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सोशल मीडिया पर वायरल खबर सही है या फर्जी? ऐसे करें फैक्ट चेक और जानें भ्रामक खबरों की शिकायत करने की प्रक्रिया

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहीं भ्रामक खबरें मुश्किल में डाल सकती हैं। बिना सोचे-समझे भ्रामक खबरों को शेयर या फॉरवर्ड करना जेल की हवा खिला सकता है। इसलिए हर खबर पर भरोसा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं भ्रामक खबरों को कैसे पहचाने और ऐसी खबरों की शिकायत कहां करें?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 02, 2026

viral fake news fact checking

सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)

आज के डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में कुछ ही समय में जरूरी खबरें लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं। डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें (Fake News) भी तेजी से फैलती हैं। ऐसी भ्रामक सूचनाएं सामाजिक तनाव, सांप्रदायिक विवाद, आर्थिक नुकसान, साइबर ठगी, मानहानि और हिंसा जैसी गंभीर घटनाओं को जन्म दे सकती हैं। ऐसी स्थिति में यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि किसी वायरल खबर पर आंख मूंदकर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई कैसे परखी जाए? आज के युग में समस्याएं बढ़ी हैं, लेकिन समाधान भी हैं। आइए जानते हैं कि भ्रांमक और सही खबरों को कैसे परखा जाए?

वायरल खबर पर तुरंत भरोसा न करें

विशेषज्ञों के मुताबिक जिस खबर पर थोड़ा भी शक हो, उसका फैक्ट चेक जरूर करना चाहिए। कई बार वायरल खबरें अफवाह होती हैं या गलत जानकारी पर आधारित होती हैं, जिनसे लोगों में डर, नफरत या गलतफहमी फैलती है। खासतौर पर उग्र या डरावनी भाषा में लिखे गए मैसेज अक्सर फर्जी खबर के संकेत होते हैं, असली खबरें आमतौर पर संतुलित भाषा और तथ्यों पर आधारित होती हैं। वहीं, उकसाने वाली भाषा फर्जी खबरों की पहचान होती है। इसके अलावा व्हाट्सऐप पर जब किसी मैसेज पर 'Forwarded many times' का टैग दिखे तो सतर्क हो जाना चाहिए। यह फर्जी खबर का संकेत हो सकता है।

फर्जी खबरों को कैसे पहचानें?

किसी भी वायरल खबर पर भरोसा करने से पहले यह जरूर देखना चाहिए कि वह खबर किस वेबसाइट या स्रोत से आई है? क्या वह खबर कोई प्रतिष्ठित और भरोसेमंद न्यूज संस्थान है या किसी अनजान पेज से प्रसारित की जा रही है। यह भी जांचना चाहिए कि फोटो या वीडियो कहीं पुराना तो नहीं है या किसी दूसरी घटना का तो नहीं है, जिसे मौजूदा घटना से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया जा रहा हो। ऐसे मामलों में अक्सर पुरानी घटनाओं की तस्वीरें या वीडियो नए संदर्भ के साथ जोड़कर वायरल कर दी जाती हैं।

गूगल रिवर्स इमेज सर्च से करें फोटो की पहचान

अगर कोई तस्वीर वायरल हो रही है और उसकी सच्चाई पर शक है तो गूगल रिवर्स इमेज सर्च या InVID जैसे टूल इस्तेमाल किए जा सकते हैं। फोटो पर राइट क्लिक करके इमेज रिवर्स सर्च गूगल विकल्प चुनने पर गूगल उससे मिलती-जुलती तस्वीरें खोजकर दिखा देता है, जिससे यह पता चल जाता है कि वह तस्वीर पहले कब और कहां इस्तेमाल हुई थी। इसी तरह वीडियो की सच्चाई जानने के लिए भी InVID जैसे टूल के जरिए वीडियो के अलग-अलग फ्रेम निकालकर उन्हें अलग-अलग सर्च किया जा सकता है।

PIB और गूगल फैक्ट चेक करें

अगर कोई सरकारी योजना, नया नियम या सरकार से जुड़ी कोई खबर वायरल हो रही हो और उस पर शक हो, तो प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट की मदद ली जा सकती है। यह भारत सरकार का आधिकारिक फैक्ट चेक प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य फर्जी समाचार फैलाने वालों के लिए निवारक के तौर पर काम करना और लोगों को संदिग्ध जानकारी की रिपोर्ट व जांच कराने का आसान तरीका देना है। हालांकि ध्यान रहे कि PIB फैक्ट चेक यूनिट केवल केंद्र सरकार, उसके मंत्रालयों और विभागों से जुड़ी खबरों की ही जांच करती है। संदिग्ध जानकारी PIB को ट्विटर, फेसबुक या ईमेल के जरिए भेजी जा सकती है। इसके अलावा गूगल का फैक्ट चेक एक्सप्लोरर टूल भी उपयोगी है, जिसमें खबर का टाइटल या कुछ खास कीवर्ड डालने पर यह विभिन्न फैक्ट-चेकिंग वेबसाइटों से मिलान करके जानकारी दिखा देता है।

फैक्ट-चेकिंग वेबसाइटों की मदद लें

भारत में Alt News, BOOM Live, Factly और NBT फैक्ट चेक जैसी कई स्वतंत्र वेबसाइट्स सक्रिय हैं, जो रोजाना वायरल हो रही खबरों, वीडियो और तस्वीरों की गहराई से जांच करती हैं। इन वेबसाइटों पर जाकर कीवर्ड सर्च करने से यह पता चल सकता है कि क्या संबंधित दावे की पहले भी जांच हो चुकी है। कई फैक्ट-चेकिंग संस्थान व्हाट्सऐप या ईमेल पर भी संदिग्ध जानकारी भेजकर पड़ताल कराने की सुविधा देते हैं।

खबर को क्रॉस चेक करें

किसी भी दावे को साझा करने से पहले यह भी जांचना चाहिए कि क्या उसी खबर की पुष्टि किसी और भरोसेमंद न्यूज चैनल या अखबार ने भी की है? अगर कोई खबर केवल एक अनजान सोशल मीडिया पेज या फॉरवर्डेड मैसेज तक सीमित है और किसी बड़े मीडिया संस्थान में नहीं है, तो उस पर शक करना ही बेहतर है। सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य से जुड़े दावों, या किसी आपदा-दुर्घटना से जुड़ी खबरों को बिना पुष्टि के आगे फॉरवर्ड करने से बचना चाहिए। इससे न सिर्फ गलत जानकारी फैलती है, बल्कि कई बार यह कानूनी रूप से भी दंडनीय हो सकता है।

फर्जी खबरों से नुकसान और कानूनी अधिकार

सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें (Fake News) तेजी से फैलती हैं और कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं। ऐसी भ्रामक सूचनाएं सामाजिक तनाव, सांप्रदायिक विवाद, आर्थिक नुकसान, साइबर ठगी, मानहानि और हिंसा जैसी गंभीर घटनाओं को जन्म दे सकती हैं। कई बार लोग बिना तथ्य जांचे किसी संदेश, फोटो या वीडियो को आगे भेज देते हैं, जिससे अफवाहें और गलत जानकारी तेजी से फैलती हैं। फर्जी खबरों के कारण लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है, निवेश संबंधी गलत फैसले हो सकते हैं और सरकारी योजनाओं या स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं से आम जनता प्रभावित हो सकती है।

भारत में ऐसे मामलों से निपटने के लिए विभिन्न कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) तथा अन्य संबंधित कानूनों के तहत अफवाह फैलाने, साइबर धोखाधड़ी, मानहानि और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले मामलों में कार्रवाई की जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति के बारे में फर्जी सामग्री वायरल होती है तो वह संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट कर सकता है। स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है।

भारत सरकार का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन 1930 साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करें, आधिकारिक वेबसाइटों या विश्वसनीय समाचार संस्थानों से जानकारी का सत्यापन करें और भ्रामक संदेशों को आगे बढ़ाने से बचें।