
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल सिर्फ कॉल करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि लाइफ स्टाइल और आवश्यक सेवाओं तक आसानी से पहुंचने का बेहतरीन माध्यम बन गया है। बैंकिग से लेकर रोजमर्रा का सामान खरीदने और अन्य आवश्यक सेवाओं तक मोबाइल के जरिए से आसानी से पहुंचा जा सकता है। छुट्टियों में टूर पर जाने से पहले या यात्रा के दौरान ज्यादातर लोग होटल बुकिंग जैसी सेवाएं वेबसाइट या ऐप के जरिए ऑनलाइन बुकिंग करते हैं। यह तरीका काफी सुविधाजनक है, लेकिन जरा सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है। हाल के महीनों में सामने आए कई मामलों ने यह साफ कर दिया है कि फर्जी बुकिंग वेबसाइट और ठगी के नए-नए तरीके लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
होटल बुकिंग हमेशा प्रतिष्ठित और सत्यापित वेबसाइट या ऐप से ही करनी चाहिए। किसी भी अनजान वेबसाइट पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच जरूर करनी चाहिए। वेबसाइट का URL ठीक से जांचें कि उसमें स्पेलिंग की गलती या असामान्य डोमेन तो नहीं है। इसके अलावा वेबसाइट के पेमेंट पेज पर 'https' व लॉक आइकन जरूर देखें। बुकिंग से पहले होटल की समीक्षाएं (रिव्यू) अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पढ़ें।
अगर संभव हो तो होटल के आधिकारिक नंबर पर कॉल करके बुकिंग की पुष्टि कर लें। कैंसिलेशन और रिफंड पॉलिसी को बुकिंग करने से पहले ध्यान से पढ़ना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो। भुगतान करते समय केवल वेबसाइट के आधिकारिक पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करें। ऐसे मामलों में किसी व्यक्तिगत UPI ID या QR कोड का इस्तेमाल करने से बचें।
ऑनलाइन होटल बुकिंग के दौरान कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं। कई बार बुकिंग कन्फर्म होने के बावजूद होटल पहुंचने पर पता चलता है कि कमरा उपलब्ध ही नहीं है, यानी ओवरबुकिंग हो चुकी है। कभी-कभी वेबसाइट पर दिखाई गई कीमत और होटल पहुंचने पर मांगी गई वास्तविक कीमत में अंतर पाया जाता है।
इसके अलावा कई बार छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क (हिडन चार्जेस) जोड़ दिए जाते हैं। रिफंड में देरी, ग्राहक सेवा से संतोषजनक जवाब न मिलना और बुकिंग रद्द होने पर पूरा पैसा वापस न मिलना भी आम शिकायतें हैं। कई मामलों में फर्जी वेबसाइट पर बुकिंग करने पर पूरी रकम देने के बावजूद न तो कोई बुकिंग कन्फर्मेशन मिलता है और न ही बाद में किए गए फोन कॉल का कोई जवाब आता है। इसलिए होटल बुकिंग करते समय बेहद सतर्क रहना जरूरी है।
फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइट अक्सर असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइट या सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों को फंसाती हैं। कई बार स्कैमर चैटबॉट या खुद को होटल कर्मचारी बताकर मदद की पेशकश करते हैं। इसी दौरान भुगतान की जानकारी हासिल कर लेते हैं।
अगर बुकिंग के दौरान बार-बार पेमेंट फेल होने का मैसेज आए या अलग-अलग नामों के QR कोड या UPI ID से भुगतान करने को कहा जाए तो यह धोखाधड़ी का बड़ा संकेत हो सकता है। असामान्य रूप से भारी छूट या बहुत कम कीमत पर मिल रही डील पर भी शक करना चाहिए। कभी भी OTP, कार्ड नंबर, CVV या नेट बैंकिंग पासवर्ड फोन पर किसी अनजान व्यक्ति को न बताएं, चाहे वह खुद को होटल या बुकिंग वेबसाइट का प्रतिनिधि ही क्यों न बताए।
अगर धोखाधड़ी होने का शक हो या ठगी हो चुकी हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। दूरसंचार विभाग के 'Chakshu' पोर्टल पर भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या धोखाधड़ी की शिकायत की जा सकती है। जल्द से जल्द शिकायत दर्ज कराने से पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि बैंक और पेमेंट गेटवे की मदद से लेन-देन को समय रहते रोका जा सकता है।
भारत में ऑनलाइन होटल बुकिंग सहित सभी ई-कॉमर्स लेनदेन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के दायरे में आते हैं। यह कानून 20 जुलाई 2020 से लागू है। इस अधिनियम के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसे उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन की जांच करने, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने और जुर्माना लगाने का अधिकार है। इसके साथ ही उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के तहत सभी ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म के लिए यह जरूरी है कि वे शिकायत अधिकारी नियुक्त करें।
इन प्लेटफॉर्म को शिकायत मिलने के 48 घंटों के भीतर उपभोक्ता को इसकी सूचना देनी होती है और शिकायत मिलने की तारीख से एक महीने के भीतर उसका निपटारा करना होता है। नए कानून के तहत उपभोक्ता अब लेन-देन की जगह के बजाय अपने रहने या काम करने की जगह के अनुसार उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिससे दूर बैठे भी न्याय पाना आसान हुआ है। अगर होटल बुकिंग प्लेटफॉर्म समय पर शिकायत का समाधान नहीं करता है तो उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर कॉल करके या जिला/राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराकर मुआवजे और रिफंड का दावा कर सकते हैं।