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आपकी मौत के बाद बैंक खाते का क्या होगा? नॉमिनी, कानूनी वारिस और बैंक के नियम समझिए

Bank Account After Death : जानें किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद बैंक खाते के पैसों का क्या होता है। समझिए नॉमिनी और कानूनी वारिस के अधिकार, RBI के 15 दिनों में क्लेम निपटारे के नए नियम और पूरी प्रक्रिया।
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Aug 06, 2026
bank account after death
bank account after death : मौत के बाद बैंक खाते का क्या होता।

किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसका बैंक खाता तुरंत परिवार के नाम नहीं हो जाता। खाते में जमा रकम निकालने के लिए बैंक के तय नियम और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। सबसे बड़ा सवाल होता है। पैसे किसे मिलेंगे, नॉमिनी को या कानूनी वारिस को?

नॉमिनी बैंक रिकॉर्ड में नामित व्यक्ति होता है, जबकि कानूनी वारिस कानून के अनुसार संपत्ति का हकदार होता है। बैंक सबसे पहले रकम नॉमिनी को दे सकता है, लेकिन अंतिम अधिकार कानूनी वारिसों का होता है। नॉमिनी को रकम का संरक्षक (Trustee) माना जाता है, जबकि कानूनी वारिस को संपत्ति का वास्तविक उत्तराधिकारी माना जाता है। जरूरी नहीं कि नॉमिनी ही वारिस हो- परिवार के सदस्य या वसीयत में नामित व्यक्ति भी वारिस हो सकते हैं।

RBI के अनुसार बैंक नॉमिनी को भुगतान करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर सकता है, लेकिन इससे कानूनी वारिसों के अधिकार समाप्त नहीं होते।

अगर खाते में नॉमिनी है तो क्या होगा?

प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है। मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate), नॉमिनी का पहचान पत्र, बैंक का दावा फॉर्म (Claim Form), और पासबुक या खाते की जानकारी।

दस्तावेज सत्यापित होने के बाद बैंक नॉमिनी को रकम जारी कर सकता है। RBI ने बैंकों को ऐसे मामलों में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) मांगकर अनावश्यक परेशानी न देने का निर्देश दिया है।

अगर नॉमिनी नहीं है तो क्या होगा?

यहीं से प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है। बैंक कानूनी वारिसों से निम्न दस्तावेज मांग सकता है: कानूनी वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate), उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate – कुछ मामलों में), शपथ पत्र (Affidavit), इंडेम्निटी बॉन्ड, और पहचान व रिश्ते का प्रमाण।

RBI ने बैंकों को छोटे दावों के लिए सरल प्रक्रिया अपनाने को कहा है, लेकिन राशि और बैंक की नीति के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

पैसे निकालने की प्रक्रिया क्या है?

  • चरण 1: खाताधारक की मृत्यु की सूचना बैंक को दें।
  • चरण 2: मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करें।
  • चरण 3: नॉमिनी या कानूनी वारिस दावा फॉर्म भरें।
  • चरण 4: बैंक दस्तावेजों का सत्यापन करेगा।
  • चरण 5: सत्यापन पूरा होने पर रकम खाते में ट्रांसफर या भुगतान कर दी जाएगी।

कितने दिन लगते हैं?

RBI के निर्देश के अनुसार बैंक को सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद मृत खाताधारक के दावे का निपटारा 15 दिनों के भीतर करना चाहिए। हालांकि दस्तावेजों की कमी, विवाद या कानूनी प्रक्रिया होने पर समय बढ़ सकता है।

ध्यान देने योग्य बात: नियम अभी लागू होने की प्रक्रिया में हैं

RBI का 15 दिन के भीतर दावा निपटाने का यह नियम 'Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks Directions, 2025' के तहत 26 सितंबर 2025 को अधिसूचित किया गया है, और सभी वाणिज्यिक व सहकारी बैंकों को इसे पूरी तरह लागू करने के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय दिया गया है। साथ ही, बिना नॉमिनी वाले खातों में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) मांगे बिना सरल प्रक्रिया से दावा निपटाने की सुविधा हर राशि पर लागू नहीं होती।

यह सुविधा वाणिज्यिक बैंकों में ₹15 लाख तक और सहकारी बैंकों में ₹5 लाख तक के दावों के लिए ही उपलब्ध है। इससे अधिक राशि के दावों में, या परिवार में विवाद होने पर, बैंक अब भी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, वसीयत का प्रोबेट या अदालती आदेश जैसे कानूनी दस्तावेज़ मांग सकते हैं। यदि तय समय-सीमा में दावा नहीं निपटाया जाता, तो बैंक को देरी की अवधि के लिए बैंक दर + 4% प्रति वर्ष की दर से हर्जाना भी देना होगा, और इसके लिए दावेदार को कोई नुकसान साबित करने की जरूरत नहीं है।

अगर परिवार में विवाद हो जाए तो?

यदि कानूनी वारिस और नॉमिनी अलग-अलग व्यक्ति हैं या परिवार में विवाद है, तो बैंक सामान्यतः नॉमिनी को भुगतान कर सकता है। इसके बाद वास्तविक अधिकार का फैसला अदालत या उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार होता है।

Updated on:
06 Aug 2026 09:51 am
Published on:
06 Aug 2026 09:51 am