
Zimbabwe new dinosaur discovery: जिन विशालकाय डायनासोरों की तस्वीरें फिल्मों और संग्रहालयों में दिखाई देती हैं, वे हमेशा से इतने बड़े और शक्तिशाली नहीं थे। वैज्ञानिकों ने जिम्बाब्वे में करीब 21 करोड़ वर्ष पुराने एक नए डायनासोर की पहचान की है, जो उस दौर का है, जब डायनासोर पृथ्वी पर अपनी पकड़ बनाना शुरू ही कर रहे थे। यह खोज बताती है कि छोटे, दो पैरों पर चलने वाले शुरुआती शाकाहारी डायनासोर कैसे आगे चलकर पृथ्वी के सबसे विशाल जीवों 'सॉरोपोड' में विकसित हुए।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह जीव उस 'संक्रमण काल' का प्रतिनिधि है, जब डायनासोर आकार में बड़े हो रहे थे, तेजी से विविध हो रहे थे और पूरी दुनिया में फैलने लगे थे। उस समय अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका एक ही महाद्वीप गोंडवाना का हिस्सा थे, इसलिए इन क्षेत्रों के डायनासोरों में करीबी रिश्ते मिलते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका में डायनासोर के जीवाश्म कम मिलने का कारण यह नहीं कि वहां डायनासोर कम थे, बल्कि वहां अपेक्षाकृत कम खोजबीन हुई है। जिम्बाब्वे जैसी खोजें संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में अफ्रीका से विकासवाद के और बड़े रहस्य सामने आ सकते हैं।
उम्र: लगभग 21 करोड़ वर्ष
स्थान: लेक करिबा, जिम्बाब्वे
काल: लेट ट्राइसिक
समूह: सॉरोपोडोमॉर्फ
महत्व: विशालकाय लंबी-गर्दन वाले डायनासोरों के शुरुआती विकास को समझने में बड़ी कड़ी।
23 करोड़ वर्ष पहले - पहले डायनासोर का उदय
21 करोड़ वर्ष पहले - जिम्बाब्वे के नए डायनासोर का समय
20-14.5 करोड़ वर्ष पहले - विशाल सॉरोपोड डायनासोरों का विकास
6.6 करोड़ वर्ष पहले - क्षुद्रग्रह टक्कर के बाद अधिकांश डायनासोर विलुप्त
आज - पक्षियों के रूप में डायनासोरों की वंशावली जीवित
कहना होगा कि जिम्बाब्वे में नए डायनासोर की खोज केवल जीवाश्म मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि पृथ्वी पर इनके शुरुआती जीवन के विकास को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे करोड़ों वर्षों में विकसित होकर धरती के सबसे विशालकाय जीवों में बदल गए। यह खोज इस बात का संकेत है कि अफ्रीका की धरती में अब भी कई रहस्य छिपे हैं, जो भविष्य में विकासवाद और पृथ्वी के इतिहास से जुड़े नए अध्याय खोल सकते हैं।