
किसी शहर को 'सुरक्षित' या 'खतरनाक' कहना सिर्फ अपराध के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करता। आजकल रैंकिंग में अपराध, पुलिस व्यवस्था, तकनीक, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क सुरक्षा और जीवन स्तर जैसे कई कारकों को शामिल किया जाता है। यह एक्सप्लेनर Numbeo के आधिकारिक 2025 सेफ्टी/क्राइम इंडेक्स डेटा पर आधारित है।
2025 के सेफ्टी इंडेक्स में मध्य पूर्व और एशिया के शहरों का दबदबा रहा, और खास बात यह है कि टॉप-10 में से आधे शहर अकेले UAE के हैं।
| 🏆 | 🌆 शहर | 🛡️ स्कोर |
|---|---|---|
| 1 | अबू धाबी | 88.4 |
| 2 | दोहा | 84.1 |
| 3 | ताइपे | 83.8 |
| 4 | दुबई | 83.8 |
| 5 | शारजाह | 83.8 |
| 6 | रास अल-खैमा | 83.7 |
| 7 | अजमान | 82.9 |
| 8 | मस्कट | 80.9 |
| 9 | द हेग | 79.5 |
| 10 | म्यूनिख | 79.4 |
इसके ठीक बाद ट्रॉनहैम (नॉर्वे, 79.3) और ज़ाग्रेब (क्रोएशिया, 78.6) आते हैं, जो भी काफी सुरक्षित माने जाते हैं भले ही टॉप-10 में जगह न बना पाएं।
इन शहरों में कम अपराध, मजबूत कानून-व्यवस्था, व्यापक निगरानी प्रणाली (खासकर UAE और कतर के शहरों में) और उच्च जीवन स्तर प्रमुख कारण माने जाते हैं।
क्राइम इंडेक्स 2025 के अनुसार निम्न शहर सबसे अधिक जोखिम वाले माने गए हैं:
| 🚨 | 🌆 शहर | 📊 क्राइम इंडेक्स |
|---|---|---|
| 1 | पीटरमैरिट्जबर्ग | 82.0 |
| 2 | प्रिटोरिया | 81.8 |
| 3 | कराकास | 81.5 |
| 4 | पोर्ट मोरेस्बी | 81.2 |
| 5 | जोहान्सबर्ग | 80.8 |
| 6 | डरबन | 80.6 |
| 7 | सैन पेड्रो सुला | 79.7 |
| 8 | पोर्ट एलिजाबेथ | 78.1 |
| 9 | मेम्फिस | 77.4 |
| 10 | साल्वाडोर | 76.7 |
इन शहरों में हिंसक अपराध, लूटपाट, गिरोह गतिविधियां, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि टॉप-10 खतरनाक शहरों में से आधे (5) अकेले दक्षिण अफ्रीका में हैं।
अपराध दर (Crime Rate) : हत्या, लूट, चोरी, यौन अपराध और वाहन चोरी जैसे आंकड़े किसी शहर की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
कानून और पुलिस व्यवस्था : पुलिस की उपलब्धता, अपराध सुलझाने की दर और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय अहम भूमिका निभाते हैं।
तकनीक और निगरानी : CCTV नेटवर्क, AI आधारित निगरानी, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और डिजिटल पुलिसिंग-दुबई, सिंगापुर और अबू धाबी जैसे शहरों ने तकनीक का व्यापक उपयोग किया है, जो उनकी ऊंची रैंकिंग की एक वजह मानी जाती है।
स्वास्थ्य और आपदा सुरक्षा : अस्पतालों की उपलब्धता, महामारी से निपटने की क्षमता और प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम भी शामिल किया जाता है।
नागरिकों की धारणा : कई इंडेक्स स्थानीय लोगों से यह भी पूछते हैं कि वे रात में अकेले चलने पर कितना सुरक्षित महसूस करते हैं- यह 'अनुभव आधारित' डेटा है, सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड नहीं।
सुरक्षित शहरों में: स्मार्ट कैमरे, फेस रिकग्निशन सिस्टम, रियल-टाइम पुलिस मॉनिटरिंग और डिजिटल शिकायत प्रणाली से अपराध की रोकथाम और जांच तेज होती है।
लेकिन खतरे भी हैं: निजता (Privacy) को लेकर चिंताएं, निगरानी के दुरुपयोग की आशंका, और डेटा सुरक्षा से जुड़े सवाल भी साथ-साथ उठते हैं।
शोध बताते हैं कि बेरोजगारी, गरीबी और शिक्षा की कमी अपराध को बढ़ा सकती है, जबकि बेहतर रोजगार, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाएं सुरक्षा को मजबूत करती हैं। सुरक्षित शहरों में आमतौर पर बेहतर आय, अच्छी शिक्षा, मजबूत सार्वजनिक परिवहन और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देखी जाती हैं।
भारत के बड़े शहर दुनिया की सबसे सुरक्षित या सबसे खतरनाक शहरों की टॉप सूची में नहीं आते, लेकिन देश के भीतर ही शहर-दर-शहर काफी अंतर है। Numbeo 2025 डेटा के अनुसार भारत के प्रमुख शहरों का क्राइम इंडेक्स इस तरह है:
| रैंक | शहर | क्राइम इंडेक्स |
|---|---|---|
| 1️⃣ | दिल्ली | 59.1 |
| 2️⃣ | गाजियाबाद | 59.0 |
| 3️⃣ | बेंगलुरु | 54.2 |
| 4️⃣ | गुड़गांव | 53.6 |
| 5️⃣ | कोलकाता | 46.5 |
| 6️⃣ | मुंबई | 44.3 |
| 7️⃣ | हैदराबाद | 43.1 |
| 8️⃣ | चंडीगढ़ | 43.0 |
| 9️⃣ | पुणे | 41.1 |
| 🔟 | चेन्नई | 39.7 |
यानी दिल्ली और गाजियाबाद अपेक्षाकृत ज्यादा क्राइम इंडेक्स वाले हैं, जबकि चेन्नई, पुणे और हैदराबाद जैसे शहर काफी बेहतर स्थिति में हैं। यह दिखाता है कि "भारत सुरक्षित है या नहीं" का कोई एक जवाब नहीं यह शहर पर निर्भर करता है।