गुणवत्ता वाली 5G सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
अधिकांश देशों में अभी स्लाइसिंग का उपयोग आम मोबाइल ग्राहकों से ज्यादा उद्योगों और संस्थानों के लिए किया जा रहा है।

भारत में अभी क्या स्थिति है?

भारत में Jio और Airtel 5G Standalone नेटवर्क के विस्तार पर काम कर रहे हैं। TRAI का नया मसौदा इसी तकनीक को नियामकीय आधार देने की दिशा में कदम माना जा रहा है। यदि नियम अंतिम रूप में लागू होते हैं तो भविष्य में सेवा की गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग टैरिफ मॉडल देखने को मिल सकते हैं।

बता दें कि अभी किसी भी कंपनी ने 4G और 5G के लिए अलग-अलग मोबाइल रिचार्ज लागू नहीं किया है। फिलहाल यह केवल नियामकीय मसौदा है, जिस पर सुझाव मांगे गए हैं। अंतिम नियम बनने के बाद ही इसका वास्तविक असर दिखाई देगा। भारत में इसे क्वालिटी बेस्ड प्राइसिंग की शुरुआत का संकेत है। आने वाले वर्षों में ग्राहक केवल डेटा की मात्रा नहीं, बल्कि स्पीड, लेटेंसी और नेटवर्क गुणवत्ता के लिए भी अलग कीमत चुका सकते हैं।