
Ways to Identify Fake Medicines: देश में नकली और मिलावटी दवाओं का बढ़ता कारोबार लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक, नकली दवाइयां असली पैकेजिंग की हूबहू नकल करके बाजार में बेची जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान को खतरा पैदा हो रहा है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि असली और नकली दवा में क्या फर्क होता है? दवाई खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखा जाए और नकली दवा बेचने वाले के खिलाफ कहां और कैसे शिकायत की जाए?
विशेषज्ञों के मुताबिक, नकली दवा की पहचान करने के लिए सबसे पहले पैकेजिंग को ध्यान से देखना चाहिए। पैकेट पर छपे प्रिंट की क्वालिटी, स्पेलिंग में गलती, धुंधला या टेढ़ा-मेढ़ा फॉन्ट, बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग/एक्सपायरी डेट का न होना या अस्पष्ट होना नकली दवा के संकेत हो सकते हैं। असली दवा के रैपर पर होलोग्राम, सुरक्षा मुहर या बारकोड/QR कोड होता है। इस कोड को स्कैन करके दवा की सत्यता जांची जा सकती है। नकली दवाओं में बारकोड/QR कोड या अन्य जानकारी अक्सर गायब होती है या फर्जी तरीके से इसे कॉपी किया गया होता है।
दवाई के बारे में संदेह होने पर निर्माता कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पैकेजिंग की तुलना मूल दवाई से कर सकते हैं। इसके अलावा दवा की गोली, कैप्सूल या सिरप के रंग, बनावट, गंध और स्वाद में सामान्य से अलग बदलाव भी नकली या मिलावटी होने का संकेत हो सकता है। कीमत में असामान्य रूप से भारी छूट भी शक की वजह बन सकती है। नकली दवाएं अक्सर सस्ती दरों पर बेची जाती हैं, ताकि ग्राहक आकर्षित हों।
नकली दवाओं के जाल में फंसने से बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है। इसलिए दवाई हमेशा लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही खरीदनी चाहिए। धोखाधड़ी से बचने के लिए ऑनलाइन एवं अनजान स्रोतों से दवाई खरीदने से बचना चाहिए। दवाई खरीदते वक्त पक्का बिल जरूर लें, क्योंकि यह भविष्य में शिकायत करने पर सबूत का काम करता है।
दवा की एक्सपायरी डेट और बैच नंबर जरूर जांचें। डॉक्टर की पर्ची के अनुसार ही दवा लें। दुकानदार द्वारा बिना प्रिस्क्रिप्शन दी जा रही दवाओं से सतर्क रहें, क्योंकि नियमानुसार शेड्यूल दवाएं बिना पर्ची के नहीं बेची जा सकतीं। हमेशा चेक करें कि दवा की पैकेजिंग सील बंद और छेड़छाड़ मुक्त होनी चाहिए। संभव हो तो सरकार की स्कैनर आधारित प्रणाली से बारकोड/QR कोड चेक करने की आदत डालें।
नकली या मिलावटी दवा बेचे जाने का शक होने पर सबसे पहले स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर या ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट को सूचित किया जा सकता है। इसके अलावा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की वेबसाइट cdsco.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। औषधि महानियंत्रक केंद्र सरकार के अधीन देश में दवाओं की गुणवत्ता को विनियमित करने वाला प्राधिकरण है। इसके अलावा राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर फोन करके या nch-ca@gov.in पर ईमेल भेजकर भी शिकायत की जा सकती है।
उपभोक्ता फोरम में भी नकली दवाओं की शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज कराई जा सकती है। उपभोक्ता नजदीकी पुलिस थाने में भी नकली दवाइयों की शिकायत कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए 104 हेल्पलाइन नंबर का भी उपयोग किया जा सकता है। बिना डॉक्टरी पर्ची के दवा बेचने वाले केमिस्ट के खिलाफ भी स्थानीय ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट या ड्रग इंस्पेक्टर से शिकायत की जा सकती है।
भारत में नकली, मिलावटी और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के लिए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act) लागू है। इस अधिनियम की धारा 27 के तहत नकली (स्पूरियस) दवाओं के निर्माण या बिक्री पर सजा का प्रावधान है। इस कानून के तहत अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा अलग-अलग होती है। जिन नकली दवाओं से किसी व्यक्ति की मृत्यु होने या गंभीर चोट पहुंचने की आशंका होती है, उनके लिए सबसे कड़ी सजा का प्रावधान है। जिसमें लंबी अवधि की कैद और भारी जुर्माना शामिल है।
अपेक्षाकृत कम गंभीर श्रेणी की नकली दवाओं के मामलों में भी अदालत ने न्यूनतम सजा तय कर रखी है। इस कानून के तहत अपराधी पाए जाने पर न्यूनतम 1 वर्ष की कैद का प्रावधान है, जिसे 20 हजार रुपए जुर्माने के साथ 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में अदालत कारण दर्ज कर 1 वर्ष से कम सजा भी दे सकती है। इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 274-276 के तहत भी मिलावटी दवा बेचने या एक दवा को दूसरी बताकर बेचने पर अलग से दंड का प्रावधान है। इसकी सजा अपेक्षाकृत कम गंभीर है। कुछ राज्यों में स्थानीय संशोधनों के जरिए सजा को और सख्त भी किया गया है।