Patrika+

अंगदान में अब ‘डिजिटल क्रांति’: क्या रियल-टाइम वेटिंग लिस्ट खत्म करेगी ‘सिफारिश’ और देरी का खेल?

अंगदान के लिए लंबा इंतजार करने वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है। नए डिजिटल पोर्टल के जरिए अब वे अपनी वेटिंग लिस्ट की स्थिति रियल-टाइम में देख सकेंगे। इसका मकसद अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और तेज बनाना है।
3 min read
Aug 04, 2026
Organ Transplant
अंगदान से जुड़े नए पोर्टल के बारे में जानिए (ChatGpt)

“रियल‑टाइम वेटिंग लिस्ट” पोर्टल से अंगदान के मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इस लेख में हम समझेंगे कि यह नया डिजिटल ढांचा क्या है, इससे मरीजों, डॉक्टरों और अस्पतालों को क्या लाभ होंगे, और भारत में अंगदान की वर्तमान स्थिति क्या है?

नया पोर्टल क्या है?

राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) एक “डायनामिक नेशनल रजिस्ट्री और वेटिंग लिस्ट” विकसित कर रहा है, जो मरीजों को उनकी वेटिंग लिस्ट में अपनी स्थिति रियल‑टाइम में देखने की सुविधा देगा। यह पोर्टल सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) के सहयोग से तैयार किया जा रहा है और इसमें 712 ट्रांसप्लांट सेंटर, 31 राज्य‑स्तरीय और 5 क्षेत्रीय संस्थाओं को जोड़ा जाएगा।

क्या बदलेगा?

इस पोर्टल से पारदर्शिता बढ़ेगी। मरीज और उनके परिवार अब बार‑बार अस्पताल फोन करने या व्यक्तिगत रूप से पूछताछ करने की बजाय ऑनलाइन अपनी वेटिंग लिस्ट की स्थिति देख सकेंगे। इससे देरी और सिफारिश‑आधारित निर्णयों की संभावना कम होगी।

आधार‑लिंक्ड ऑर्गन प्लेज क्या है?

17 सितंबर 2023 को, NOTTO ने आधार‑लिंक्ड डिजिटल पोर्टल (notto.abdm.gov.in) लॉन्च किया था, ताकि कोई भी नागरिक आसानी से ऑनलाइन अंगदान की प्रतिज्ञा (pledge) कर सकते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से अब तक 5 लाख से अधिक आधार‑सत्यापित प्रतिज्ञाएँ दर्ज की जा चुकी हैं।

मरीजों को क्या फायदा?

रियल‑टाइम वेटिंग लिस्ट से मरीजों को अपनी स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलती है। इससे अनावश्यक यात्रा और तनाव कम होगा। आधार‑लिंक्ड प्लेज से अंगदान की प्रक्रिया सरल और सुरक्षित हुई है, जिससे अधिक लोग इसमें भाग ले रहे हैं। इससे अंग उपलब्धता बढ़ने की संभावना भी है।

डॉक्टर और अस्पतालों को क्या लाभ?

डॉक्टर और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर अब वेटिंग लिस्ट को डिजिटल रूप से मैनेज कर सकते हैं। इससे डेटा की सटीकता बढ़ती है और निर्णय प्रक्रिया तेज होती है। आधार‑लिंक्ड पोर्टल से अस्पतालों को दानदाताओं की जानकारी तुरंत मिल जाती है, जिससे अंगों का समय पर उपयोग संभव होता है।

भारत में अंगदान की स्थिति

2025 में भारत में कुल 20,019 अंग प्रत्यारोपण हुए, जबकि 3 मार्च 2026 तक वेटिंग लिस्ट में 89,839 मरीज थे। 2013 में प्रत्यारोपण की संख्या 5,000 से कम थी, जो 2025 तक लगभग 20,000 हो गई यानी चार गुना वृद्धि। मृत्युपरांत अंगदान में भी इजाफा हुआ है। 2025 में मृत दाताओं से लगभग 18% प्रत्यारोपण हुए। केंद्र सरकार ने हाल ही में राज्यों को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया; 2025 में 3,475 मृत‑दाता प्रत्यारोपण हुए और अभियान के दौरान 1.87 लाख नई प्रतिज्ञाएँ दर्ज हुईं।

क्या हैं चुनौतियाँ?

सबसे बड़ी चुनौती है डेटा की पूर्णता और समय पर रिपोर्टिंग। 2025 में 804 पंजीकृत ट्रांसप्लांट अस्पतालों में से 217 ने राष्ट्रीय रजिस्ट्री पोर्टल पर डेटा रिपोर्ट नहीं किया, जिसके लिए राज्यों को कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा, सभी राज्यों में एकरूप नीति और तकनीकी क्षमता का अभाव है। कुछ राज्यों में वेटिंग लिस्ट और आवंटन मानदंड अलग‑अलग हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एक समान प्रक्रिया लागू करना मुश्किल होता है।

डिजिटल युग में अंग ट्रांसप्लांट प्रणाली में यह बदलाव एक बड़ा कदम है। रियल‑टाइम वेटिंग लिस्ट और आधार‑लिंक्ड प्लेज पोर्टल पारदर्शिता, जवाबदेही और पहुंच बढ़ाने में सहायक हैं। इससे मरीजों को राहत मिलेगी, अस्पतालों को बेहतर प्रबंधन मिलेगा, और अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। आगे की दिशा में, राज्यों की भागीदारी, डेटा की पूर्णता और तकनीकी क्षमता को मजबूत करना जरूरी है ताकि यह प्रणाली हर स्तर पर प्रभावी रूप से काम कर सके।

Updated on:
04 Aug 2026 10:49 am
Published on:
04 Aug 2026 10:48 am